शहनवाज़ शम्सी, आगरा। “अगर ताजमहल मोहब्बत की पहचान है, तो पेठा आगरा की आत्मा है…” आगरा का नाम सुनते ही जहन में ताजमहल की तस्वीर उभरती है। सफेद संगमरमर का वो अजूबा जो पूरी दुनिया में भारत की पहचान बन चुका है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ताजमहल से भी पहले एक और शाही चीज़ आगरा की गलियों में जन्म ले चुकी थी – पेठा।
पेठा: एक शाही शुरुआत
पेठे की कहानी मुग़ल बादशाह शाहजहाँ के ज़माने से शुरू होती है। इतिहासकारों के अनुसार, जब ताजमहल बनवाने का काम चल रहा था, तो हज़ारों मज़दूर दिन-रात पसीना बहा रहे थे। ऐसे में उनके लिए एक ऐसी मिठाई तैयार की गई जो पौष्टिक हो, हल्की हो और लंबे समय तक टिके। यहीं से जन्म हुआ — पेठा का। शुरू में इसे केवल सादे रूप में बनाया जाता था — कद्दू को उबाल कर, चाशनी में पकाकर, सफेद रंग में परोसा जाता था। इसका स्वाद हल्का लेकिन असरदार था। धीरे-धीरे यह आमजन और राजमहलों दोनों की पसंद बन गया।
‘प्राचीन पेठा’: असली मिठास की पहचान
ताजगंज, सिकंदरा और बालूगंज की गलियों में आज भी कई पेठा दुकानें मिलेंगी, लेकिन ‘प्राचीन पेठा’ ने जिस तरह से परंपरा, स्वाद और शुद्धता को बनाए रखा है, वह काबिल-ए-तारीफ़ है। यहाँ पेठा अब भी हाथों से बनता है — बिना किसी मशीनरी के अत्याधुनिक शोर के।
प्राचीन पेठा की खासियत:
• बिना प्रिज़र्वेटिव और केमिकल के
• देसी कद्दू से तैयार
• रोज़ ताज़ा उत्पादन
• देशभर में फैला स्वाद और विश्वास
क्या आपने ये स्वाद चखे हैं?
अंगूरी पेठा
केसर पेठा
अनारदाना पेठा
गुलाब पेठा
चॉकलेट पेठा
पान पेठा
हर स्वाद में छुपा है एक नया अनुभव — कभी मिट्टी की खुशबू, कभी त्योहारों की मिठास और कभी दादी-नानी के हाथों की याद।
स्वाद नहीं, संस्कृति है यह
पेठा सिर्फ मिठाई नहीं है, यह आगरा की संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। आज जब दुनिया भर में ‘फ्यूजन फूड’ और इंस्टेंट मिठाइयां छाई हुई हैं, तब ‘प्राचीन पेठा’ जैसी दुकानों ने शुद्धता और पारंपरिक तरीकों से मिठास को ज़िंदा रखा है। यहाँ के कारीगर न केवल मिठाई बना रहे हैं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को भी संभाल रहे हैं। हमने जब फैक्ट्री में जाकर पेठा बनाने की प्रक्रिया को क़रीब से देखा, तो समझ में आया कि ये सिर्फ एक मिठाई नहीं — हर टुकड़े में इतिहास बसा है।
आगरा जाएं तो पेठा ज़रूर लें!
यदि आप आगरा जाने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ ताजमहल देखकर वापस मत आइए। ‘प्राचीन पेठा’ के आउटलेट पर ज़रूर जाइए — वहां न केवल मिठाई मिलेगी, बल्कि ताज के दौर की एक मिठासभरी झलक भी।