भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब छोटे कारोबारियों को बिना किसी गारंटी यानी कोलैटरल के 20 लाख रुपये तक का बिजनेस लोन मिल सकेगा। अब तक यह सीमा 10 लाख रुपये थी। इस फैसले की जानकारी RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद दी। सरकार और RBI का मानना है कि इस कदम से छोटे कारोबारियों को बैंक से कर्ज लेने में होने वाली दिक्कतें कम होंगी और उन्हें बिजनेस बढ़ाने के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकेगी।
छोटे कारोबारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
देश में करोड़ों MSMEs ऐसे हैं, जिनके पास बैंक में गिरवी रखने के लिए संपत्ति या सिक्योरिटी नहीं होती। इसी वजह से उन्हें लोन लेने में परेशानी आती है या फिर वे ऊंचे ब्याज पर निजी स्रोतों से कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं। कोलैटरल-फ्री लोन की लिमिट बढ़ने से ऐसे उद्यमियों को राहत मिलेगी। अब वे मशीनरी खरीदने, कच्चा माल लेने, स्टाफ बढ़ाने या नया ऑर्डर पूरा करने के लिए ज्यादा फंड जुटा सकेंगे। इससे न सिर्फ छोटे बिजनेस मजबूत होंगे, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कब से लागू होगी नई लिमिट?
RBI गवर्नर ने साफ किया कि 20 लाख रुपये की बढ़ी हुई लिमिट असल में कुछ समय से नीति का हिस्सा है, लेकिन इसकी जानकारी सभी बैंकों और कर्ज लेने वालों तक ठीक से नहीं पहुंच पाई थी। अब इसे औपचारिक रूप से स्पष्ट कर दिया गया है। यह नई लिमिट 1 अप्रैल 2026 को या उसके बाद मंजूर या रिन्यू होने वाले सभी MSME लोन पर लागू होगी। यानी अगर कोई छोटा कारोबारी अप्रैल 2026 के बाद नया लोन लेता है या पुराने लोन का नवीनीकरण कराता है, तो वह बिना गारंटी 20 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकेगा।
कोलैटरल-फ्री बिजनेस लोन क्या होता है?
कोलैटरल-फ्री बिजनेस लोन एक तरह का अनसिक्योर्ड लोन होता है। इसमें लोन लेने वाले को किसी प्रॉपर्टी, जमीन, मकान या अन्य संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। बैंक आमतौर पर ऐसे लोन के लिए बिजनेस की आय, क्रेडिट हिस्ट्री और लेन-देन के रिकॉर्ड को आधार बनाते हैं। हालांकि, बिना गारंटी वाले लोन में ब्याज दरें थोड़ी ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए यह सुविधा इसलिए अहम है क्योंकि उनके पास अक्सर कोलैटरल के लिए संपत्ति नहीं होती।
जल्द आएंगे नए दिशा-निर्देश
RBI ने अपने मौद्रिक नीति बयान में यह भी कहा है कि कोलैटरल-फ्री लोन की बढ़ी हुई लिमिट को लेकर बैंकों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। इससे बैंकों को यह स्पष्ट दिशा मिलेगी कि वे किस तरह MSMEs को यह सुविधा दें। उम्मीद है कि नए नियमों के बाद लोन प्रोसेसिंग आसान होगी और छोटे कारोबारियों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में तेजी आएगी।
रेपो रेट 5.25% पर स्थिर, EMI में फिलहाल राहत नहीं
इस बैठक में RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है और इसे 5.25% पर ही बरकरार रखा है। रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटती है, तो आमतौर पर लोन सस्ते होते हैं और EMI कम हो सकती है। लेकिन फिलहाल रेपो रेट स्थिर रहने से होम लोन, व्हीकल लोन और बिजनेस लोन की EMI में कोई नई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। दिसंबर 2025 की बैठक में रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई थी, जिसके बाद यह 5.25% पर आ गया था।
MSMEs की ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि कोलैटरल-फ्री लोन की सीमा बढ़ाने से MSMEs को बड़ा फायदा मिलेगा। इससे छोटे कारोबारियों को फाइनेंसिंग की समस्या से कुछ हद तक राहत मिलेगी और वे अपने बिजनेस को विस्तार देने की योजना बना सकेंगे। सरकार की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को भी इससे मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था में MSMEs की भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।