भारत के यात्री वाहन बाजार में त्योहारी सीजन से पहले मजबूत मांग के संकेत मिल रहे हैं। वाहन निर्माता कंपनियां डीलरों को ज्यादा कारें भेज रही हैं, लेकिन पिछले साल की तुलना में इस बार बिक्री और आपूर्ति के बीच का अंतर काफी कम हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि डीलरों के शोरूम पर जमा कारों का स्टॉक घटा है और धनतेरस व दिवाली के दौरान बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में वाहन कंपनियों ने डीलरों को 4,54,574 यात्री वाहन भेजे। इसी अवधि में खुदरा पंजीकरण 4,27,213 वाहनों का रहा। इस तरह थोक आपूर्ति और खुदरा बिक्री के बीच 27,361 वाहनों का अंतर दर्ज किया गया।
पिछले साल सितंबर में यह अंतर 49,956 वाहनों का था। एक साल में इसमें 45.2 फीसदी की कमी आई है। इस दौरान खुदरा पंजीकरण सालाना आधार पर 32.1 फीसदी बढ़ा, जबकि डीलरों को भेजे गए वाहनों की संख्या में 21.8 फीसदी की वृद्धि हुई। खुदरा बिक्री की तेज रफ्तार से बाजार में मांग मजबूत होने का संकेत मिलता है।
डीलरों के पास कितनी कारों का स्टॉक?
FADA के अनुसार, सितंबर 2026 के अंत में डीलरों के पास यात्री वाहनों का स्टॉक लगभग 43 से 45 दिनों की बिक्री के बराबर था। एक साल पहले यह स्तर करीब 60 दिनों का था। हालांकि, त्योहारी मांग को देखते हुए कंपनियों और डीलरों ने अगस्त के 38-40 दिनों के स्टॉक को बढ़ाकर सितंबर में 43-45 दिनों तक पहुंचाया।
FADA के अध्यक्ष साई गिरिधर के मुताबिक, त्योहारों से पहले स्टॉक में यह बढ़ोतरी सामान्य है और फिलहाल इसे चिंता का विषय नहीं माना जा रहा। पिछले साल जीएसटी दरों में बदलाव के कारण कंपनियों ने सितंबर के उत्तरार्ध में डीलरों को अधिक वाहन भेजे थे। अक्टूबर में रिकॉर्ड डिलीवरी के बाद स्टॉक तेजी से कम हुआ था।
मारुति और हुंडई ने बढ़ाई तैयारी
त्योहारी मांग पूरी करने के लिए वाहन कंपनियां उत्पादन और आपूर्ति बढ़ा रही हैं। मारुति सुजुकी के पास 1 अक्टूबर तक दो लाख से अधिक लंबित बुकिंग थीं और डीलर स्टॉक करीब 17 दिनों का था। कंपनी ने आपूर्ति बेहतर करने के लिए खरखौदा संयंत्र में उत्पादन बढ़ाया है। वहीं, हुंडई मोटर इंडिया लगभग चार से पांच सप्ताह का डीलर स्टॉक बनाए हुए थी।
ग्राहकों को मिल रहे बड़े डिस्काउंट
कार खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए भी त्योहारों का समय फायदेमंद हो सकता है। डीलर सूत्रों के अनुसार, चुनिंदा मॉडल और वेरिएंट पर कंपनियां करीब 25,000 रुपये से लेकर 1.5 लाख रुपये या उससे अधिक तक के लाभ दे रही हैं। इनमें नकद छूट, एक्सचेंज बोनस, स्क्रैपेज बोनस और लॉयल्टी ऑफर शामिल हैं। कुछ इलेक्ट्रिक वाहनों और चुनिंदा पुराने मॉडलों पर छूट तीन लाख रुपये से अधिक भी हो सकती है।
FADA के सितंबर सर्वेक्षण में 75.57 फीसदी लोगों ने अक्टूबर में बिक्री बढ़ने की उम्मीद जताई, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 67.09 फीसदी था।
कुल मिलाकर, कम होता स्टॉक, मजबूत खुदरा पंजीकरण और त्योहारी ऑफर कार बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में मांग कमजोर पड़ती है, तो डीलरों के पास इन्वेंट्री फिर तेजी से बढ़ सकती है।