भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। पिछले सप्ताह की तेजी के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। महंगे कच्चे तेल, बैंकिंग शेयरों में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार पर दबाव बनाया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,020 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 22,850 के आसपास फिसल गया।
इस गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण शुक्रवार के 472.62 लाख करोड़ रुपये से घटकर सोमवार दोपहर करीब 1:50 बजे 468.30 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह निवेशकों की संपत्ति में लगभग 4.32 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बढ़ा दबाव
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह बैंकिंग शेयरों में कमजोरी रही। सितंबर तिमाही के नतीजों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी खबरों के बीच निवेशकों ने कई बड़े शेयरों में बिकवाली की। एचडीएफसी बैंक का शेयर करीब 3 फीसदी तक गिरा, जबकि एक्सिस बैंक में 5 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई। इसके चलते निजी बैंकिंग इंडेक्स पर भी दबाव देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियों के तिमाही नतीजे और प्रबंधन की भविष्य की कारोबारी संभावनाओं से जुड़ी टिप्पणियां आगे शेयरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। सोमवार को इसमें कुछ नरमी आई, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण सप्लाई को लेकर आशंकाएं बनी रहीं।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने से आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और देश के चालू खाते के घाटे पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार कमजोर
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने भी घरेलू बाजार की मुश्किलें बढ़ाईं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में उनकी शुद्ध बिकवाली करीब 52,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से बाजार में उपलब्ध तरलता और निवेशकों के भरोसे पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की गिरावट ने भी निवेशकों की धारणा प्रभावित की। भारत में उतार-चढ़ाव मापने वाला इंडिया VIX भी 5.5 फीसदी से ज्यादा उछलकर 14.84 के स्तर पर पहुंच गया।
बर्नस्टीन ने घटाया निफ्टी का लक्ष्य
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी का लक्ष्य 26,000 से घटाकर 25,000 कर दिया। रिपोर्ट में महंगे कच्चे तेल, आर्थिक परिस्थितियों और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया गया।
कुल मिलाकर, बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और जोखिम का आकलन करके निर्णय लेना महत्वपूर्ण है।