भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को लेकर चर्चा लंबे समय से चल रही है, लेकिन 2025 में केरल ने इस दिशा में जो कदम बढ़ाए हैं, उन्होंने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। खास बात यह है कि केरल में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की अगुवाई कोई कॉर्पोरेट फ्लीट या कमर्शियल सेगमेंट नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवार कर रहे हैं। यही वजह है कि राज्य आज निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में देश में अव्वल बनकर उभरा है।
मध्यम वर्ग बना EV क्रांति की असली ताकत
2025 में केरल के हजारों मध्यमवर्गीय घरों में निजी चार्जिंग बॉक्स लगाए गए। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि इलेक्ट्रिक वाहन अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बनते जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि लोग पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरणीय चिंता के बीच ईवी को एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
EV नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली तस्वीर
केरल उन शुरुआती राज्यों में शामिल रहा है, जिसने वर्ष 2019 में ही इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू कर दी थी। समय के साथ सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सब्सिडी और जागरूकता अभियानों पर लगातार काम किया। इसका नतीजा यह हुआ कि जहां 2022 में राज्य में ईवी की पैठ मुश्किल से 5 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 12 प्रतिशत से ज्यादा हो गई।
EV पैठ में दिल्ली के बाद केरल दूसरे स्थान पर
एनवायरोकैटलिस्ट्स के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ के मामले में दिल्ली 13.91 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि केरल 12.08 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर पहुंच गया। कर्नाटक (10.64%), उत्तर प्रदेश (9.89%) और मध्य प्रदेश (8.23%) इसके बाद आते हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि केरल ने बहुत कम समय में EV अपनाने की रफ्तार को दोगुना कर दिया है।
निजी वाहनों की हिस्सेदारी ने बनाया केरल को खास
एनवायरोकैटलिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया के अनुसार, केरल को एक खास EV बाजार बनाने वाला सबसे बड़ा कारण निजी वाहनों की मजबूत हिस्सेदारी है। राज्य में कुल EV बाजार का 93.4 प्रतिशत हिस्सा निजी वाहनों का है। इसमें दोपहिया और चारपहिया, दोनों सेगमेंट शामिल हैं।
कर्नाटक जैसे राज्यों में जहां निजी EV में दोपहिया वाहनों का दबदबा ज्यादा है, वहीं केरल में तस्वीर अलग है। यहां दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत और चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत है। यह साफ संकेत है कि केरल का मध्यम वर्ग अब इलेक्ट्रिक कारों को भी तेजी से अपना रहा है।
दोपहिया और चारपहिया, दोनों में मजबूत बिक्री
राज्य में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में एथर एनर्जी, बजाज ऑटो और टीवीएस मोटर सबसे आगे हैं। इन तीनों कंपनियों की कुल बाजार हिस्सेदारी लगभग 72 प्रतिशत है। अकेले 2025 में केरल में 80,261 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बेचे गए। वहीं निजी इलेक्ट्रिक चारपहिया सेगमेंट में भी केरल ने मजबूत पकड़ बनाई है। 2025 में बिके 18,891 निजी इलेक्ट्रिक चारपहिया वाहनों में टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का दबदबा सबसे ज्यादा रहा। इसके बाद जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर और महिंद्रा इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल्स का नंबर आता है।
जागरूकता और स्टेटस सिंबल भी बड़ी वजह
उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि केरल में EV की बढ़ती लोकप्रियता का का कारण ईंधन की बचत तो है ही साथ में जागरूकता और सामाजिक सोच भी बड़ी वजह है। बीएनसी मोटर्स के सीईओ अनिरुद्ध रवि नारायणन के अनुसार, लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अब प्रीमियम और स्टेटस सिंबल के रूप में भी देखने लगे हैं। साथ ही राज्य में चार्जिंग की सुविधा अपेक्षाकृत बेहतर है, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ने दी मजबूती
भारी उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में फिलहाल 1,389 चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। इनमें 553 फास्ट चार्जर और 836 स्लो चार्जर शामिल हैं। इनका संचालन निजी कंपनियों के साथ-साथ केरल विद्युत बोर्ड भी कर रहा है। यही मजबूत नेटवर्क EV अपनाने की रफ्तार को और तेज कर रहा है।
भविष्य की ओर बढ़ता केरल
उच्च प्रति व्यक्ति आय, बड़ी एनआरआई आबादी, सरकारी सहयोग और नए ब्रांडों को अपनाने की सोच ने केरल को इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में देश का रोल मॉडल बना दिया है। जिस तरह से मध्यम वर्ग आगे आकर EV को अपना रहा है, उससे साफ है कि आने वाले वर्षों में केरल भारत की EV क्रांति का नेतृत्व करता नजर आ सकता है।