government scheme: उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए राज्य सरकार अब पारंपरिक अनाज फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों पर जोर दे रही है। इसी दिशा में किसानों को ड्रैगन फ्रूट और गेंदा फूल जैसी नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बदलते बाजार और उपभोक्ता मांग को देखते हुए यदि किसान वैल्यू-एडेड फसलों की ओर बढ़ते हैं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
मुख्यमंत्री औद्यानिक विकास योजना से मिल रहा सीधा लाभ
राज्य में यह पहल ‘मुख्यमंत्री औद्यानिक विकास योजना’ के तहत लागू की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को बागवानी और नकदी फसलों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में सरकार खेती के विविधीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि किसान केवल धान-गेहूं पर निर्भर न रहें। योजना के अंतर्गत ड्रैगन फ्रूट और गेंदा फूल की खेती पर आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है, जिससे किसानों की शुरुआती लागत कम हो और वे जोखिम के बिना नई फसलें अपनाने के लिए प्रेरित हों।
ड्रैगन फ्रूट पर ₹1.62 लाख तक अनुदान
ड्रैगन फ्रूट को ‘सुपरफूड’ माना जाता है और इसकी बाजार मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि इसकी खेती की शुरुआती लागत अधिक होती है, क्योंकि पौधे, सहारा संरचना और सिंचाई व्यवस्था पर खर्च आता है। इसी कारण सरकार किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए ₹1.62 लाख प्रति हेक्टेयर तक अनुदान दे रही है। यह सब्सिडी किसानों के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि एक बार बाग लग जाने के बाद यह फसल लगभग 25 वर्ष तक उत्पादन देती है। यानी किसान लंबे समय तक स्थिर आय प्राप्त कर सकते हैं।
गेंदा फूल की खेती पर 40% सब्सिडी
गेंदा फूल की खेती भी किसानों के लिए कम लागत और स्थिर मांग वाला विकल्प है। धार्मिक, सामाजिक और सजावटी उपयोग के कारण इसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है। सरकार गेंदा खेती की लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। इससे छोटे और मध्यम किसान भी फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फूलों की खेती में कम समय में आय मिलती है और बाजार जोखिम भी अपेक्षाकृत कम होता है। इसलिए यह पारंपरिक फसलों का अच्छा विकल्प बन सकती है।
आवेदन प्रक्रिया शुरू, पहले आओ-पहले पाओ आधार
योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसान अपने जिले के उद्यान विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं या राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। लाभार्थियों का चयन ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। आवेदन के लिए किसानों को आधार कार्ड, खतौनी, बैंक पासबुक और फोटो जैसे दस्तावेज जमा करने होंगे। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दे रहे हैं, ताकि वे नई फसलें सही तरीके से लगा सकें।
ड्रैगन फ्रूट खेती क्यों है भविष्य की फसल
ड्रैगन फ्रूट की खेती को भविष्य की खेती माना जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषता यह है कि एक बार पौधे लगाने के बाद लगभग सवा से डेढ़ वर्ष में फल आना शुरू हो जाता है और पौधे 25 वर्ष तक उत्पादन देते हैं। इसके अलावा इसकी मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। यह फसल फरवरी-मार्च में लगाने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। पोषक तत्वों और स्वास्थ्य लाभों के कारण बाजार में इसका मूल्य अधिक मिलता है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है।
गेंदे की खेती: कम जोखिम, स्थिर आय
गेंदा फूल की खेती भी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही है। शादी-विवाह, त्योहार, मंदिर सजावट और कार्यक्रमों में इसकी लगातार मांग रहती है। इसकी फसल जल्दी तैयार हो जाती है और कई बार वर्ष में दो-तीन बार उत्पादन संभव होता है। फूलों की खेती में लागत अपेक्षाकृत कम और बाजार तैयार रहता है, इसलिए किसान तेजी से नकदी प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि सरकार इसे आय बढ़ाने वाली फसल के रूप में बढ़ावा दे रही है।
खेती का बदलता ट्रेंड: अनाज से नकदी फसल की ओर
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में खेती का स्वरूप धीरे-धीरे बदल रहा है। केवल खाद्यान्न फसलों पर निर्भर रहने के बजाय किसान अब बागवानी, फल, फूल और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे कम भूमि में भी अधिक आय संभव हो रही है। उत्तर प्रदेश में ड्रैगन फ्रूट और गेंदा जैसी फसलों को बढ़ावा देना इसी बदलाव का हिस्सा है। सरकार की सब्सिडी और तकनीकी सहयोग से किसान नई खेती अपनाने का जोखिम कम महसूस कर रहे हैं।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
ड्रैगन फ्रूट और गेंदा खेती पर दी जा रही सब्सिडी किसानों के लिए आय बढ़ाने का बड़ा अवसर है। पारंपरिक खेती की सीमित आय से आगे बढ़कर यदि किसान इन नकदी फसलों को अपनाते हैं तो उन्हें लंबे समय तक स्थिर और अधिक लाभ मिल सकता है। सरकार की यह पहल न केवल खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने की क्षमता रखती है। आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश में बागवानी और नकदी फसलों का क्षेत्र तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।