QR कोड, WhatsApp ऑर्डर और ONDC से अब मोहल्ले की दुकानों की तस्वीर बदले लगी है।
आगरा से अलीगढ़ तक: डिजिटल बनते दुकानदार
52 वर्षीय राजीव गुप्ता की दुकान अब सिर्फ किराना की नहीं रही—वो डिजिटल सेवा केंद्र बन चुकी है। WhatsApp बिज़नेस, साउंडबॉक्स, QR पेमेंट, Google Forms और ONDC लिस्टिंग जैसी तकनीकों ने उनकी दुकान का कायाकल्प कर दिया।
“अब कैश का झंझट नहीं। ग्राहक WhatsApp से लिस्ट भेजते हैं, हम शाम तक डिलीवर कर देते हैं।” – राजीव गुप्ता, किराना दुकानदार, कमला नगर, आगरा
कोविड से मिली डिजिटल दिशा
• महामारी के दौरान जब ग्राहक बाहर नहीं निकल पा रहे थे, दुकानदारों ने WhatsApp और UPI को अपनाना शुरू किया।
• लॉकडाउन के बाद भी डिजिटल आदतें बनी रहीं और यही बना किराने के डिजिटल ट्रांज़िशन का टर्निंग पॉइंट।
“पहले उधार पर काम चलता था, अब हर ऑर्डर WhatsApp से आता है और पेमेंट UPI से।” – राशिद अंसारी, किराना व्यापारी, मेरठ
वेस्ट यूपी में किराना स्टोर्स का डिजिटल इकोसिस्टम
| डिजिटल सुविधा | अपनाने वाले दुकानदार (%) |
|---|---|
| WhatsApp ऑर्डरिंग | 65% |
| QR कोड पेमेंट (UPI) | 80% |
| ONDC पर लिस्टिंग | 25% |
| Google Forms / Online Tracking | 10% |
| डिजिटल साउंडबॉक्स | 70% |
ONDC: छोटे दुकानदारों की बड़ी छलांग
भारत सरकार की ONDC पहल के ज़रिए छोटे दुकानदारों को अब Flipkart या Amazon जैसी डिलीवरी और डिस्कवरी सुविधाएं मिल रही हैं – बिना भारी कमीशन के। “हम ONDC पर हैं, अब ग्राहक ऐप से ऑर्डर करता है, हम मोहल्ले में फटाफट डिलीवरी करते हैं।” – शिवप्रसाद यादव, मथुरा
WhatsApp और Google Forms से प्रोफेशनल ऑर्डरिंग
• सोसाइटीज़ और फ्लैट कल्चर में WhatsApp ऑर्डरिंग ने बूम किया है।
• Google Forms के ज़रिए सप्ताहिक / मासिक ऑर्डरिंग भी शुरू हो चुकी है।
“हमारा ऑर्डर फॉर्म सोसायटी के ग्रुप में जाता है, ऑर्डर आते ही डिलीवरी की प्लानिंग हो जाती है।” – नवीन सक्सेना, सहारनपुर
चुनौतियां: नेटवर्क, तकनीक और आदतें
• बुज़ुर्ग ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट समझाने में परेशानी
• नेटवर्क गड़बड़ी से लेनदेन अटक जाते हैं
• डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण युवाओं पर निर्भरता
“गांव के कई ग्राहक कहते हैं – ‘बेटा, कैश ही दे दो’।” – मुख्तार अहमद, हापुड़
फिनटेक कंपनियों और सरकारी योजनाओं का सहयोग
• Paytm, PhonePe, BharatPe जैसी कंपनियों ने साउंडबॉक्स, इंस्टेंट लोन, इनवॉइसिंग जैसे टूल्स दिए
• PM स्वनिधि योजना के तहत कई दुकानदारों को डिजिटल ट्रेनिंग और ₹10,000–₹50,000 तक लोन मिले
• स्थानीय नगर निकाय डिजिटल सुविधा विस्तार में सहयोग कर रहे हैं
“बरेली में 1700+ दुकानदारों को डिजिटल लोन और प्रशिक्षण मिला है।” – बरेली नगर निगम अधिकारी
नया मॉडल: हाइब्रिड किराना बिजनेस
• परंपरा + तकनीक = सफलता
• अब दुकानें सिर्फ राशन देने वाली जगह नहीं, बल्कि मल्टी-सेवा केंद्र बन रही हैं:
➤ बिल पेमेंट
➤ रिचार्ज
➤ इंश्योरेंस
➤ सरकारी स्कीम सहायता
“दादाजी की दुकान अब बेटा WhatsApp से चला रहा है – दोनों का संतुलन कमाल है।” – सुरेश गुप्ता, फिरोज़ाबाद
भविष्य की दिशा: ‘डिजिटल किराना हब्स’
“Digital India का अगला चमत्कार ‘मोहल्ले की दुकानों’ में ही होगा।” – डॉ. नीलिमा शर्मा, ई-कॉम एक्सपर्ट
पश्चिमी यूपी के शहर अब ‘डिजिटल किराना हब्स’ बनने की ओर अग्रसर हैं – जहां एक छोटी दुकान पूरे मोहल्ले की डिजिटल ज़रूरतें पूरी करेगी।
निष्कर्ष: डिजिटल से आत्मनिर्भरता
किराना स्टोर्स का डिजिटल परिवर्तन सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों की नई पहचान और आत्मनिर्भरता की कहानी है। QR कोड, WhatsApp और ONDC — इन तीन स्तंभों पर टिका है मोहल्ले की दुकान का नया डिजिटल युग।