मुंबई। देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। सितंबर 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान बैंक का समेकित शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 22.25 फीसदी बढ़कर 16,333 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में बैंक ने 13,357.06 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था।
कुल आमदनी में 15.8% की बढ़ोतरी
बैंक की कुल समेकित आमदनी में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 88,161.18 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में कुल आमदनी 76,146.59 करोड़ रुपये थी। इस तरह बैंक की कुल आमदनी में सालाना आधार पर करीब 15.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
बैंक के मुनाफे और आमदनी में यह वृद्धि उसके कारोबार में विस्तार और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाती है।
कर्ज और जमा में बढ़ोतरी से मिला सहारा
ICICI बैंक के प्रदर्शन को कर्ज की मांग में मजबूती से भी समर्थन मिला। उपलब्ध तिमाही आंकड़ों के अनुसार, बैंक के स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 20.1 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 14,843 करोड़ रुपये रहा। बैंक की शुद्ध ब्याज आय 17.7 फीसदी बढ़कर 25,339 करोड़ रुपये पहुंच गई।
इस दौरान बैंक के कुल कर्ज में सालाना आधार पर 30 फीसदी और जमा में 27.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, शुद्ध ब्याज मार्जिन पिछली तिमाही के 4.36 फीसदी से घटकर 4.18 फीसदी रह गया।
बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी सुधार देखने को मिला। सितंबर 2026 के अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) अनुपात घटकर 1.20 फीसदी रह गया, जो जून 2026 के अंत में 1.38 फीसदी था। इससे संकेत मिलता है कि बैंक के कुल कर्ज के मुकाबले खराब कर्ज का अनुपात कम हुआ है।
इसके अलावा, संभावित खराब कर्ज के लिए किए जाने वाले प्रावधानों में भी सालाना आधार पर 6.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या हैं संकेत?
ICICI बैंक के तिमाही नतीजे बताते हैं कि कर्ज की मांग और ब्याज से होने वाली आय में वृद्धि बैंकिंग कारोबार को सहारा दे रही है। हालांकि, शुद्ध ब्याज मार्जिन में आई गिरावट यह भी दिखाती है कि बैंकों के लिए जमा की लागत और कर्ज से होने वाली कमाई के बीच संतुलन बनाए रखना अहम बना हुआ है।
कुल मिलाकर, दूसरी तिमाही में ICICI बैंक ने मुनाफे, आमदनी और एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है। आने वाली तिमाहियों में कर्ज की मांग, जमा जुटाने की लागत और ब्याज मार्जिन बैंक के वित्तीय प्रदर्शन की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।