दुनिया तेजी से बदल रही है और भारत इस बदलाव की धुरी बन रहा है वह चाहे तकनीकी क्षेत्र हो, रक्षा, निवेश या फिर उद्यमिता का क्षेत्र क्यों न ही हो? भारत में भी रक्षा कंपनियों को मिनीरत्न-I का दर्जा मिलना हो या टाटा स्टील की नई औद्योगिक पहल, यह आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदम हैं। जहां बड़ी कंपनियां और सरकारें नई संभावनाओं को साकार कर रही हैं, वहीं युवा उद्यमियों के बढ़ते कदम भी भारत के आर्थिक भविष्य की आशा बन रहें हैं। कोलकाता के नंदन मल ने मात्र 24 वर्ष की उम्र में कंपनी की शुरुआत और कुछ ही वर्षों में कंपनी का टर्नओवर 7.5 करोड़ रुपये पहुंचा दिया। यह कहानी आने वाले युवा भारत की सोच को दर्शाती है। वहीं SEBI के नियामकीय सुधारों ने निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है। परंतु इस तरक्की के बीच कई चेतावनी भी हैं। ईरान-इज़राइल युद्ध से पैदा हुए संकट जैसे – वैश्विक तनाव, LPG कीमतों के जरिए भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इन सभी तमाम महत्वपूर्ण पहलुओं के साथ इंडस्ट्रियल एम्पायर का यह अंक केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी का आह्वान है – तकनीक, तरक्की और ट्रांसपेरेंसी के साथ आगे बढ़ने का।
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