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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बैंकिंग > ₹50 लाख से ज्यादा कमाने वालों पर IT विभाग की नजर: विदेशी संपत्ति, क्रिप्टो और फर्जी क्लेम पर सख्ती
बैंकिंग

₹50 लाख से ज्यादा कमाने वालों पर IT विभाग की नजर: विदेशी संपत्ति, क्रिप्टो और फर्जी क्लेम पर सख्ती

Last updated: 23/02/2026 10:52 AM
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Industrial Empire
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₹50 लाख से अधिक आय वालों पर आयकर विभाग की नजर, विदेशी संपत्ति और क्रिप्टो आय पर IT नोटिस
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देश में उच्च आय वर्ग के करदाताओं पर आयकर विभाग (IT) ने निगरानी तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सालाना ₹50 लाख से अधिक कमाने वाले कई कॉरपोरेट अधिकारियों और पेशेवरों के आयकर रिटर्न में अनियमितताएं पाई गई हैं। इसके बाद आयकर विभाग ने ऐसे करदाताओं को नोटिस भेजकर संशोधित रिटर्न दाखिल करने का मौका दिया है। विभाग का साफ संदेश है – यदि समय रहते जानकारी सही नहीं की गई तो जुर्माना, ब्याज और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

किन मामलों में मिली गड़बड़ी
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कई उच्च आय वर्ग के करदाताओं ने विदेशी आय और विदेशी संपत्तियों का पूरा खुलासा नहीं किया। कुछ मामलों में शेयर आधारित लाभ जैसे ESOP या स्टॉक लिंक्ड इनकम को कम दिखाया गया, जबकि भत्तों और प्रतिपूर्ति के दावे बढ़ाकर पेश किए गए। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च आय वर्ग के करदाताओं के पास अक्सर कई स्रोतों से आय होती है—विदेशी निवेश, ग्लोबल स्टॉक, बोनस, क्रिप्टो और परिकर सुविधाएं। ऐसे में सही रिपोर्टिंग न होने पर विसंगतियां पकड़ में आना आसान हो जाता है।

विदेशी संपत्ति का खुलासा क्यों जरूरी
भारतीय कर कानून के अनुसार जो व्यक्ति “रेजिडेंट और ऑर्डिनरी रेजिडेंट” श्रेणी में आते हैं, उन्हें अपने आयकर रिटर्न में शेड्यूल FA के तहत सभी विदेशी संपत्तियों और खातों की जानकारी देना अनिवार्य है। यह नियम केवल कानूनी स्वामित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि लाभकारी स्वामित्व (beneficial ownership) और लाभार्थी स्थिति पर भी लागू होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई लोग यह मान लेते हैं कि यदि विदेशी संपत्ति पत्नी या बच्चे के नाम पर है तो उसे दिखाने की जरूरत नहीं। जबकि यदि निवेश का पैसा संबंधित व्यक्ति ने लगाया है या लाभ उसे मिल रहा है, तो खुलासा करना जरूरी है। जानकारी छिपाना कानूनन उल्लंघन माना जा सकता है।

विदेशी शेयर, बैंक खाते और क्रिप्टो पर खास नजर
आयकर विभाग विदेशी शेयर होल्डिंग, ओवरसीज बैंक अकाउंट और क्रिप्टोकरेंसी आय पर खास निगरानी रख रहा है। कई फ्रीलांसर या पेशेवर विदेशी क्लाइंट से क्रिप्टो में भुगतान प्राप्त करते हैं और उसे औपचारिक आय के बजाय केवल निवेश या कैपिटल गेन मान लेते हैं। टैक्स नियमों के अनुसार क्रिप्टो में प्राप्त भुगतान को प्राप्ति की तारीख के बाजार मूल्य पर आय के रूप में घोषित करना जरूरी है। इसे वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) श्रेणी में दिखाना होता है और इस पर विशेष कर प्रावधान लागू होते हैं। यदि पहले सही खुलासा नहीं हुआ है तो संशोधित रिटर्न या ITR-U के माध्यम से सुधार किया जा सकता है।

वेतनभोगियों के भत्तों और रिइम्बर्समेंट में गड़बड़ी
जांच में यह भी पाया गया कि कुछ वेतनभोगी करदाता किराया रसीदें बढ़ाकर दिखाते हैं, बिना यात्रा किए LTA क्लेम करते हैं या फर्जी बिलों के आधार पर प्रतिपूर्ति का दावा कर लेते हैं। नियोक्ता के रिकॉर्ड, फॉर्म-16 और आयकर डेटा मिलान में यह अंतर सामने आ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भत्तों और छूट के दावे हमेशा वास्तविक दस्तावेजों पर आधारित होने चाहिए। किराया समझौता, बैंक ट्रांसफर और वास्तविक बिल सुरक्षित रखना जरूरी है। यदि अधिक छूट का दावा हो गया है तो संशोधित रिटर्न दाखिल कर अतिरिक्त कर और ब्याज जमा करना सुरक्षित विकल्प है।

फर्जी दान पर भी कड़ी कार्रवाई
दान पर टैक्स छूट के नाम पर भी अनियमितताएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में बैंकिंग माध्यम से दान दिखाकर बाद में नकद राशि वापस लेने की प्रवृत्ति पाई गई है। ऐसे मामलों को विभाग गंभीर कर उल्लंघन मानता है। कर विशेषज्ञों के अनुसार दान केवल वैध और पंजीकृत संस्थाओं को ही करना चाहिए, जिनकी धारा 80G के तहत मान्यता हो। भुगतान बैंकिंग माध्यम से हो और आधिकारिक रसीद मौजूद हो। गलत कटौती का दावा किया गया हो तो ITR-U के जरिए सुधार करना बेहतर रहता है।

संशोधित रिटर्न का मौका क्यों दिया गया
आयकर विभाग का उद्देश्य सीधे दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं बल्कि करदाताओं को स्वेच्छा से त्रुटि सुधारने का अवसर देना है। इसलिए जिन मामलों में विसंगतियां मिली हैं, उनमें पहले नोटिस देकर संशोधित रिटर्न दाखिल करने का विकल्प दिया जा रहा है। लेकिन यदि निर्धारित समय में सुधार नहीं किया गया तो विभाग जुर्माना, ब्याज, विस्तृत जांच और गंभीर मामलों में अभियोजन भी शुरू कर सकता है।

नोटिस मिलने पर क्या करें
यदि किसी करदाता को आयकर विभाग से नोटिस मिलता है तो घबराने के बजाय पहले उसकी प्रामाणिकता जांचना जरूरी है। ई-फाइलिंग पोर्टल पर दस्तावेज पहचान संख्या (DIN) से नोटिस सत्यापित करें। इसके बाद AIS, TIS और फॉर्म 26AS से आय और लेनदेन का मिलान करें। यदि रिटर्न में गलती है और संशोधित रिटर्न की समय सीमा निकल चुकी है तो ITR-U के माध्यम से सुधार किया जा सकता है। यदि दावा सही है तो दस्तावेजों के साथ तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जवाब देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

हाई इनकम टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा संदेश
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि आयकर विभाग अब उच्च आय वर्ग के करदाताओं की वैश्विक आय, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टो लेनदेन और टैक्स छूट दावों की डिजिटल निगरानी बढ़ा चुका है। अंतरराष्ट्रीय डेटा साझाकरण और वित्तीय ट्रैकिंग के कारण आय छिपाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है। विशेषज्ञों की सलाह है कि उच्च आय वर्ग के करदाता अपनी सभी आय स्रोतों, विदेशी निवेश और संपत्ति का पारदर्शी खुलासा करें। यदि कोई त्रुटि हो गई है तो स्वेच्छा से सुधार करना ही भविष्य के कानूनी जोखिम और भारी दंड से बचने का सबसे सुरक्षित रास्ता है।

₹50 लाख से अधिक आय वालों के लिए यह चेतावनी है कि टैक्स अनुपालन अब पहले से कहीं अधिक सख्त और डिजिटल हो चुका है। विदेशी संपत्ति, क्रिप्टो आय या गलत छूट दावों को छिपाना महंगा पड़ सकता है। सही जानकारी, समय पर सुधार और पारदर्शिता ही सुरक्षित कर योजना का मूल मंत्र है।

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