दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने ग्राहकों के हित में नए नियम लागू किए हैं। अब अगर टेलीकॉम कंपनियां ग्राहकों की शिकायतों का सही तरीके से निपटारा नहीं करती हैं या बिना उचित कारण उन्हें खारिज कर देती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके तहत प्रत्येक सेवा क्षेत्र में हर तिमाही अधिकतम 20 लाख रुपये तक की पेनल्टी का प्रावधान किया गया है। नए नियमों का उद्देश्य शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक केंद्रित बनाना है।
ट्राई ने दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 में बदलाव किए हैं। करीब एक दशक बाद शिकायत निवारण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। नए प्रावधानों के तहत शिकायतों और अपीलों के निपटारे में लापरवाही करने वाली कंपनियों पर आर्थिक कार्रवाई की जाएगी।
गलत शिकायत खारिज करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना
नए नियमों के मुताबिक, अगर कोई टेलीकॉम कंपनी ग्राहक की शिकायत को गलत तरीके से खारिज करती है, तो प्रति शिकायत 1,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। वहीं, अपील को गलत तरीके से खारिज करने पर प्रति अपील 5,000 रुपये की पेनल्टी लगेगी। हालांकि, जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रत्येक सेवा क्षेत्र में हर तिमाही 20 लाख रुपये तय की गई है।गौरतलब है कि ट्राई ने इससे पहले मई में 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन संशोधित नियमों में इसे घटाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।
रिपोर्ट जमा नहीं करने पर भी होगी कार्रवाई
टेलीकॉम कंपनियों को अब शिकायतों और उनके निपटारे से संबंधित तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट जमा करनी होगी। अगर कोई कंपनी निर्धारित समय पर रिपोर्ट जमा नहीं करती है, तो शुरुआती 15 दिनों तक प्रतिदिन 5,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके बाद प्रतिदिन 20,000 रुपये की पेनल्टी देनी होगी। इस मामले में अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये प्रति सर्कल तय किया गया है।इसके अलावा जुर्माने की बकाया राशि पर एमसीएलआर से 2 फीसदी अधिक ब्याज भी देना होगा। यदि कंपनी 21 दिनों के भीतर जुर्माने का भुगतान नहीं करती है, तो ब्याज लागू होगा।
24 घंटे चालू रहेंगे शिकायत केंद्र
ट्राई ने स्पष्ट किया है कि सभी टेलीकॉम कंपनियों के उपभोक्ता शिकायत केंद्र 24 घंटे चालू रहने चाहिए। इसके लिए मानव प्रतिनिधियों, स्वचालित सिस्टम और एआई एजेंटों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, मानव प्रतिनिधियों की उपलब्धता प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे अनिवार्य होगी।
यदि ग्राहक एआई एजेंट से बात कर रहा है, तो कंपनी को इसकी जानकारी भी देनी होगी। यानी ग्राहकों को यह स्पष्ट बताया जाएगा कि उनकी बातचीत किसी इंसान से हो रही है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम से।
15 दिनों में कर सकेंगे अपील
नए नियमों में अपील की समयसीमा भी कम की गई है। पहले ग्राहक संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 30 दिनों के भीतर अपील कर सकते थे, लेकिन अब यह अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई है। वहीं, अपील प्राधिकरण को भी 15 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा।
कंपनियों की ओर से नियुक्त अपीलीय प्राधिकरण का प्रमुख वरिष्ठ अधिकारी होना चाहिए और उसके पास कम से कम पांच साल का अनुभव होना अनिवार्य है। उसे शिकायतों और अपीलों से जुड़ी तिमाही रिपोर्ट कंपनी के बोर्ड या मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपनी होगी।
शिकायतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
ट्राई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दूरसंचार सेवाओं से जुड़ी कुल 73,081 शिकायतें दर्ज की गईं। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में 55,978 और वित्त वर्ष 2023-24 में 44,733 शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए नियमों में बदलाव किया गया है।
अब मोबाइल ऐप, चैटबॉट और ईमेल जैसे डिजिटल माध्यमों से भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इसके अलावा कंपनियों की ऑनलाइन और मैनुअल तरीके से समय-समय पर नियामकीय समीक्षा और ऑडिट किया जाएगा। शिकायतों के आंकड़े छह महीने तक और उनके निपटारे से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड एक साल तक सुरक्षित रखने होंगे।
इन बदलावों से टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही बढ़ने और ग्राहकों की शिकायतों का समय पर समाधान होने की उम्मीद है।