शिवकाशी। दिवाली से पहले तमिलनाडु के शिवकाशी में पटाखा कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। देश के सबसे बड़े पटाखा उत्पादन केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला यह शहर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। यूरोप और अमेरिका की कंपनियों ने यहां बने पटाखों में दिलचस्पी दिखाई है। पोलैंड की एक कंपनी भी पटाखे खरीदने के लिए संपर्क कर चुकी है। खास बात यह है कि कुछ विदेशी कंपनियां पहले चीन से पटाखे खरीदती थीं, लेकिन अब भारतीय निर्माताओं से खरीद की संभावनाएं तलाश रही हैं।
6,000 करोड़ रुपये का है भारतीय पटाखा कारोबार
भारत के संगठित पटाखा उद्योग में शिवकाशी की हिस्सेदारी करीब 85 फीसदी है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यहां की औद्योगिक प्रगति को देखते हुए इसे ‘कुट्टी जापान’ यानी छोटा जापान कहा था। अब शहर दुनिया के प्रमुख पटाखा निर्यात केंद्रों में शामिल होना चाहता है।
भारतीय पटाखा उद्योग का कुल कारोबार करीब 6,000 करोड़ रुपये है, जिसमें शिवकाशी की हिस्सेदारी लगभग 5,100 करोड़ रुपये बताई जाती है। यहां बनने वाले पटाखों की करीब 80 फीसदी बिक्री दिवाली के दौरान होती है, जिससे 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। करीब 10 फीसदी बिक्री केरल के विशु त्योहार और शेष 10 फीसदी बिक्री गणेश चतुर्थी समेत अन्य त्योहारों पर होती है।
इस साल पटाखों की कीमतों में 30 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी के बावजूद कारोबारियों को पिछले साल की तुलना में ऑर्डर में मामूली वृद्धि की उम्मीद है।
चीन के दबदबे को चुनौती देने की तैयारी
दुनिया के पटाखा कारोबार में चीन का बड़ा दबदबा है। चीन के हुनान प्रांत का लियूयांग शहर वैश्विक पटाखा उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। हालांकि, चीन में बढ़ती पाबंदियों, अमेरिकी शुल्क और आपूर्ति के नए विकल्प तलाशने की कोशिशों के कारण विदेशी खरीदार अब भारत की ओर भी देख रहे हैं।
शिवकाशी पटाखा निर्माता संघ के मुरली असैथंबी के मुताबिक, विदेशी कंपनियों की पूछताछ शुरू हो चुकी है। भारतीय कंपनियों के लिए यह बड़ा अवसर है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का पालन, उत्पादों की सुरक्षा और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
ग्रीन पटाखों और सरकारी सुविधाओं से उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ नई पीढ़ी के जुड़े हुए ग्रीन पटाखों के उत्पादन की अनुमति मिलने से भी उद्योग को उम्मीद मिली है। अदालत ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय निर्धारित शर्तों और समय के अनुसार इस्तेमाल की व्यवस्था को भी महत्व दिया है। उद्योग का कहना है कि मांग के मुकाबले उत्पादन सीमित है और मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत है।
तमिलनाडु सरकार शिवकाशी के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चेन्नई और तूतीकोरिन बंदरगाहों से माल भेजने की सुविधाएं बेहतर बनाने पर काम कर रही है। सरकार केंद्र के साथ निर्यात संबंधी शर्तों में राहत के विकल्पों पर भी चर्चा कर रही है।
इसके अलावा, विरुधुनगर जिले में पटाखा उद्योग के लिए साझा सुविधा केंद्र बनाने की योजना है। यहां उत्पादों की जांच, प्रमाणन, तकनीकी शोध और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में उपयोग होने वाली विस्फोटक तकनीकों पर शोध की भी योजना है।
शिवकाशी के सामने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बनाने का अवसर है। लेकिन निर्यात बढ़ाने के साथ श्रमिकों की सुरक्षा, बेहतर तकनीक और गुणवत्ता मानकों का पालन करना भी उतना ही जरूरी होगा।