नई दिल्ली: दुनिया एक बार फिर Corona वायरस के नए वैरिएंट को लेकर सतर्क हो गई है। इस बार चर्चा में है कोविड-19 का नया सब-वैरिएंट BA.3.2, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘सिकाडा’ कहा जा रहा है। 20 से ज्यादा देशों में इसके मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में अभी तक इस वैरिएंट का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
क्या है BA.3.2 ‘सिकाडा’ वैरिएंट?
BA.3.2, कोरोना के “ओमिक्रॉन परिवार” का एक सब-वैरिएंट है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें 70 से ज्यादा म्यूटेशन हो सकते हैं, जिनमें कई स्पाइक प्रोटीन से जुड़े हैं। यही स्पाइक प्रोटीन वायरस को इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करता है। म्यूटेशन की अधिक संख्या इसे दूसरे वैरिएंट्स से अलग बनाती है। हालांकि, वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि ज्यादा म्यूटेशन का मतलब यह नहीं है कि वायरस ज्यादा खतरनाक भी होगा। कई बार ये बदलाव सिर्फ इसके फैलने की क्षमता को प्रभावित करते हैं, गंभीरता को नहीं।
किन देशों में फैल चुका है यह वैरिएंट?
इस वैरिएंट की पहली पहचान अमेरिका में हुई थी। इसके बाद यूरोप और एशिया के कई देशों में इसके केस सामने आए हैं। हालांकि, अब तक यह बड़े पैमाने पर फैलता हुआ नहीं दिखा है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं ताकि समय रहते इसके व्यवहार को समझा जा सके।
लक्षण: क्या अलग है ‘सिकाडा’?
अगर आप सोच रहे हैं कि इस वैरिएंट के लक्षण बहुत अलग होंगे, तो ऐसा नहीं है। इसके लक्षण लगभग ओमिक्रॉन जैसे ही हैं –
– बुखार और थकान
– गले में खराश
– खांसी
– नाक बहना या बंद होना
– सिरदर्द और बदन दर्द
– कुछ मामलों में हल्की सांस लेने में तकलीफ
अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि यह वैरिएंट ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा करता है।
क्या यह ज्यादा तेजी से फैलता है?
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, BA.3.2 तेजी से फैल सकता है और इम्यून सिस्टम को कुछ हद तक चकमा देने की क्षमता भी रखता है। इसका मतलब यह है कि-
– वैक्सीन लगवा चुके लोग भी संक्रमित हो सकते हैं
– पहले संक्रमित हो चुके लोगों में दोबारा संक्रमण संभव है
लेकिन अच्छी खबर यह है कि वैक्सीन अभी भी गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से सुरक्षा देती हैं।
भारत के लिए कितना खतरा?
फिलहाल भारत के लिए चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं है। देश का जीनोम सर्विलांस सिस्टम सक्रिय है और नए वैरिएंट्स पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, सतर्क रहना और अपडेट रहना जरूरी है| जरूरत पड़ने पर बूस्टर डोज लेना फायदेमंद हो सकता है।
असली चिंता: अनिश्चितता, न कि गंभीरता
BA.3.2 को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसकी गंभीरता नहीं, बल्कि इसकी अनिश्चितता है। महामारी के दौरान हमने देखा है कि नए वैरिएंट्स के असली असर को समझने में समय लगता है। वैज्ञानिक अभी डेटा इकट्ठा कर रहे हैं और आने वाले समय में तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल यह एक ऐसा वैरिएंट है जिस पर नजर रखने की जरूरत है, डरने की नहीं।
बचाव ही सबसे बड़ा हथियार
कोरोना से बचाव के लिए वही पुराने लेकिन असरदार तरीके आज भी जरूरी हैं –
- भीड़भाड़ में मास्क पहनें
- हाथों को नियमित रूप से साफ करें
- खांसते या छींकते समय मुंह ढकें
- बीमार महसूस होने पर घर पर रहें
- दूसरों से उचित दूरी बनाए रखें
- समय पर वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज लें
‘सिकाडा’ वैरिएंट ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लेकिन अच्छी बात यह है कि दुनिया अब पहले से ज्यादा तैयार और जागरूक है। घबराने की बजाय समझदारी और सावधानी अपनाना ही सबसे सही रणनीति है। क्योंकि महामारी से लड़ाई में सबसे मजबूत हथियार है सतर्कता और सही जानकारी।