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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > फर्श से अर्श तक > Nobel Peace Prize 2026: भारतीय मूल की नवी पिल्लै को शांति का नोबेल, अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के लिए सम्मान
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Nobel Peace Prize 2026: भारतीय मूल की नवी पिल्लै को शांति का नोबेल, अंतरराष्ट्रीय कानून की रक्षा के लिए सम्मान

Last updated: 10/10/2026 4:37 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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नोबेल शांति पुरस्कार 2026 से सम्मानित दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नवी पिल्लै
नवी पिल्लै को अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने में योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार 2026 दिया गया है।
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नई दिल्ली: नोबेल शांति पुरस्कार 2026 का ऐलान हो गया है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने दक्षिण अफ्रीका की वरिष्ठ न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना है। उन्हें शांति को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों की रक्षा में योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाएगा।

भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं 85 वर्षीय नवी पिल्लै का जीवन मानवाधिकारों, न्याय और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष को समर्पित रहा है। उनकी उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए नोबेल समिति ने ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कानून की अहमियत पर जोर दिया है, जब दुनिया में कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और कानूनी व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है।

नवी पिल्लै को क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार?

नोबेल समिति के अनुसार, नवी पिल्लै ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को मजबूत बनाने और युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों तथा नरसंहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उनका काम इस विचार पर आधारित रहा है कि किसी भी देश या व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं होना चाहिए। न्याय, मानवाधिकार और मानवीय गरिमा की रक्षा के लिए उनके लंबे प्रयासों को इस पुरस्कार के जरिए वैश्विक पहचान मिली है।

दक्षिण अफ्रीका में जन्म, भारत से जुड़ी हैं जड़ें

नवी पिल्लै का जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उन्होंने ऐसे दौर में अपना जीवन बिताया, जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीति लागू थी। उन्होंने कानून की पढ़ाई करने के बाद वकालत शुरू की और रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों का बचाव किया।

साल 1967 में उन्होंने अपनी कानूनी फर्म शुरू की। बाद में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से कानून में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। 1995 में उन्हें दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में निभाई अहम भूमिका

नवी पिल्लै ने 1999 से 2003 तक रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय से भी जुड़ीं।

साल 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान मानवाधिकारों की सुरक्षा और दुनिया भर में हो रहे उल्लंघनों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उन्होंने कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र और इजरायल से जुड़े मामलों की जांच करने वाले संयुक्त राष्ट्र आयोग की अध्यक्षता भी की। अंतरराष्ट्रीय कानून और जवाबदेही को लेकर उनकी भूमिका उनके करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

नोबेल पुरस्कार के साथ कितनी मिलेगी राशि?

नोबेल शांति पुरस्कार के साथ विजेता को पदक, प्रमाणपत्र और निर्धारित पुरस्कार राशि दी जाती है। 2026 के पुरस्कार के लिए राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना तय की गई है। यह राशि अमेरिकी डॉलर में लगभग 12 लाख के बराबर बताई गई है।

नवी पिल्लै का चयन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों, न्याय और कानून के शासन की अहमियत को रेखांकित करता है। उनका सम्मान उन लोगों के प्रयासों को भी पहचान देता है, जो युद्ध अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघनों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए काम कर रहे हैं।

TAGGED:Human RightsIndustrial EmpireInternational LawNavi PillayNobel NewsNobel Peace Prize 2026Nobel PrizeUN Human Rights
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