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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एग्रीकल्चर > Pre Budget: वित्त मंत्री को किसान यूनियन ने सौंपी “डिमांड लिस्ट”, प्रोसेसिंग यूनिट्स बढ़ाने की मांग
एग्रीकल्चर

Pre Budget: वित्त मंत्री को किसान यूनियन ने सौंपी “डिमांड लिस्ट”, प्रोसेसिंग यूनिट्स बढ़ाने की मांग

Shashank Pathak
Last updated: 12/11/2025 3:50 PM
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Shashank Pathak
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Nirmala Sitharaman discussing pre budget meeting 2026 with farmers and agriculture experts on agricultural reforms
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Pre Budget: आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसान यूनियनों और कृषि विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्री-बजट मीटिंग का मकसद था – यह समझना कि किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किस तरह की नीतिगत सुधारों की ज़रूरत है। बैठक में कई अहम सुझाव सामने आए जिनमें कृषि प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा देना, रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए फंड तैयार करना और फसल बीमा योजना में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

ग्रामीण स्तर पर हो प्रोसेसिंग यूनिट्स
किसान यूनियनों ने सरकार के सामने सबसे प्रमुख मांग रखी ग्रामीण और ब्लॉक स्तर पर एग्री प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा दिया जाए। उनका कहना था कि किसान तब तक अपनी उपज का सही मूल्य नहीं पा सकते जब तक उन्हें स्थानीय स्तर पर फसल प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की सुविधा नहीं मिलेगी। किसान संगठनों ने सुझाव दिया कि सरकार ऐसे यूनिट्स लगाने वालों को विशेष प्रोत्साहन योजनाएं दे, ताकि छोटे किसान और किसान उत्पादक संगठन (FPOs) भी निवेश करने के लिए प्रेरित हों।

साथ ही उन्होंने मांग की कि फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए कम ब्याज दरों पर लोन स्कीम तैयार की जाए, जिससे ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिले और किसान सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि उद्यमी भी बन सकें।

कृषि में रिसर्च को बढ़ावा मिले
कृषि विशेषज्ञों ने इस बैठक में सरकार को आगाह किया कि आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन लागत जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को एक डेडिकेटेड एग्रीकल्चर रिसर्च फंड बनाना चाहिए, जिससे नई फसल किस्मों, टिकाऊ खेती के मॉडल्स और क्लाइमेट-रेजिलिएंट टेक्नोलॉजी पर काम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर देश को “एग्रीकल्चर 2.0” के युग में ले जाना है, तो केवल पारंपरिक खेती पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन आधारित खेती पर फोकस करना होगा।

फसल बीमा योजना में सुधार की उठी मांग
बैठक में किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में सुधार की सख्त जरूरत पर जोर दिया। किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि बीमा क्लेम में देरी, कागजी प्रक्रिया की जटिलता और पारदर्शिता की कमी के कारण किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि फसल बीमा योजना के तहत किसानों को सीधे मुआवजा देने की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए एक अलग बीमा भुगतान फंड बनाया जाए, जिससे क्लेम प्रोसेस में तेजी आए और किसानों को भरोसा मिले कि नुकसान की स्थिति में सरकार उनके साथ खड़ी है।

MSP वाली फसलों पर इंपोर्ट ड्यूटी का सुझाव
एक और अहम मुद्दा जो इस बैठक में सामने आया, वह था MSP (Minimum Support Price) वाली फसलों पर विदेशी प्रतिस्पर्धा का असर। कृषि यूनियनों ने कहा कि जब सरकार किसी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है, तो उसी फसल के आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जानी चाहिए। इससे भारतीय किसानों को विदेशी उत्पादों से सस्ती प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ेगा और उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति घरेलू कृषि बाजार को स्थिर करने में मदद करेगी और किसानों की आमदनी में स्थायी वृद्धि का रास्ता खोलेगी।

आत्मनिर्भर कृषि के लिए सरकार करे काम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के अंत में कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सब्सिडी आधारित कृषि को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि इसे आय आधारित और आत्मनिर्भर क्षेत्र बनाना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों और विशेषज्ञों के सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और बजट 2026-27 में कृषि सुधारों के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। यह बैठक इस बात का संकेत देती है कि सरकार आने वाले बजट में कृषि क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक विकास रणनीति पेश करने की तैयारी में है – जो न केवल उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि किसानों की आमदनी को स्थायी रूप से ऊंचा उठाने का काम करेगी।

TAGGED:Agri Processing UnitsAgricultural ReformsAgricultureBudget 2026 IndiaIndustrial EmpireMSPNirmala SitharamanPre Budget 2026
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