नई दिल्ली: केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) के ढांचे में अहम बदलाव की तैयारी कर रही है। खासतौर पर 12 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब को पूरी तरह खत्म करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सरकार कुछ जरूरी उपभोक्ता वस्तुओं को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी वाले स्लैब में ला सकती है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीधा फायदा मिल सकता है।
जीएसटी व्यवस्था को भारत में 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। तबसे इसे समय-समय पर सुधारने की कोशिशें होती रही हैं। अब 12 प्रतिशत स्लैब को हटाने का विचार इसलिए किया जा रहा है क्योंकि इसमें शामिल अधिकतर वस्तुएं आम जनता की जरूरतों से जुड़ी हैं। अगर यह फैसला लागू होता है तो रोजमर्रा के खर्चों में लोगों को राहत मिल सकती है, जिससे महंगाई का बोझ थोड़ा हल्का होगा।
इस संभावित बदलाव पर अंतिम निर्णय जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में लिया जा सकता है, जो इसी महीने होने की संभावना है। जीएसटी काउंसिल की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं और इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं। काउंसिल को टैक्स दरों में बदलाव का अधिकार प्राप्त है।
चुनावी दृष्टिकोण से भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आने वाले महीनों में बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सरकार इस बदलाव के जरिए आम जनता को सीधा फायदा पहुंचाकर महंगाई के मुद्दे को संभालना चाह रही है। अगर 12 फीसदी स्लैब हटता है और जरूरी चीजें सस्ते टैक्स स्लैब में आती हैं तो यह उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।