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रेपो रेट में बदलाव की तैयारी: अगले महीने सस्ती हो सकती हैं आपकी EMI, RBI दे सकता है राहत

Last updated: 19/11/2025 3:33 PM
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Industrial Empire
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लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी जल्द ही मिल सकती है। वित्तीय संस्था मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) दिसंबर 2025 में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है। यह उम्मीद इसलिए बढ़ी है क्योंकि खुदरा महंगाई दर (CPI) पिछले कुछ महीनों से लगातार नीचे आ रही है। इससे पहले हुई MPC बैठक में RBI ने दरों को यथावत रखा था।

क्या है रेपो रेट और आपके लिए इसका मतलब?

रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर कम होती है, तो बैंकों की उधारी लागत घटती है और लोन सस्ते हो जाते हैं। इसका सीधा असर: होम लोन, ऑटो लोन, पर्सनल लोन की EMI कम होने के रूप में सामने आ सकता है। अगर अनुमान सही निकलता है, तो दिसंबर 2025 तक रेपो रेट घटकर 5.25% हो सकता है।

RBI रहेगा सतर्क, अपनाएगा ‘रुको और देखो’ नीति

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि RBI जल्दबाज़ी में कोई कदम नहीं उठाएगा। एक बार फैसला होने के बाद केंद्रीय बैंक: ब्याज दरों के प्रभाव, बाज़ार में नकदी की स्थिति और सुधारात्मक कदमों के परिणामों को आंकड़ों के आधार पर परखेगा। यानी नीतिगत निर्णय डेटा पर निर्भर रहेंगे और RBI सतर्क रुख बनाए रखेगा।

सरकार भी दिखा रही समझदारी

रिपोर्ट कहती है कि वित्तीय मोर्चे पर सरकार का रुख संतुलित रहेगा। लक्ष्य होगा: वित्तीय घाटा धीरे-धीरे कम करना और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को प्राथमिकता देना। ये कदम मध्यम अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। फर्म का कहना है कि 2025 में महंगाई निचले स्तर पर रहने की संभावना है। 2026-27 में CPI में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन धीरे-धीरे यह RBI के मध्यम अवधि के 4% लक्ष्य के आसपास आ जाएगी

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आधार प्रभाव (Base Effect) नजर आ सकता है, जबकि मुख्य महंगाई स्थिर रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य और मुख्य महंगाई दोनों 4% से 4.2% की रेंज में रह सकती हैं, जिससे महंगाई अपेक्षाएँ नियंत्रित रहेंगी और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत रहेगा।

बाहरी मोर्चे पर भारत की स्थिति मज़बूत

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का चालू खाता घाटा 1% के आसपास या उससे कम रह सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार, आरामदायक आयात कवरेज और कम बाहरी कर्ज-से-GDP अनुपात यह दर्शाता है कि भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत और स्थिर बनी हुई है। कुल मिलाकर, RBI की संभावित ब्याज कटौती, नियंत्रित महंगाई और सरकार की संतुलित वित्तीय रणनीति से आने वाले समय में अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

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