पटना। बिहार की राजधानी पटना के कंकड़बाग स्थित सेलुलस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड में औषधि नियंत्रक विभाग की टीम ने 8 अक्टूबर को छापेमारी की। जांच के दौरान दवाओं के भंडारण, जरूरी दस्तावेजों और लाइसेंस से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आईं। परिसर में बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें मिलने के बाद पुलिस और उत्पाद विभाग को सूचना दी गई। संयुक्त कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विभाग ने शुक्रवार को कार्रवाई से संबंधित जानकारी जारी की।
लाइसेंस एक कमरे का, दवाएं चार कमरों में मिलीं
राज्य औषधि नियंत्रक विभाग की टीम ने कंकड़बाग थाना पुलिस के सहयोग से पीसी कॉलोनी स्थित डी-167 में निरीक्षण किया। उस समय प्रतिष्ठान के संचालक मृत्युंजय कुमार सिंह मौजूद थे। जांच में सामने आया कि कंपनी के पास केवल 11.15 वर्ग मीटर के एक कमरे के लिए औषधि अनुज्ञप्ति थी, जबकि दवाओं का भंडारण चार कमरों में किया जा रहा था।
विभाग ने इसे लाइसेंस और भंडारण व्यवस्था से जुड़ी गंभीर अनियमितता माना। कार्रवाई के बाद फ्लैट का मुख्य द्वार सील कर दिया गया। निरीक्षण के दौरान दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित अभिलेख और अन्य जरूरी दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए।
दवाओं के रखरखाव में मिली खामियां
निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठान में निर्धारित नियमों के अनुसार साइनबोर्ड नहीं मिला। इसके अलावा, दवाओं के भंडारण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई। दवाओं को नियमानुसार रखने और उनके रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से संबंधित कमियां सामने आने के बाद विभाग ने आगे की जांच शुरू की।
कार्रवाई के दौरान विभाग ने 10 दवाओं की बिक्री और निकासी पर रोक लगा दी। साथ ही, दो एक्सपायर दवाएं जब्त की गईं और सात दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए गए। विभाग ने प्रतिष्ठान को पांच दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है।
शराब की बोतलें मिलने पर पुलिस की कार्रवाई
फार्मा प्रतिष्ठान में जांच के दौरान बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें भी मिलीं। इसके बाद पुलिस और उत्पाद विभाग को सूचना दी गई। दोनों विभागों की संयुक्त कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि, शराब की बरामदगी से जुड़े मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
औषधि नियंत्रक विभाग के अनुसार, जब्त दवाओं के नमूनों की जांच रिपोर्ट और प्रतिष्ठान की ओर से जमा किए जाने वाले दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। जांच में मिली अनियमितताओं के आधार पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में दवाओं के भंडारण, लाइसेंस की सीमा और आवश्यक रिकॉर्ड की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य दवाओं की बिक्री और भंडारण में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। अब जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।