भारतीय शेयर बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने, निवेशकों के हितों की रक्षा करने और बाजार की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) कई अहम बदलावों पर काम कर रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को मुंबई में ANMI के 16वें अंतरराष्ट्रीय कैपिटल मार्केट कन्वेंशन में इन योजनाओं की जानकारी दी। प्रस्तावित बदलावों में शॉर्ट सेलिंग और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बरोइंग (SLB) के नियमों की समीक्षा, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए दिशानिर्देश तैयार करना शामिल है।
AI और साइबर सुरक्षा पर सेबी का फोकस
शेयर बाजार में एल्गोरिदम और AI आधारित ट्रेडिंग का इस्तेमाल बढ़ने के साथ तकनीकी जोखिम भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। सेबी प्रमुख ने कहा कि साइबर सुरक्षा को केवल आईटी खर्च के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे कारोबार की प्राथमिकता बनाना जरूरी है। तकनीकी प्रणालियों की नियमित जांच से सिस्टम में खराबी और संभावित नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
AI के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सेबी एक ‘AI सैंडबॉक्स’ तैयार कर रहा है। इसके जरिए नए तकनीकी टूल्स का सुरक्षित वातावरण में परीक्षण किया जा सकेगा। सेबी AI के इस्तेमाल को लेकर दिशानिर्देश भी जारी करने की तैयारी में है। इनमें जवाबदेही, डेटा पर नियंत्रण, मानवीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर AI सिस्टम को तुरंत बंद करने के लिए ‘किल स्विच’ जैसे सुरक्षा उपाय शामिल होंगे।
शॉर्ट सेलिंग और ट्रेडिंग नियमों की समीक्षा
सेबी बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने और शेयरों की कीमत तय करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए शॉर्ट सेलिंग और SLB से जुड़े नियमों की समीक्षा कर रहा है। साथ ही, ट्रेडिंग टर्मिनलों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
नियामक अपने विभिन्न निरीक्षण पोर्टल को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बना रहा है। इससे निगरानी की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है। इसके अलावा, स्टॉकब्रोकरों की कारोबारी क्षमता, तकनीकी निर्भरता और ग्राहकों से जुड़े जोखिम के आधार पर अलग-अलग नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है।
ब्रोकरों और निवेशकों को मिल सकती है राहत
कैश सेगमेंट में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) जैसे ग्राहकों के लिए ‘गिव-अप और टेक-अप’ की स्वचालित सुविधा शुरू करने की योजना है। इससे कस्टोडियन की मंजूरी के इंतजार में ब्रोकरों के फंसे धन और मार्जिन को मुक्त करने में मदद मिल सकती है।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में खरीद-बिक्री बढ़ाने के लिए सेबी नया मार्केट-मेकिंग सिस्टम तैयार कर रहा है। डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स से जुड़े नियम आसान बनाने और ‘सामूहिक प्रतिवेदन मंच’ में डिपॉजिटरीज को शामिल करने की भी योजना है। इससे ब्रोकरों को एक्सचेंज और डिपॉजिटरीज के लिए अलग-अलग दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम हो सकती है।
इसके अलावा, टेंडर ऑफर, शेयर बायबैक और ऑफर फॉर सेल (OFS) में क्लियरिंग प्रक्रिया को एक साथ पूरा करने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य बाजार की कार्यक्षमता बढ़ाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और निवेशकों का भरोसा मजबूत करना है। हालांकि, इन प्रस्तावों के वास्तविक प्रभाव का आकलन इनके अंतिम नियमों और लागू होने की समयसीमा के बाद ही किया जा सकेगा।