Snack market: भारत का नमकीन और स्नैक्स बाजार अब सिर्फ खाने-पीने का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़ा बिजनेस अवसर बन चुका है। जिस मार्केट पर कभी केवल देसी और लोकल ब्रांड का दबदबा था, वहां अब विदेशी कंपनियां भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही हैं। हाल ही में बालाजी वेफर्स जैसे क्षेत्रीय ब्रांडों में निवेश की खबरों ने इस मार्केट को और भी सुर्खियों में ला दिया है।
विदेशी कंपनियों की एंट्री से बदला खेल
पहले जहां हल्दीराम, बालाजी वेफर्स और छोटे क्षेत्रीय ब्रांड ही नमकीन बाजार की पहचान थे, वहीं अब अमेरिका की जनरल मिल्स जैसी कंपनियां इन ब्रांडों में निवेश करने की तैयारी में हैं। इसके अलावा पेप्सिको और ITC जैसी बड़ी दिग्गज कंपनियां भी नमकीन और स्नैक्स सेगमेंट में आक्रामक रणनीति अपना रही हैं। इससे साफ है कि भारत का नमकीन मार्केट अब लोकल से ग्लोबल स्तर तक चर्चा का विषय बन चुका है।
शहरों ने बदली खाने की आदतें
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और भागदौड़ भरी जिंदगी ने लोगों की खाने की आदतों को बदल दिया है। लोग अब लंबे समय तक खाना बनाने से बचते हैं। झटपट खाए जाने वाले फूड की मांग बढ़ी है। दोहरी कमाई वाले परिवार और अकेले रहने वाले युवा हल्के-फुल्के स्नैक्स पर ज्यादा निर्भर हैं। इसी वजह से रेडी-टू-ईट स्नैक्स की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
सिर्फ़ चिप्स नहीं, हेल्दी स्नैक्स का दौर
आज का उपभोक्ता सिर्फ मसालेदार नमकीन या तैलीय चिप्स तक सीमित नहीं है। अब लोग स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ख्याल रखते हैं। इसी वजह से क्विनोआ और बाजरे से बने स्नैक्स की लोकप्रियता बढ़ रही है। लोग इन्हें हल्के-फुल्के नाश्ते के रूप में पसंद कर रहे हैं क्योंकि ये स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर हैं। इसके अलावा भुने हुए बीज और सूखे मेवे अब स्नैकिंग के नए ट्रेंड बन गए हैं, जो सेहत के लिए लाभकारी होने के साथ ही दिनभर एनर्जी भी प्रदान करते हैं। वहीं, कम तेल वाले और बेक किए हुए विकल्प भी तेजी से लोगों की पसंद में शामिल हो रहे हैं। यह बदलाव इस बात को दर्शाता है कि उपभोक्ता अब स्वाद के साथ सेहत से भी कोई समझौता नहीं करना चाहते। यानी अब उपभोक्ता चाहते हैं कि स्नैक्स स्वादिष्ट होने के साथ हेल्दी भी हों।
गांवों में भी बढ़ रही मांग
ग्रामीण भारत अब सिर्फ खेती या बुनियादी जरूरतों तक सीमित नहीं है। यहां की आय बढ़ी है और लोग अब ब्रांडेड स्नैक्स खरीदने के लिए तैयार हैं। कंपनियां गांवों के लिए सस्ते पैकेट लॉन्च कर रही हैं – ₹1 के पैक, ₹5 के पैक और ₹10 के पैक। ये छोटे पैक ग्रामीण उपभोक्ताओं की जेब और जरूरत दोनों को पूरा कर रहे हैं।
छोटे ब्रांड, बड़े मौके
हल्दीराम और बालाजी वेफर्स जैसे क्षेत्रीय ब्रांडों की सफलता ने साबित कर दिया है कि छोटे शहरों से निकले ब्रांड भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। सबसे बड़ी बात इन ब्रांड्स का लोकल कनेक्शन मजबूत होता है। ये कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाते हैं साथ ही निवेशकों और विदेशी कंपनियों के लिए ये सबसे आकर्षक विकल्प बनते जा रहे हैं।
चुनौतियां भी कम नहीं
भले ही नमकीन बाजार तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं। सबसे समस्या कच्चे माल की बढ़ती कीमतें है। पैकिंग साइज (ग्रामेज) घटाने पर उपभोक्ताओं की नाराजगी, असंगठित लोकल ब्रांड्स से मुकाबला, सरकार के सख्त नियम और गुणवत्ता मानक ये समस्याएं खासकर छोटे ब्रांड्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।
बड़ा है पोटेंशियल, पर चाहिए रणनीति
भारत का नमकीन और स्नैक्स बाजार आने वाले वर्षों में और भी तेजी से बढ़ने वाला है। विदेशी निवेश, बदलती उपभोक्ता आदतें और हेल्दी स्नैक्स की बढ़ती मांग इस सेक्टर को नया आयाम दे रही है। हालांकि चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन सही रणनीति और ग्राहक-केंद्रित उत्पादों के जरिए कंपनियां इस अरबों के बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना सकती हैं।