भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार कारोबारी सत्रों से तेजी का रुख बना हुआ है। इस दौरान सेंसेक्स 3,300 अंकों से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी में करीब 1,000 अंकों की बढ़त दर्ज की गई है। मंगलवार को भी बाजार में खरीदारी का जोर देखने को मिला। सेंसेक्स कारोबार के दौरान 900 अंक से ज्यादा उछलकर 76,573 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 200 अंक से अधिक चढ़कर 23,673 पर पहुंच गया। इस तेजी से निवेशकों के बीच उत्साह बढ़ा है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे अभी स्थायी तेजी की शुरुआत मानने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
कच्चे तेल की गिरावट से बाजार को सहारा
बाजार में तेजी की प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। ब्रेंट क्रूड का भाव 117 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आया और पिछले कारोबारी सत्र में 105 डॉलर से भी नीचे पहुंच गया। इससे महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंकाएं कुछ कम हुई हैं।
इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारतीय स्टेट बैंक जैसे बड़े शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय आईटी शेयरों को भी समर्थन मिला है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा भरोसा
बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी के शुरुआती संकेत भी तेजी की एक वजह बने हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, कैश मार्केट में विदेशी निवेशकों की खरीदारी के सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं। हालांकि, इसे विदेशी निवेशकों की बड़े पैमाने पर वापसी का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी।
उनके अनुसार, वैश्विक बाजारों में एआई से जुड़े शेयरों के उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या अभी मुनाफावसूली करना सही रहेगा?
अजीत मिश्रा का मानना है कि मौजूदा तेजी को बाजार में ट्रेंड बदलने का पक्का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। यह हालिया गिरावट के बाद आई रिकवरी भी हो सकती है। उनके मुताबिक, निफ्टी के 23,800 से 23,900 के स्तर पर पहुंचने पर छोटी अवधि के निवेशक मुनाफावसूली पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि, यदि निफ्टी इस दायरे को पार करके इसके ऊपर टिकता है तो आगे 24,600 तक जाने की संभावना बन सकती है। इसके लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और बैंकिंग शेयरों का मजबूत प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गौरांग शाह भारतीय बाजार की लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक हैं। उनका मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है, तो आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की कमाई में और सुधार हो सकता है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, उसकी निगरानी वाली 230 कंपनियों ने सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 26 फीसदी रेवेन्यू, 24 फीसदी एबिटा और 33 फीसदी नेट प्रॉफिट की वृद्धि दर्ज की। यह पिछले 12 तिमाहियों की सबसे मजबूत ग्रोथ रही।
गौरांग शाह के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, छोटी अवधि के ट्रेडर्स अपने मुनाफे और जोखिम के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
इन दो स्तरों पर रखें खास नजर
फिलहाल निफ्टी के लिए 23,800-23,900 का स्तर महत्वपूर्ण है। इसके ऊपर टिकने पर 24,600 का अगला स्तर चर्चा में आ सकता है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी या पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल बाजार की तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। छोटी अवधि में मुनाफावसूली और लंबी अवधि में मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान देना निवेश रणनीति का हिस्सा हो सकता है। निवेश का फैसला अपने जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर करना चाहिए।