भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 72,500 के आसपास, जबकि निफ्टी 22,600 के करीब रहा। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव फार्मा और मेटल शेयरों में दिखाई दिया। दूसरी ओर, मीडिया शेयरों में मजबूत खरीदारी रही। व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने हाल की गिरावट के बाद कुछ स्थिरता दिखाई।
बाजार में जारी कमजोरी के बीच निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल जोखिम को नियंत्रित करने का है। डिविटिए इन्वेस्टमेंट्स के को-फाउंडर और स्मॉलकेस मैनेजर अग्रिम वर्मा के मुताबिक, सितंबर में निफ्टी और सेंसेक्स में करीब छह फीसदी की गिरावट आई। महंगे कच्चे तेल, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। हालांकि, भारत की आर्थिक वृद्धि और घरेलू निवेश ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने में मदद की।
बाजार में हेजिंग कैसे करें?
मौजूदा अस्थिरता के बीच निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो में जोखिम का प्रबंधन महत्वपूर्ण हो गया है। अग्रिम वर्मा के अनुसार, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की स्थिति में निवेशक अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा नकदी या सोने जैसी परिसंपत्तियों में रख सकते हैं। शेयर बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय मजबूत कमाई की संभावना और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियों पर ध्यान देने की बात कही गई है।
हालांकि, हेजिंग का तरीका हर निवेशक के जोखिम स्तर और निवेश अवधि पर निर्भर करता है। विकल्प और वायदा जैसे डेरिवेटिव्स के जरिए भी पोर्टफोलियो जोखिम को हेज किया जा सकता है, लेकिन इनमें जटिलता और नुकसान का जोखिम अधिक हो सकता है। इसलिए ऐसे साधनों का इस्तेमाल समझ और उपयुक्त जोखिम प्रबंधन के साथ ही किया जाना चाहिए।
निफ्टी के लिए 22,500 अहम स्तर
SBI Securities के वाइस प्रेसिडेंट, टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,550 से 22,500 का स्तर शुरुआती सपोर्ट जोन के तौर पर महत्वपूर्ण है। अगर निफ्टी इस स्तर के नीचे निर्णायक रूप से जाता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,350 की ओर बढ़ सकता है।
वहीं, ऊपर की तरफ 22,790 से 22,810 का क्षेत्र तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र के ऊपर टिकाऊ तेजी आने पर निफ्टी में रिकवरी 22,950 तक बढ़ने की संभावना तकनीकी विश्लेषण में बताई गई है। हालांकि, मजबूत रिकवरी के लिए बाजार में लगातार खरीदारी की जरूरत होगी।
मिडकैप और स्मॉलकैप में स्थिरता
हाल की गिरावट के बाद व्यापक बाजार में कुछ स्थिरता देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.02 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.27 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
यह प्रदर्शन बताता है कि बड़े शेयरों में दबाव के बीच कुछ निवेशकों की दिलचस्पी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बनी रही। हालांकि, छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, इसलिए निवेशकों के लिए कंपनी के कारोबार, वैल्यूएशन और जोखिम को समझना जरूरी है।
फार्मा और मेटल शेयरों में बिकवाली
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो फार्मा और मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.5 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 1.84 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
निफ्टी 50 में शामिल Apollo Hospitals और Max Healthcare के शेयर पांच फीसदी से अधिक गिरकर प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में रहे। सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को बढ़ाया।
मीडिया शेयरों में खरीदारी
दूसरी ओर, मीडिया सेक्टर ने बाजार के कमजोर माहौल में बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मीडिया इंडेक्स 2.74 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। इंडेक्स में Sun TV 7.73 फीसदी की बढ़त के साथ प्रमुख तेजी वाले शेयरों में रहा, जबकि DB Corp में गिरावट दर्ज हुई।
बाजार के मौजूदा माहौल में निवेशकों के लिए केवल इंडेक्स की दिशा पर निर्भर रहने के बजाय पोर्टफोलियो में विविधता, उचित जोखिम प्रबंधन और निवेश अवधि पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। तकनीकी स्तर बाजार की संभावित दिशा समझने में मदद कर सकते हैं, लेकिन वे निश्चित भविष्यवाणी नहीं होते।