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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > बाज़ार > CLSA का बड़ा संकेत: टारगेट घटे, लेकिन IT सेक्टर पर भरोसा कायम
बाज़ार

CLSA का बड़ा संकेत: टारगेट घटे, लेकिन IT सेक्टर पर भरोसा कायम

Last updated: 24/02/2026 4:05 PM
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Industrial Empire
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ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने भारतीय आईटी सेक्टर को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। एक ओर ब्रोकरेज ने देश की आठ बड़ी आईटी कंपनियों के टारगेट प्राइस घटा दिए हैं, वहीं दूसरी ओर सेक्टर की दीर्घकालिक संभावनाओं पर अपना भरोसा बरकरार रखा है। CLSA का मानना है कि फिलहाल दबाव जरूर है, लेकिन आने वाले समय में रिकवरी के मजबूत संकेत दिखाई दे रहे हैं।

इस रिपोर्ट में जिन कंपनियों के टारगेट प्राइस कम किए गए हैं, उनमें Infosys, TCS, HCLTech, Wipro, Tech Mahindra, LTIMindtree, Persistent Systems और Coforge शामिल हैं। हालांकि टारगेट घटाने के बावजूद ज्यादातर शेयरों पर “Outperform” रेटिंग बरकरार रखी गई है, जो यह संकेत देती है कि ब्रोकरेज को सेक्टर की दीर्घकालिक मजबूती पर भरोसा है।

टारगेट घटाने के पीछे क्या वजह?
CLSA के मुताबिक, वैल्यूएशन पर दबाव और सीमित ग्रोथ अनुमान के कारण टारगेट प्राइस में कटौती की गई है। ब्रोकरेज का आकलन है कि यदि रुपये में दीर्घकालिक (टर्मिनल) ग्रोथ 5% मानी जाए, तो इन आईटी शेयरों में 5% से 10% तक और गिरावट की संभावना रह सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि हर वर्ष रुपये में लगभग 2% कमजोरी का अनुमान लगाया जाए, तो कंपनियों को अतिरिक्त बाजार हिस्सेदारी हासिल होती नहीं दिख रही। यानी फिलहाल कंपनियों की आय में तेज उछाल की उम्मीद सीमित है। यही कारण है कि निकट अवधि में आईटी शेयरों के मूल्यांकन (वैल्यूएशन) पर दबाव बना रह सकता है।

फिर भी भरोसा क्यों बरकरार?
टारगेट प्राइस घटने के बावजूद CLSA ने सेक्टर पर सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि आईटी सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और भारतीय कंपनियां इस बदलाव में अहम खिलाड़ी बनी हुई हैं।

हाल में आईटी कंपनियों के चैनल चेक और प्रबंधन के बयानों के आधार पर CLSA का निष्कर्ष है कि भारतीय आईटी कंपनियों की AI पोजिशनिंग मजबूत बनी हुई है। विशेष रूप से Infosys के AI इन्वेस्टर डे में भविष्य की रणनीति को लेकर सकारात्मक संकेत मिले।

वैश्विक स्तर पर भी मांग सुधरने के संकेत दिख रहे हैं। कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी और EPAM जैसी अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनियों ने 2026 के लिए बेहतर ऑर्गेनिक ग्रोथ का अनुमान दिया है। इससे संकेत मिलता है कि अगले वर्ष वैश्विक टेक खर्च में सुधार आ सकता है, जिसका लाभ भारतीय आईटी कंपनियों को मिलेगा।

सेक्टर के सामने चुनौतियां
हालांकि तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। CLSA का मानना है कि आईटी सेक्टर में लगातार “डी-रेटिंग” यानी वैल्यूएशन में गिरावट एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस वर्ष के शुरुआती महीनों में Nifty IT इंडेक्स लगभग 1.4% गिर चुका है और सेक्टर के कई प्रमुख शेयर 10% से 22% तक टूटे हैं। कमजोर वैश्विक मांग, क्लाइंट्स द्वारा आईटी खर्च में सतर्कता और प्रोजेक्ट निर्णयों में देरी जैसे कारक निकट अवधि में दबाव बनाए रख सकते हैं। यही कारण है कि ब्रोकरेज ने टारगेट घटाए हैं, भले ही दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक रखा हो।

CLSA की पसंद: किन शेयरों पर दांव?
रिपोर्ट के अनुसार, लार्जकैप आईटी कंपनियों में CLSA को Tech Mahindra और Infosys अधिक आकर्षक लगते हैं। वहीं मिडकैप सेगमेंट में Persistent Systems और Coforge को “हाई-कन्विक्शन आउटपरफॉर्म” श्रेणी में रखा गया है, यानी इनमें मजबूत रिटर्न की संभावना अधिक मानी गई है। दूसरी ओर Wipro पर ब्रोकरेज ने “होल्ड” रेटिंग बनाए रखी है, जो अपेक्षाकृत सीमित अपसाइड का संकेत देती है।

निवेशकों के लिए संकेत
पूरी रिपोर्ट का सार यही है कि आईटी सेक्टर फिलहाल दबाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन दीर्घकालिक संरचनात्मक कहानी कमजोर नहीं हुई है। AI, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और वैश्विक टेक खर्च में संभावित सुधार आने वाले वर्षों में भारतीय आईटी कंपनियों की वृद्धि को सहारा दे सकते हैं। इसलिए निकट अवधि में उतार-चढ़ाव के बावजूद, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चुनिंदा आईटी शेयरों में अवसर बने रह सकते हैं। CLSA का संदेश साफ है—टारगेट घटे हैं, भरोसा नहीं।

TAGGED:CLSAHCLTechIndustrial EmpireITTech MahindraWipro Coforge
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