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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > फर्श से अर्श तक > success story: नहीं थे कभी ऑटो के लिए भी 5 रूपये, आज है सलाना 70 लाख का टर्नओवर
फर्श से अर्श तक

success story: नहीं थे कभी ऑटो के लिए भी 5 रूपये, आज है सलाना 70 लाख का टर्नओवर

Shashank Pathak
Last updated: 26/11/2025 5:17 PM
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Shashank Pathak
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success story: हरियाणा के एक छोटे से गांव चंदू की साधारण सी महिला पूजा शर्मा आज ग्रामीण उद्यमशीलता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। कभी आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझने वाली पूजा ने अपने साहस, लगन और मेहनत से अपनी खुद की ज़िंदगी तो बदली ही, साथ में हजारों ग्रामीण महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर इरादे मजबूत हों, तो सफलता की राह खुद-ब-खुद बन जाती है।

संघर्षों से भरा बचपन और चुनौतियाँ
पूजा का जन्म हरियाणा के गुरुग्राम जिले के चंदू गांव में हुआ था। उनका परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर था, लेकिन जमीन के बंटवारे और पानी की कमी ने हालात बिगाड़ दिए। भूजल स्तर लगातार गिरने से खेती मुश्किल होती चली गई। पति की मामूली आय से तीन बच्चों का खर्च चलाना कठिन हो गया। ऐसे में पूजा ने परिवार की मदद के लिए कदम बढ़ाया।

उन्होंने एक एनजीओ के लिए आंगनवाड़ी में नौकरी शुरू की, जिसमें उन्हें सिर्फ 2,500 रुपये महीना मिलता था। रोज़ाना 5 किलोमीटर दूर काम पर जाने के लिए 5 रुपये का ऑटो किराया भी देना कभी-कभी मुश्किल हो जाता था। डेढ़ साल बाद यह प्रोजेक्ट बंद हो गया और पूजा फिर बेरोजगार हो गईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

गाय के दूध से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर
नौकरी छूटने के बाद पूजा ने घर पर ही छोटा कारोबार शुरू करने की ठानी। उन्होंने एक गाय खरीदी और दूध बेचकर कुछ अतिरिक्त आय कमाने लगीं। धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ी, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली। हालांकि इससे उनकी बुनियादी ज़रूरतें पूरी हो रही थीं, लेकिन पूजा के सपने इससे कहीं बड़े थे। वह चाहती थीं कि कुछ ऐसा करें जिससे न केवल उनका परिवार, बल्कि गांव की अन्य महिलाएं भी सशक्त बन सकें।

कृषि विज्ञान केंद्र बना नई राह की शुरुआत
साल 2013 में पूजा की ज़िंदगी में निर्णायक मोड़ तब आया जब उन्हें गुरुग्राम के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), शिकोहपुर में भुने हुए सोया नट्स बनाने के प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली। उस समय उनके पास प्रशिक्षण केंद्र तक जाने का ऑटो किराया देने के भी पैसे नहीं थे। जब यह बात कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों को पता चली, तो उन्होंने पूजा का किराया खुद दिया और प्रशिक्षण पूरा करवाया।

इस प्रशिक्षण के बाद पूजा ने कुछ अन्य महिलाओं के साथ मिलकर छोटी-छोटी बचत जोड़कर ‘क्षितिज सेल्फ-हेल्प ग्रुप’ की स्थापना की। उन्होंने अपने पुराने घर के एक हिस्से में सोया नट्स बनाने की छोटी यूनिट शुरू की। यह छोटा प्रयास धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ।

मिलेट्स की ओर बढ़ा कदम
सोया नट्स के कारोबार से थोड़ी कमाई तो हुई, लेकिन यह इतना लाभदायक नहीं था कि परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह सुधर जाए। तभी पूजा ने अपनी मां और दादी की पारंपरिक रेसिपीज़ से प्रेरणा लेकर मिलेट्स (श्री अन्न) से उत्पाद बनाने की शुरुआत की। उन्होंने ज्वार, बाजरा और रागी जैसे अनाजों से कुकीज़, बिस्किट, लड्डू और स्नैक्स बनाना शुरू किया।

यहीं से उनके बिजनेस को नई दिशा मिली। ग्राहकों ने उनके उत्पादों को हाथोंहाथ लिया। धीरे-धीरे उनका ब्रांड ‘क्षितिज मिलेट्स’ और ‘मिलेट मॉम’ के नाम से मशहूर होने लगा। अब उनके उत्पाद फ्लिपकार्ट, मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं।

70 लाख रुपये का टर्नओवर
पूजा शर्मा की कंपनी का टर्नओवर आज 70 लाख रुपये से भी ज्यादा पहुंच चुका है। हाल ही में उन्होंने पश्चिम बंगाल के एक क्लाइंट के लिए 2 लाख मिलेट लड्डू का बड़ा ऑर्डर भी पूरा किया है। उनका ब्रांड आज पोषण और परंपरा का प्रतीक बन गया है। उनके उद्यम ने कई ग्रामीण महिलाओं और किसानों की ज़िंदगी में उम्मीद की किरण जगाई है।

स्थानीय किसानों और महिलाओं को दिया सहारा
हरियाणा भारत का तीसरा सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक राज्य है। पूजा स्थानीय किसानों से बाजरा खरीदती हैं, जिससे उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलता है। इस तरह किसानों को आर्थिक स्थिरता मिलती है, और महिलाओं को घर बैठे रोजगार के अवसर मिलते हैं। वर्ष 2017 में एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज़ ने पूजा की टीम को कुकी मेकिंग और मशीनों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया, जिससे उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई। आज उनके साथ 25 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं, जो न केवल खुद की बल्कि अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं।

महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल
पूजा शर्मा अब सिर्फ एक उद्यमी नहीं रहीं, बल्कि एक रोल मॉडल बन गई हैं। वह कई कृषि विश्वविद्यालयों और महिला संगठनों में जाकर ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं। अब तक वह करीब 3 हजार महिलाओं को स्नैक्स और कुकीज़ बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनकी पहल से महिलाएं यह समझने लगी हैं कि आत्मनिर्भरता शहरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांव की मिट्टी से भी बड़ा सपना पनप सकता है।

‘मिलेट मॉम’ – गांव से ग्लोबल तक का सफर
‘मिलेट मॉम’ ब्रांड आज हरियाणा के साथ देशभर में अपना पहचान बना चुका है। पूजा के उत्पादों में पोषण, परंपरा और स्थानीय स्वाद का अनूठा संगम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जब मिलेट्स को ‘सुपर फूड’ घोषित किया गया, तब पूजा के ब्रांड को और प्रोत्साहन मिला। अब वह मिलेट्स को आधुनिक जीवनशैली में शामिल करने की दिशा में काम कर रही हैं। उनका मानना है – “हमारे पारंपरिक अनाजों में ही भविष्य की सेहत और समृद्धि छिपी है। बस जरूरत है उन्हें नए रूप में अपनाने की।”

संघर्ष से सफलता तक
पूजा की कहानी किसी एक महिला की सफलता का किस्सा नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास का प्रतीक है जो किसी भी मुश्किल को मात दे सकता है। एक वक्त था जब 5 रुपये का ऑटो किराया देना भी उनके लिए मुश्किल था, और आज वह लाखों रुपये के ऑर्डर पूरे कर रही हैं। उन्होंने साबित किया कि गांव की महिलाएं परिवार संभालने के साथ अकेले दम पर बिजनेस खड़ा करने का भी हुनर रखती हैं। उन्होंने मिट्टी से उठकर ‘मिलेट मॉम’ जैसा ब्रांड खड़ा किया और हजारों महिलाओं को नई दिशा दी है।

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