देश में 2026-27 के गन्ना पेराई सीजन की शुरुआत के साथ ही चीनी उत्पादन में बड़ी तेजी देखने को मिली है। अक्टूबर महीने में देशभर में 8.45 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के मुकाबले कई गुना अधिक है। अक्टूबर 2025 में इसी अवधि के दौरान महज 1 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इस बार रिकॉर्ड उत्पादन में महाराष्ट्र की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। राज्य की चीनी मिलों ने अकेले 7.20 लाख टन चीनी तैयार की है।
उत्पादन में इस तेजी से आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी और सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हो सकती है।
नवंबर में बढ़ सकती है चीनी की उपलब्धता
आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 को देश में लगभग 36 लाख टन चीनी का पिछला स्टॉक मौजूद था। इसके अलावा अक्टूबर के लिए सरकार ने चीनी मिलों को खुले बाजार में बिक्री के लिए 27 लाख टन का कोटा निर्धारित किया था। अब नए सीजन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद नवंबर में बाजार को पर्याप्त चीनी मिलने की संभावना है।
राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक देश की 152 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी। पिछले साल इसी अवधि में केवल 31 मिलें चालू हो पाई थीं। इस दौरान गन्ने की पेराई 105.43 लाख टन तक पहुंच गई, जबकि अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 11.84 लाख टन था। हालांकि, चीनी रिकवरी दर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। इस साल अक्टूबर में औसत रिकवरी 8.04 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल यह 8.36 प्रतिशत थी।
महाराष्ट्र में सबसे तेज पेराई
महाराष्ट्र इस सीजन में चीनी उत्पादन के मामले में सबसे आगे है। 31 अक्टूबर तक राज्य की 123 मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी। इन मिलों ने 91.14 लाख टन गन्ने की पेराई करके 7.20 लाख टन चीनी का उत्पादन किया। राज्य की औसत रिकवरी दर 7.90 प्रतिशत रही।
वहीं, गुजरात में 10 मिलों ने 1.25 लाख टन गन्ने की पेराई कर 5 हजार टन चीनी बनाई। यहां औसत रिकवरी 4 प्रतिशत दर्ज की गई। महाराष्ट्र में 1 नवंबर तक मिलों की संख्या बढ़कर 124 हो गई। राज्य की 60 सहकारी और 64 निजी मिलों ने मिलकर 97.46 लाख टन गन्ने की पेराई की और 7.91 प्रतिशत रिकवरी के साथ 7.707 लाख टन चीनी का उत्पादन किया।
कर्नाटक और यूपी में अलग-अलग स्थिति
कर्नाटक में अब तक 7 मिलों ने पेराई शुरू की है। यहां 8.33 लाख टन गन्ने से 80 हजार टन चीनी का उत्पादन हुआ है। औसत रिकवरी 9.60 प्रतिशत रही। गन्ने के उचित दाम की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो चुका है।
उत्तर प्रदेश में फिलहाल केवल 3 चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 10 मिलें चालू हो चुकी थीं। तमिलनाडु में 7 और तेलंगाना में 2 मिलों ने काम शुरू कर दिया है।
365 रुपये प्रति क्विंटल तय है एफआरपी
केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह दर 10.25 प्रतिशत की बुनियादी चीनी रिकवरी के आधार पर तय होती है। रिकवरी दर कम होने पर किसानों को मिलने वाले मूल्य पर भी असर पड़ सकता है। कुछ राज्य केंद्र के एफआरपी के अलावा अपना राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) भी घोषित करते हैं।