नई दिल्ली: अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर अपना कारोबार शुरू करना आसान नहीं होता, लेकिन सही सोच और मेहनत से यह फैसला जिंदगी बदल सकता है। मैसूर के सुप्रीत कश्यप ने भी कुछ ऐसा ही किया। साल 2017 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उन्होंने एक्सेंचर में 6 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी शुरू की। हालांकि, उनका मन नौकरी में नहीं लगा और एक साल के भीतर ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अक्टूबर 2021 में उन्होंने ‘वेलबी’ (Wellbi) नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया। आज यह ब्रांड सालाना 6 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर रहा है।
10 लाख रुपये से शुरू किया बिजनेस
सुप्रीत कश्यप एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं, जहां पहले किसी ने कारोबार नहीं किया था। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने दिल्ली से सोशल एंटरप्रेन्योरशिप का कोर्स किया। अक्टूबर 2021 में अपनी करीब 10 लाख रुपये की बचत और माता-पिता की मदद से उन्होंने इको एम्ब्रेस डिजाइनर क्लोथिंग प्राइवेट लिमिटेड के तहत वेलबी ब्रांड की शुरुआत की।
शुरुआत में हाथ से बने उत्पाद बेचने का प्रयास सफल नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने बांस के रेशों से बने कपड़ों पर काम शुरू किया। 999 रुपये की राउंड नेक टी-शर्ट के साथ ब्रांड ने बाजार में कदम रखा। कंपनी बांस और कॉटन-लाइक्रा के मिश्रण से टी-शर्ट और इनरवेयर तैयार करती है।
घाटे से निकला कारोबार, बिक्री 6 करोड़ के पार
वेलबी के लिए शुरुआती साल काफी मुश्किल रहे। पहले साल कंपनी का राजस्व महज 11.5 लाख रुपये था। साल 2024 की पहली छमाही में कंपनी को हर महीने करीब 5 लाख रुपये का घाटा हो रहा था। फैब्रिक की गुणवत्ता तय करना और कारोबार के लिए कुशल कर्मचारियों की तलाश करना भी बड़ी चुनौती थी।
हालांकि, उत्पादों के आराम, गुणवत्ता और पसीना सोखने की क्षमता ने ग्राहकों का भरोसा जीतना शुरू किया। पुराने ग्राहकों की दोबारा खरीदारी से कारोबार को गति मिली। साल 2023 में कंपनी ने 75 लाख रुपये और 2024 में 2.5 करोड़ रुपये की बिक्री की। इसके बाद पिछले वित्त वर्ष में कारोबार 6 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
जेरोधा और मेटा जैसी कंपनियां बनीं ग्राहक
वेलबी की सफलता में कॉर्पोरेट ऑर्डर की भी अहम भूमिका रही है। जेरोधा, मेटा, जे डब्ल्यू मैरियट, सिस्को, अमेजन और एडोब जैसी कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए ब्रांड की टी-शर्ट खरीद रही हैं।
खास तौर पर जेरोधा द्वारा एक स्थापित बड़े ब्रांड की जगह वेलबी को चुनने से कंपनी के B2B कारोबार को मजबूती मिली। सोशल मीडिया पर ग्राहकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद वरिष्ठ अधिकारियों और ग्राहकों ने कंपनी में करीब 3 करोड़ रुपये का निवेश भी किया।
हर महीने बिकते हैं 20 हजार से ज्यादा उत्पाद
आज वेलबी में करीब 60 कर्मचारियों की टीम काम कर रही है। इसके बांस के कपड़े तमिलनाडु के तिरुपुर में तैयार होते हैं, जबकि बेंगलुरु के नेलमंगला में 5,500 वर्ग फीट का मुख्य वेयरहाउस है।
कंपनी हर महीने 20 हजार से अधिक उत्पाद बेचती है। इसकी करीब 97 फीसदी बिक्री अपनी वेबसाइट और अमेजन जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से होती है। बाकी 3 फीसदी बिक्री मैसूर और मुंबई के दो ऑफलाइन स्टोर्स से आती है।
सुप्रीत कश्यप की यह कहानी बताती है कि कारोबार में सफलता के लिए केवल बड़ा निवेश या अनुभव ही जरूरी नहीं है। ग्राहकों की जरूरत समझना, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना और मुश्किल दौर में धैर्य रखना भी एक सफल ब्रांड बनाने में अहम भूमिका निभाता है।