भारत में त्योहारों और सर्दियों की छुट्टियों के साथ घरेलू पर्यटन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। लोग अब केवल लोकप्रिय पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, धार्मिक यात्राओं, एडवेंचर और ग्रामीण जीवन का अनुभव लेने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस बढ़ती मांग को देखते हुए कई राज्य सरकारें विशेष हॉलिडे पैकेज, प्रचार अभियान और नए पर्यटन सर्किट के जरिए यात्रियों को आकर्षित करने में जुटी हैं।
केरल, यूपी और राजस्थान की खास तैयारी
त्योहारी सीजन में केरल पर्यटकों को विशेष यात्रा पैकेज और बेहतर पर्यटन अनुभव देने पर जोर दे रहा है। उत्तर प्रदेश ने ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान के जरिए राज्य के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने की पहल की है। वहीं, राजस्थान एडवेंचर टूरिज्म, डेजर्ट सफारी और ग्रामीण पर्यटन को लोकप्रिय बनाने की कोशिश कर रहा है।
राज्यों की रणनीति केवल प्रमुख पर्यटन केंद्रों तक यात्रियों को पहुंचाने की नहीं, बल्कि कम चर्चित जगहों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने की है। राजस्थान में बूंदी, कोटा, झालावाड़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे स्थान अपनी ऐतिहासिक विरासत, वास्तुकला और स्थानीय संस्कृति के कारण पर्यटकों के लिए नए विकल्प बन रहे हैं। तमिलनाडु में भी धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक आकर्षणों को प्रमुख पर्यटन केंद्रों से आगे बढ़कर प्रचारित किया जा रहा है।
घरेलू यात्राओं में बड़ी बढ़ोतरी
उपलब्ध पर्यटन आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में भारत में घरेलू पर्यटक यात्राओं की संख्या 4.28 अरब रही, जबकि 2024 में यह 2.9 अरब थी। वर्ष 2021 के 67 करोड़ के आंकड़े की तुलना में भी यह बड़ी वृद्धि है।
इंडिया टूरिज्म डेटा कंपेंडियम 2025 के अनुसार, वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश 64.68 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राओं के साथ पहले स्थान पर रहा। तमिलनाडु में 30.68 करोड़, कर्नाटक में 30.45 करोड़, आंध्र प्रदेश में 29.02 करोड़ और राजस्थान में 23 करोड़ यात्राएं दर्ज की गईं।
सर्दियों की छुट्टियों में इन जगहों की मांग
ट्रैवल कंपनियों के अनुसार, आगामी सर्दियों की छुट्टियों के लिए अंडमान, केरल, पूर्वोत्तर भारत, गुजरात और राजस्थान जैसे गंतव्यों में यात्रियों की दिलचस्पी बनी हुई है। धार्मिक पर्यटन के तहत चारधाम यात्रा और अयोध्या, वाराणसी, केदारनाथ तथा तिरुपति जैसे स्थलों की लोकप्रियता भी घरेलू यात्रा बाजार को गति दे रही है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के अध्यक्ष राजीव मेहरा के मुताबिक, धार्मिक पर्यटन के साथ वन्यजीव सफारी, एडवेंचर गतिविधियों, वेलनेस ट्रिप, ग्रामीण पर्यटन और सप्ताहांत की छोटी यात्राओं की मांग भी बढ़ रही है।
विदेश यात्रा महंगी, घरेलू विकल्पों पर जोर
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के महंगे होने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेश यात्रा का बजट बढ़ने से कुछ पर्यटक देश के भीतर छुट्टियां बिताने के विकल्प तलाश रहे हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील ने भी देश के पर्यटन स्थलों पर ध्यान केंद्रित किया है। घरेलू यात्राओं से स्थानीय होटल, परिवहन, गाइड और छोटे कारोबारियों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
सरकारी योजनाओं से पर्यटन को सहारा
घरेलू पर्यटन को मजबूत बनाने में केंद्र सरकार की योजनाओं की भी भूमिका है। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत 2,207 करोड़ रुपये की लागत वाली 53 परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, प्रसाद योजना के जरिए प्रमुख तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती मांग, बेहतर सड़क और हवाई संपर्क तथा नए अनुभवों की तलाश राज्यों के लिए अवसर पैदा कर रही है। आने वाले समय में कम चर्चित पर्यटन स्थलों का विकास स्थानीय रोजगार और कारोबार को बढ़ावा देने के साथ भारत के घरेलू पर्यटन बाजार को भी नई दिशा दे सकता है।