दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की कंपनी Tesla ने इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया में अमेरिका से लेकर चीन तक क्रांति ला दी है। लेकिन भारत जैसे विशाल बाजार में कंपनी की शुरुआत उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। लाखों की आबादी वाले देश में जहां EV मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, वहीं Tesla अब तक सिर्फ 157 से थोड़ा ज्यादा कारें ही बेच पाई है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय उपभोक्ता अभी भी इस प्रीमियम ब्रांड से दूरी बनाए हुए हैं, जबकि दूसरी ओर वियतनाम की नई कंपनी विनफास्ट और चीनी ब्रांड BYD आगे निकलते जा रहे हैं।
भारत में Tesla से अधिक लोकप्रिय विनफास्ट और BYD
सितंबर से डिलीवरी शुरू करने वाली वियतनाम की कंपनी विनफास्ट ने अकेले नवंबर में 362 कारें बेचीं। वहीं Tesla की सीधी प्रतिद्वंद्वी BYD लगभग हर महीने 500 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां भारत में बेच रही है। दूसरी ओर Tesla नवंबर में सिर्फ 48 कारों की डिलीवरी ही कर पाई। यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार में Tesla की स्वीकार्यता फिलहाल बेहद सीमित है। जबकि BMW और मर्सिडीज जैसी लग्जरी कार कंपनियों ने भी Tesla को कड़ी चुनौती दी है। उदाहरण के तौर पर BMW ने सिर्फ नवंबर में 267 इलेक्ट्रिक कारें बेचीं जो टेस्ला से कई गुना ज्यादा है।
EV बिक्री में Tesla 10वें स्थान पर
सरकारी वाहन पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के EV बाजार में टेस्ला फिलहाल 10वें स्थान पर है।
नवंबर के बिक्री आँकड़े इस प्रकार हैं –
टाटा मोटर्स – 7,315
MG – 4,471
महिंद्रा – 3,572
किआ – 550
BYD – 524
हुंडई – 447
विनफास्ट – 362
BMW – 310
मर्सिडीज – 112
Tesla – 48
हालांकि अक्टूबर 2025 की तुलना में विनफास्ट, मर्सिडीज और टेस्ला ने थोड़ा सुधार दिखाया है, लेकिन टाटा, MG और महिंद्रा जैसे घरेलू ब्रांडों की बिक्री में गिरावट आई है। इसका कारण माना जा रहा है कि GST कटौती के बाद ग्राहक फिर से पेट्रोल-डीजल कारों की ओर रुख कर रहे हैं।
कम बिक्री की मुख्य वजहें: भारत में Tesla क्यों नहीं चल पाई?
महंगा आयात शुल्क – भारत में Tesla की कारों पर लगभग 100 फीसदी तक आयात शुल्क लगता है। इससे कीमतें इतनी बढ़ जाती हैं कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यह कारें बजट से बाहर हो जाती हैं।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग का अभाव – जबकि टाटा, MG और महिंद्रा देश में उत्पादन कर रही हैं, वहीं Tesla ने अभी तक भारत में कोई फैक्ट्री नहीं लगाई है। इससे कीमतें और ज्यादा बढ़ जाती हैं।
EV प्रतियोगिता पहले से मजबूत – BYD, Tata, Mahindra और Hyundai पहले से भारत में अपनी जड़ें मजबूत कर चुके हैं। इस कारण Tesla को बाजार में जगह बनाने में मुश्किल हो रही है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव – भारतीय चार्जिंग नेटवर्क अभी विकसित हो रहा है। Tesla का सुपरचार्जर नेटवर्क अभी बेहद सीमित है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में दिक्कत होती है।
धीरे-धीरे पकड़ बना रही है Tesla
बिक्री भले ही अभी कम हो, लेकिन Tesla अपने विस्तार को लेकर लगातार सक्रिय है। पिछले हफ्ते कंपनी ने गुरुग्राम में अपना पहला “ऑल-इन-वन टेस्ला सेंटर” लॉन्च किया। यह सेंटर रिटेल, सर्विस, डिलीवरी और चार्जिंग सब एक ही जगह उपलब्ध करवाता है, जिससे ग्राहकों का अनुभव काफी आसान हो जाता है। कंपनी का कहना है कि उत्तर भारत में बढ़ती टेस्ला कम्युनिटी को यह सुविधा काफी राहत देगी।
भारत में Tesla का बड़ा प्लान
Tesla का उद्देश्य है कि लोग अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ें। कंपनी योजना बना रही है कि लोगों के काम, खाने-पीने, और यात्रा करने वाले स्थानों के आसपास तेज़ और भरोसेमंद चार्जिंग सिस्टम स्थापित किए जाएं। साथ ही, डायरेक्ट बिजनेस मॉडल अपनाकर कंपनी चाहती है कि ग्राहकों का ब्रांड पर भरोसा बढ़े।
भारत जैसा विशाल बाजार Tesla के लिए एक बड़ी संभावना रखता है, लेकिन फिलहाल उसे स्थानीय प्रतिस्पर्धियों और कीमत-संवेदनशील उपभोक्ताओं से चुनौती मिल रही है। अगर कंपनी भारत में मैन्युफैक्चरिंग शुरू करे और चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करे, तो आने वाले सालों में Tesla निश्चित रूप से भारतीय EV बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती है।