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Vodafone idea में 49% से अधिक हिस्सेदारी नहीं बढ़ाएगी सरकार: ज्योतिरादित्य सिंधिया

Last updated: 27/02/2026 3:58 PM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा सरकार Vodafone Idea में 49% से अधिक हिस्सेदारी नहीं बढ़ाएगी
Vodafone Idea में सरकार की हिस्सेदारी 49% पर स्थिर रहेगी: टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया
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भारत के टेलीकॉम सेक्टर में चल रही अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार ने vodafone idea (Vi) को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि सरकार कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 49% से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं रखती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार निवेशक की भूमिका में है, न कि कंपनी के संचालन या प्रबंधन में। 27 फरवरी को आयोजित News18 Rising Bharat Summit 2026 में बोलते हुए सिंधिया ने कहा कि एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया को इक्विटी में बदलने के बाद सरकार की हिस्सेदारी लगभग 49% हो गई है। यह कदम पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है।

सरकार निवेशक, मैनेजमेंट कंपनी के पास
सिंधिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार वोडाफोन आइडिया में इक्विटी होल्डर जरूर है, लेकिन कंपनी के प्रबंधन में उसकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि Vi को अपनी कारोबारी रणनीति, निवेश योजना और ग्रोथ मॉडल खुद तय करना होगा। यह बयान बाजार और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि सरकार कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाकर उसे बचाने की दिशा में अधिक सक्रिय भूमिका ले सकती है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार कंपनी को संचालन स्तर पर राहत देने के बजाय नियामकीय ढांचे के भीतर ही समर्थन देगी।

AGR विवाद पर सरकार का रुख कायम
AGR बकाया टेलीकॉम सेक्टर का सबसे बड़ा वित्तीय मुद्दा रहा है। इस पर सिंधिया ने दोहराया कि सरकार केवल Supreme Court of India के फैसले के अनुसार ही कदम उठा रही है और किसी अतिरिक्त कार्यकारी हस्तक्षेप की योजना नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अदालत द्वारा निर्धारित सीमा से आगे जाकर कोई नई राहत या नीति हस्तक्षेप संभव नहीं है। यानी AGR बकाया को लेकर भविष्य की राहत भी न्यायिक प्रक्रिया पर ही निर्भर रहेगी। सिंधिया का यह बयान ऐसे समय आया है जब Bharti Airtel ने दूरसंचार विभाग (DoT) को पत्र लिखकर AGR बकाया के मामले में समान व्यवहार और स्पष्टता की मांग की है। इससे टेलीकॉम कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धी संतुलन का मुद्दा भी चर्चा में है।

वोडाफोन आइडिया के बकाये पर पुनर्गठन योजना
कुछ सप्ताह पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वोडाफोन आइडिया के AGR बकाये को 31 दिसंबर 2025 तक लगभग ₹87,695 करोड़ पर स्थिर (फ्रीज) करने की योजना को मंजूरी दी थी। इसके अनुसार कंपनी को FY32 से FY41 के बीच चरणबद्ध तरीके से भुगतान करना होगा। इसके अलावा दूरसंचार विभाग ने FY17 से FY19 की अवधि के लिए AGR देनदारियों की पुनर्गणना भी शुरू की है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप है। इस पुनर्गणना से कंपनी के कुल बकाये पर कुछ राहत की संभावना देखी जा रही है, हालांकि अंतिम प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है। विश्लेषकों के अनुसार यह पुनर्गठन योजना कंपनी को अल्पकालिक नकदी दबाव से राहत देती है, लेकिन दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा और निवेश क्षमता की चुनौती बनी रहेगी।

टेलीकॉम सेक्टर के लिए क्या संकेत
सरकार के रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि वोडाफोन आइडिया के भविष्य का निर्धारण अब मुख्यतः कंपनी के व्यवसायिक प्रदर्शन, निवेश जुटाने और नेटवर्क विस्तार रणनीति पर निर्भर करेगा। टेलीकॉम सेक्टर में पहले से ही मजबूत खिलाड़ी मौजूद हैं, और 5G निवेश के दौर में पूंजी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार द्वारा प्रबंधन में हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखना सेक्टर में प्रतिस्पर्धी तटस्थता (competitive neutrality) का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि Vi के लिए अब पूंजी जुटाना, ग्राहक आधार बढ़ाना और नेटवर्क गुणवत्ता सुधारना प्राथमिक चुनौती है।

सैटेलाइट कनेक्टिविटी
सिंधिया ने अपने संबोधन में सैटेलाइट कनेक्टिविटी को भारत के डिजिटल भविष्य का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक तक संचार सेवाओं का पूर्ण पैकेज पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, और सैटेलाइट इंटरनेट इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सरकार ने तीन प्रमुख कंपनियों—Starlink, Reliance Jio और OneWeb—को सैटेलाइट सेवाओं के लिए लाइसेंस जारी किए हैं। नियामकीय प्रक्रिया के अनुसार स्पेक्ट्रम आवंटन भी किया जा चुका है। यह कदम दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाना कठिन या महंगा होता है।

निवेशक सरकार, जिम्मेदारी कंपनी की
टेलीकॉम मंत्री का बयान वोडाफोन आइडिया को लेकर सरकार की रणनीति स्पष्ट करता है। सरकार ने AGR बकाये को इक्विटी में बदलकर कंपनी को वित्तीय राहत दी है, लेकिन अब वह प्रबंधन या हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगी। इसका अर्थ है कि वोडाफोन आइडिया को अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता, निवेश और संचालन सुधार के आधार पर ही बाजार में टिके रहना होगा।

वहीं सैटेलाइट कनेक्टिविटी और डिजिटल विस्तार पर सरकार का जोर यह संकेत देता है कि भारत का टेलीकॉम सेक्टर पारंपरिक मोबाइल सेवाओं से आगे बढ़कर बहु-प्रौद्योगिकी (multi-technology) युग में प्रवेश कर रहा है। आने वाले समय में निवेशक और उद्योग दोनों की नजर इस पर रहेगी कि Vi अपनी वित्तीय और तकनीकी चुनौतियों से कैसे उबरती है और नए प्रतिस्पर्धी दौर में खुद को कैसे स्थापित करती है।

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