Venezuela Oil Crisis: एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार की सुर्खियों में है। 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश के तेल सेक्टर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह वेनेजुएला के जर्जर तेल ढांचे को दोबारा खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह इतना आसान है? विशेषज्ञों का मानना है कि तेल से खरबों की कमाई से पहले अमेरिका को कम से कम 100 अरब डॉलर का लंबा और धैर्यपूर्ण निवेश करना होगा, जिसका असर 2027 के बाद ही दिखेगा।
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार, फिर भी कम उत्पादन
चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है – करीब 303 अरब बैरल। इसके बावजूद नवंबर 2025 में देश का उत्पादन महज 9 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह आंकड़ा 2010 के शुरुआती वर्षों में लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन हुआ करता था। यानी संसाधन मौजूद हैं, लेकिन व्यवस्था और निवेश की कमी ने उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
तेल उत्पादन बढ़ाना क्यों है इतनी बड़ी चुनौती?
रिपोर्ट बताती है कि सरकारी तेल कंपनी PDVSA सालों से पूंजी और तकनीक की कमी से जूझ रही है। नतीजा यह है कि 2026 में सबसे अच्छे हालात में भी उत्पादन में सिर्फ 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी संभव है। इससे ज्यादा उत्पादन के लिए भारी निवेश, आधुनिक तकनीक और कुशल प्रबंधन की जरूरत होगी—जिसका असर 2027 से पहले दिखना मुश्किल है।
जर्जर ढांचा: पाइपलाइन से बंदरगाह तक सब बेहाल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला का तेल ढांचा बेहद खराब हालत में है। बंदरगाहों पर जहाजों को तेल भरने में अब पांच दिन तक लग जाते हैं, जबकि पहले यह काम एक दिन में हो जाता था। कई जगह पाइपलाइन लीक हो रही हैं, रिफाइनरी यूनिट्स बंद पड़ी हैं और तेल क्षेत्रों में चोरी व आगजनी आम बात हो गई है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने से पहले बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
अमेरिकी कंपनियों की वापसी
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में निवेश को लेकर दिलचस्पी दिखा सकती हैं। खासतौर पर वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल अमेरिका की रिफाइनरियों के लिए उपयोगी माना जाता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि जब तक देश में राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा का भरोसा नहीं बनता, तब तक कंपनियां अरबों डॉलर झोंकने से बचेंगी।
100 अरब डॉलर का निवेश, 10 साल का इंतजार
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, वेनेजुएला में पहले जैसा उत्पादन स्तर हासिल करने के लिए अगले 10 साल तक हर साल करीब 10 अरब डॉलर खर्च करने होंगे। यानी कुल मिलाकर 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश। इसमें मशीनरी, पाइपलाइन, रिफाइनरी, सुरक्षा और मानव संसाधन – सब कुछ शामिल है। साफ है कि यह एक लंबी दौड़ है, त्वरित मुनाफे की कहानी नहीं।
भारत के लिए क्या हैं मौके?
अगर वेनेजुएला में हालात सुधरते हैं, तो भारत को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है। चॉइस ब्रोकिंग के अनुसार, भारत की कुछ सरकारी तेल कंपनियां पहले से PDVSA के साथ मिलकर वहां काम कर रही हैं। पूंजी और तकनीक की उपलब्धता बढ़ने पर उत्पादन में इजाफा संभव है। इसके अलावा, भारत पहले वेनेजुएला से रोजाना करीब 4 लाख बैरल भारी कच्चा तेल आयात करता था। यह तेल अपेक्षाकृत सस्ता होता है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को बेहतर मार्जिन मिल सकता है।
तेल कीमतों पर असर फिलहाल सीमित
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 में वेनेजुएला से बाजार में ज्यादा नया तेल नहीं आएगा, इसलिए कीमतों पर तत्काल दबाव नहीं पड़ेगा। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 2026 में औसतन 61.5 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। हालांकि, अगर 2027 से उत्पादन में तेज बढ़ोतरी होती है, तो वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव बन सकता है।
उम्मीदें बड़ी, राह मुश्किल
वेनेजुएला के तेल सेक्टर को दोबारा पटरी पर लाना आसान नहीं है। इसके लिए शांति, स्थिरता, भारी निवेश और जर्जर ढांचे की मरम्मत—सब कुछ एक साथ जरूरी है। जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक तेल उत्पादन में तेज उछाल की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। लेकिन अगर यह मिशन सफल होता है, तो वेनेजुएला के साथ-साथ अमेरिका, भारत और पूरी दुनिया की ऊर्जा तस्वीर बदल सकती है।