देश के सबसे बड़े टेलीकॉम और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में से एक Jio Platforms के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर निवेशकों का इंतजार फिलहाल लंबा होता दिखाई दे रहा है। दरअसल, कंपनी की लिस्टिंग अब सरकारी नियमों में बदलाव से जुड़े नोटिफिकेशन की देरी के कारण अटक गई है। इस वजह से बाजार में यह सवाल उठने लगा है कि क्या मुकेश अंबानी का महत्वाकांक्षी Jio IPO तय समय पर आ पाएगा या नहीं।
सूत्रों के अनुसार कंपनी अभी सरकार की ओर से औपचारिक अधिसूचना का इंतजार कर रही है। इसी नोटिफिकेशन के बाद कंपनी निवेश बैंकरों को नियुक्त कर सकेगी और IPO के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल लक्ष्य यह रखा गया है कि अप्रैल तक यह प्रक्रिया आगे बढ़ सके, लेकिन सब कुछ सरकारी मंजूरी पर निर्भर है।
भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है Jio
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल यूनिट Jio Platforms का IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन सकता है। अगर यह योजना सफल होती है, तो यह लगभग दो दशक बाद रिलायंस समूह की किसी बड़ी इकाई की पहली बड़ी लिस्टिंग होगी।
निवेश बैंकरों के अनुमान के मुताबिक Jio Platforms की वैल्यू करीब 170 अरब डॉलर तक आंकी जा रही है। अगर कंपनी इस वैल्यूएशन पर बाजार में आती है और न्यूनतम हिस्सेदारी बेचती है, तो लगभग 4.3 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटाई जा सकती है। यही वजह है कि बाजार के विशेषज्ञ इसे भारत के सबसे चर्चित और संभावित रूप से सबसे बड़े IPO में से एक मान रहे हैं।
अंबानी ने 2026 की पहली छमाही का दिया था लक्ष्य
अगस्त में मुकेश अंबानी ने कहा था कि Jio Platforms को 2026 की पहली छमाही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की योजना है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की समयसीमा सामने आई है। इससे पहले 2019 में भी अंबानी ने Jio के IPO के लिए लगभग पांच साल का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब सरकारी प्रक्रियाओं और नियमों में बदलाव के कारण यह योजना फिर से कुछ समय के लिए टलती दिखाई दे रही है।
नियमों में बदलाव से खुल सकता है रास्ता
दरअसल, IPO में देरी का एक बड़ा कारण शेयर बाजार के नियमों में प्रस्तावित बदलाव है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने पिछले साल सितंबर में एक महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दी थी। नए प्रस्ताव के अनुसार, जिन कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन रुपये (लगभग 55 अरब डॉलर) से ज्यादा है, उन्हें IPO में केवल 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी होगी। पहले यह सीमा 5 प्रतिशत थी। यह बदलाव बड़ी कंपनियों के लिए IPO प्रक्रिया को आसान बना सकता है। Jio Platforms जैसी बड़ी कंपनी के लिए यह नियम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे कम हिस्सेदारी बेचकर भी कंपनी बड़ी पूंजी जुटा सकती है।
सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार
हालांकि SEBI ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हुई है। जब तक वित्त मंत्रालय इन नियमों को आधिकारिक गजट में प्रकाशित नहीं करता, तब तक कंपनियां नई व्यवस्था के तहत IPO प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकतीं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया कुछ महीनों तक चल सकती है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही में यह नोटिफिकेशन जारी हो सकता है, जिसके बाद बड़े IPO का रास्ता साफ हो जाएगा।
Meta और Alphabet ने पहले ही किया बड़ा निवेश
Jio Platforms को निवेशकों के बीच खास आकर्षण इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। साल 2020 में Meta Platforms और Alphabet जैसी वैश्विक कंपनियों ने Jio में 10 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया था। इस निवेश ने Jio को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत पहचान दिलाई और कंपनी की वैल्यूएशन तेजी से बढ़ी।
NSE का IPO भी बाजार में ला सकता है हलचल
Jio के साथ-साथ एक और बड़ा IPO बाजार में आने की तैयारी कर रहा है। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया भी अपने IPO की योजना बना रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार NSE लगभग 2.5 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटाने की तैयारी कर रहा है। पिछले महीने एक्सचेंज ने निवेश बैंकों से प्रस्ताव भी मांगे थे। अगर Jio और NSE दोनों IPO एक ही समय में बाजार में आते हैं, तो यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
भारतीय बाजार के लिए बड़ा मौका
पिछले दो वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने रिकॉर्ड फंड जुटाने का दौर देखा है। हालांकि 2026 की शुरुआत में नई लिस्टिंग्स की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है। ऐसे में Jio और NSE जैसे बड़े IPO बाजार में नई ऊर्जा ला सकते हैं। Jio Platforms को मुकेश अंबानी के डिजिटल साम्राज्य का सबसे चमकदार हिस्सा माना जाता है। यह कंपनी भारत की डिजिटल क्रांति की कहानी भी बताती है।
लेकिन फिलहाल इसकी लिस्टिंग की टाइमलाइन पूरी तरह सरकारी प्रक्रिया और नियमों की अधिसूचना पर निर्भर है। निवेशक अब इसी बात का इंतजार कर रहे हैं कि सरकार कब अंतिम मंजूरी देती है और भारत के सबसे चर्चित IPO में से एक बाजार में कब दस्तक देता है।