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नोएडा के डिफाल्टर बिल्डर्स पर सरकार सख्त, महागुन समेत कई कंपनियां जांच के घेरे में

Last updated: 20/05/2026 6:19 PM
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नोएडा के डिफाल्टर बिल्डर्स पर सरकार सख्त, महागुन समेत कई कंपनियां जांच के घेरे में
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नोएडा के डिफाल्टर बिल्डर्स उत्तर प्रदेश सरकार अब नोएडा के डिफाल्टर बिल्डर्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। लंबे समय से अधूरे पड़े housing projects, homebuyers की परेशानियों और बकाया भुगतान के मुद्दे पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। औद्योगिक विकास मंत्री Nand Gopal Gupta Nandi ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन बिल्डर्स ने तय शर्तों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

बैठक में यह सामने आया कि कई builders अब तक सरकार द्वारा तय की गई 25 प्रतिशत राशि जमा नहीं कर पाए हैं। इसके बाद मंत्री ने कई बड़ी real estate कंपनियों को जांच के दायरे में लाने और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इनमें Mahagun, Sunshine Infra, Antriksh Developers और Perfect Asotech Builders जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं।

नोएडा के डिफाल्टर बिल्डर्स क्यों बढ़ी सरकार की सख्ती?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा पिछले कई वर्षों से अधूरे housing projects की समस्या से जूझ रहे हैं। हजारों homebuyers ने अपने सपनों का घर खरीदने के लिए builders को पैसा दिया, लेकिन कई projects समय पर पूरे नहीं हो सके। कुछ जगहों पर buyers वर्षों से possession का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई projects financial crisis और कानूनी विवादों में फंस गए।

सरकार का कहना है कि कई builders ने जमीन आवंटन और अन्य शुल्कों का भुगतान समय पर नहीं किया। इसके कारण Noida Authority का बकाया लगातार बढ़ता गया। अब सरकार चाहती है कि ऐसे builders के खिलाफ सख्त कदम उठाकर accountability तय की जाए।

मंत्री ने साफ कहा कि buyers के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा और जिन कंपनियों ने नियमों का पालन नहीं किया, उन्हें किसी तरह की राहत नहीं दी जाएगी।

25 प्रतिशत भुगतान का क्या है मामला?

दरअसल, सरकार और प्राधिकरण की ओर से builders को राहत देते हुए एक restructuring framework लागू किया गया था। इसके तहत builders को अपने बकाया का एक हिस्सा यानी 25 प्रतिशत राशि जमा करनी थी, ताकि projects को दोबारा गति मिल सके और construction कार्य शुरू हो सके।

लेकिन समीक्षा बैठक में सामने आया कि कई builders अब तक यह राशि जमा नहीं कर पाए हैं। सरकार का मानना है कि यदि builders payment commitment पूरा नहीं करते, तो projects को revive करना मुश्किल होगा।

इसी वजह से अब defaulting companies पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को financial records और project status की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

नोएडा के डिफाल्टर बिल्डर्स पर सरकार सख्त, महागुन समेत कई कंपनियां जांच के घेरे में

Homebuyers को मिल सकती है राहत

नोएडा में लाखों लोग ऐसे हैं जिन्होंने flats बुक कराए लेकिन उन्हें समय पर घर नहीं मिला। कई buyers EMI और किराया दोनों भरने को मजबूर हैं। वर्षों से चल रही इस समस्या ने middle class families पर बड़ा आर्थिक दबाव डाला है।

सरकार का focus अब stalled projects को पूरा कराने पर है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अधूरे projects को तेजी से पूरा कराने के लिए practical action plan तैयार किया जाए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि eligible buyers की registry जल्द हो सके। कई projects में flats तैयार होने के बावजूद registry न होने से buyers को ownership rights नहीं मिल पा रहे हैं।

अगर सरकार की सख्ती ground level पर असर दिखाती है, तो हजारों buyers को बड़ी राहत मिल सकती है।

ये भी पढ़े: https://theindustrialempire.com/jsw-steel/

अवैध कब्जों पर भी कार्रवाई के निर्देश

बैठक में केवल builders का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि नोएडा में बढ़ते illegal encroachments पर भी चिंता जताई गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी जमीनों और public spaces पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चलाया जाए।

नोएडा के कई इलाकों में सड़क किनारे अतिक्रमण, unauthorized construction और illegal commercial activities की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। इससे traffic, sanitation और urban planning पर भी असर पड़ता है।

सरकार अब शहर की infrastructure image सुधारने के लिए इस दिशा में भी सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

सफाई व्यवस्था सुधारने पर जोर

समीक्षा बैठक में नोएडा की cleanliness और sanitation system को लेकर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए।

नोएडा देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे urban centers में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में IT companies, startups, multinational offices और residential projects मौजूद हैं। ऐसे में शहर की image बनाए रखने के लिए साफ-सफाई और civic management बेहद जरूरी माना जा रहा है।

सरकार चाहती है कि नोएडा को एक modern, clean और well-managed city के रूप में विकसित किया जाए, ताकि investment और development दोनों को बढ़ावा मिल सके।

Real Estate Sector पर क्या पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की इस सख्ती का असर पूरे real estate sector पर पड़ सकता है। इससे builders को यह संदेश जाएगा कि project delays और payment defaults को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा।

हालांकि कुछ experts का यह भी कहना है कि financial stress से जूझ रही कंपनियों के लिए अचानक सख्ती मुश्किलें बढ़ा सकती है। इसलिए सरकार को buyers के हित और industry stability दोनों के बीच balance बनाना होगा।

फिर भी, buyers के नजरिए से देखें तो लंबे समय बाद सरकार का यह कदम भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इससे real estate market में transparency और accountability मजबूत हो सकती है।

RERA और सरकार की बढ़ती निगरानी

पिछले कुछ वर्षों में real estate sector में transparency लाने के लिए RERA जैसे कानून लागू किए गए। इसके बावजूद कई projects अब भी delays और disputes का सामना कर रहे हैं।

अब राज्य सरकार और development authorities monitoring को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। Project timelines, financial compliance और buyer protection को लेकर निगरानी बढ़ाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर authorities लगातार monitoring करें और समय पर कार्रवाई हो, तो future में stalled projects की संख्या कम की जा सकती है।

नोएडा का real estate market देश के सबसे बड़े property markets में से एक माना जाता है। यहां लाखों लोगों का investment जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार की यह कार्रवाई केवल builders तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर homebuyers, investors और पूरे property sector पर पड़ेगा। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच के घेरे में आई कंपनियों के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और अधूरे projects को पूरा कराने के लिए सरकार कितनी तेजी से काम करती है।

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