खतरनाक कुत्तों देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमले अब एक गंभीर सार्वजनिक समस्या बनते जा रहे हैं। हर साल हजारों लोग डॉग बाइट का शिकार होते हैं और कई मामलों में रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी भी सामने आती है। इसी मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर जिले में Animal Birth Control (ABC) सेंटर स्थापित किए जाएं और Anti-Rabies Vaccine की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सुप्रीम Court ने यह भी कहा है कि ऐसे कुत्ते जो रेबीज से संक्रमित हों, लाइलाज स्थिति में हों या अत्यधिक आक्रामक और खतरनाक बन चुके हों, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत euthanasia यानी मारने पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि यदि अधिकारी अदालत के निर्देशों और तय प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, तो उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी।
क्यों बढ़ रही है आवारा कुत्तों की समस्या?
पिछले कुछ वर्षों में देश के कई शहरों में stray dogs के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सड़कों, कॉलोनियों, पार्कों और यहां तक कि स्कूलों के आसपास भी आवारा कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं। कई बार ये कुत्ते बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमला कर देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि uncontrolled breeding, खुले में पड़ा कचरा और proper sterilization की कमी इस समस्या की बड़ी वजह है। नगर निकायों द्वारा समय पर Animal Birth Control programs लागू नहीं किए जाने के कारण stray dog population लगातार बढ़ रही है।
कई शहरों में लोगों के भीतर डर का माहौल बन चुका है। सुबह की walk हो या बच्चों का बाहर खेलना, लोग stray dog attacks को लेकर चिंता में रहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम Court ने सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहले है। अदालत ने माना कि animal welfare जरूरी है, लेकिन human safety को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए कि:
- हर जिले में Animal Birth Control सेंटर स्थापित किए जाएं
- Anti-Rabies Vaccine की पर्याप्त व्यवस्था हो
- Dog bite victims के इलाज की सुविधा मजबूत की जाए
- स्थानीय प्रशासन stray dogs की monitoring करे
- खतरनाक और rabid dogs के मामलों में तय कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई अधिकारी कोर्ट के निर्देशों के तहत कार्रवाई करता है, तो उसके खिलाफ criminal case दर्ज नहीं किया जाएगा।
क्या है Animal Birth Control Program?
Animal Birth Control यानी ABC Program का उद्देश्य stray dogs की population को नियंत्रित करना होता है। इसके तहत कुत्तों की sterilization की जाती है ताकि उनकी संख्या तेजी से न बढ़े। साथ ही उन्हें anti-rabies vaccine भी दी जाती है।
सरकार और animal welfare organizations का मानना है कि mass killing की बजाय sterilization और vaccination ज्यादा sustainable solution है। लेकिन ground level पर कई शहरों में यह system प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाया।
कई जिलों में न तो पर्याप्त ABC centers हैं और न ही trained staff। यही कारण है कि dog population control की प्रक्रिया धीमी बनी हुई है।

रेबीज बना बड़ी चिंता
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां rabies के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। World Health Organization के अनुसार हर साल हजारों लोगों की मौत रेबीज के कारण होती है, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है।
रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज symptoms आने के बाद लगभग असंभव माना जाता है। यही वजह है कि dog bite के बाद तुरंत anti-rabies vaccine लेना बेहद जरूरी होता है।
लेकिन देश के कई सरकारी अस्पतालों में vaccine की कमी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। सुप्रीम Court ने इसी को देखते हुए राज्यों को vaccine availability सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
Animal Rights बनाम Public Safety
यह मुद्दा केवल कानून या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि society में भी इस पर दो अलग-अलग राय देखने को मिलती हैं। एक तरफ animal lovers हैं, जो stray dogs की सुरक्षा और अधिकारों की बात करते हैं। दूसरी तरफ आम नागरिक हैं, जो बढ़ते हमलों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
कई animal welfare organizations का कहना है कि कुत्तों को मारना समाधान नहीं है। उनका मानना है कि sterilization, vaccination और proper feeding management से समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
वहीं दूसरी ओर कई resident welfare associations और नागरिक समूहों का कहना है कि लगातार बढ़ते attacks के बीच सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे।
सुप्रीम Court का फैसला इन दोनों पक्षों के बीच balance बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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नगर निकायों पर बढ़ेगा दबाव
Court के आदेश के बाद अब नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। उन्हें न केवल ABC centers शुरू करने होंगे, बल्कि vaccination drives और monitoring system भी मजबूत करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर local bodies समय पर कार्रवाई करें, तो आने वाले वर्षों में stray dog population को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इसके लिए funding, trained manpower और public awareness भी जरूरी होगी। केवल अदालत के आदेश से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि ground level implementation सबसे अहम होगा।
लोगों को भी बरतनी होगी सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि stray dogs के मामलों में लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों को अकेले stray dogs के पास न जाने देना, कुत्तों को उकसाने से बचना और dog bite होने पर तुरंत medical treatment लेना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा कई शहरों में खुले में फेंका जाने वाला food waste भी stray dogs की संख्या बढ़ाने की बड़ी वजह बनता है। साफ-सफाई और waste management बेहतर होने से भी इस समस्या को कम किया जा सकता है।
आगे क्या?
सुप्रीम Court का यह फैसला आने वाले समय में stray dog management policy को नई दिशा दे सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन इन निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।
एक तरफ animal welfare का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ public safety की चुनौती। ऐसे में सरकारों के लिए दोनों के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। लेकिन बढ़ते dog bite cases और rabies के खतरे को देखते हुए अब सख्त और practical कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है।
अगर Animal Birth Control programs, vaccination drives और monitoring systems को सही तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले समय में इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।