नई दिल्ली: सिक्योरिटी इंडस्ट्री के प्रमुख कारोबारी, SIS ग्रुप के संस्थापक और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से कारोबारी, राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर है। आरके सिन्हा को भारत में निजी सुरक्षा सेवाओं को संगठित उद्योग के रूप में स्थापित करने और SIS ग्रुप को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का श्रेय दिया जाता है।
पत्रकारिता से कारोबार और राजनीति तक का सफर
आरके सिन्हा का जन्म 22 सितंबर 1951 को हुआ था। वह भारतीय जनसंघ के समय से ही राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए। राजनीति के साथ-साथ उन्होंने पत्रकारिता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी काम किया। भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने संसद में भी अपनी भूमिका निभाई।
उनका जीवन पत्रकारिता, सार्वजनिक जीवन और उद्यमिता के बीच संतुलन स्थापित करने की मिसाल रहा। उन्होंने कारोबार को केवल मुनाफा कमाने का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि रोजगार सृजन और उद्योग के विकास पर भी जोर दिया।
250 रुपये से शुरू किया SIS का सफर
आरके सिन्हा की कारोबारी यात्रा बेहद छोटे स्तर से शुरू हुई थी। वर्ष 1974 में उन्होंने पटना में महज 250 रुपये की पूंजी से सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (SIS) की नींव रखी। शुरुआती दौर में कंपनी का काम सीमित संसाधनों के साथ आगे बढ़ा, लेकिन उनकी दूरदृष्टि, मेहनत और कारोबारी रणनीति ने इसे एक बड़े व्यावसायिक समूह में बदलने में अहम भूमिका निभाई।
समय के साथ SIS ने निजी सुरक्षा सेवाओं से आगे बढ़कर फैसिलिटी मैनेजमेंट और मैनपावर सेवाओं के क्षेत्र में भी अपना विस्तार किया। कंपनी ने भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। SIS ग्रुप की विकास यात्रा भारतीय उद्यमियों के लिए इस बात का उदाहरण बनी कि सीमित पूंजी और स्थानीय स्तर से शुरू हुआ कारोबार भी बड़े पैमाने पर विस्तार कर सकता है।
निजी सुरक्षा उद्योग को संगठित पहचान
भारत में निजी सुरक्षा और मैनपावर सेवाओं का क्षेत्र लंबे समय तक बिखरा हुआ था। आरके सिन्हा ने इस क्षेत्र में व्यवस्थित कार्यप्रणाली, कर्मचारियों के प्रबंधन और पेशेवर सेवाओं को बढ़ावा देने में योगदान दिया। उनके नेतृत्व में SIS ने सुरक्षा सेवाओं को बड़े संस्थानों और कारोबारी प्रतिष्ठानों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया।
इस उद्योग के विस्तार से बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए। सुरक्षा सेवाओं, कर्मचारियों की तैनाती और फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में संगठित कंपनियों की भूमिका भी मजबूत हुई।
राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक
आरके सिन्हा के निधन पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। उनके निधन को राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी जगत के लिए बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
उनके पार्थिव शरीर को दिल्ली से पटना ले जाने और पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में अंतिम दर्शन के लिए रखने की जानकारी सामने आई। आरके सिन्हा की विरासत उनके कारोबारी योगदान, सार्वजनिक जीवन और रोजगार सृजन के प्रयासों के रूप में याद की जाएगी।