भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vi) एक बार फिर आर्थिक दबाव में है। सरकार से उसे जिस वित्तीय राहत की उम्मीद थी, वो अब लगभग खत्म होती दिख रही है। AGR (Adjusted Gross Revenue) विवाद में फंसी कंपनी को आगे राहत देने के सरकार के रुख में अब स्पष्ट सख्ती दिखाई दे रही है।
सरकार ने और इक्विटी देने से किया इनकार
वोडाफोन-आइडिया पर एजीआर मद में 84 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। सरकार पहले ही कंपनी की हिस्सेदारी में 49 फीसदी तक की भागीदारी लेकर उसे राहत देने की कोशिश कर चुकी है। लेकिन अब सूत्रों की मानें तो सरकार न तो भुगतान की समयसीमा बढ़ाने को तैयार है और न ही और इक्विटी लेने को इच्छुक है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “सरकार पहले ही इक्विटी लेकर कंपनी को 4 साल का समय दे चुकी है ताकि वह पटरी पर लौट सके। लेकिन अब तक उस स्तर की रिकवरी नहीं हुई जिसकी उम्मीद थी।” ऐसे में आगे कोई ढील या समयसीमा विस्तार की संभावना कमजोर नजर आ रही है।
सिर्फ Vi नहीं, Airtel भी हो सकती है प्रभावित
सरकार यदि AGR बकाया भुगतान की अवधि बढ़ाती है या किसी भी तरह की नीति में बदलाव करती है, तो यह राहत सिर्फ Vi तक सीमित नहीं रहेगी। इससे भारती एयरटेल जैसे अन्य ऑपरेटरों को भी समान लाभ मिल सकता है। एक अन्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी एक कंपनी को राहत देने का मतलब होगा सभी कंपनियों के लिए नीति में परिवर्तन और यह सरकार के लिए मुश्किल निर्णय होगा। इसी कारण वोडाफोन-आइडिया की मांग को लेकर सरकार बेहद सतर्क है और अब तक कोई पॉलिसी लेवल आश्वासन नहीं दिया गया है।
कंपनी ने खुद भी मानी अनिश्चितता
25 जून को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को भेजे एक आधिकारिक बयान में, वोडाफोन-आइडिया ने कहा, “AGR राहत से जुड़े मुद्दों पर हमें अब तक सरकार से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।” इसका सीधा संकेत यह है कि कंपनी को अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इसके पहले 2 जून को कंपनी के CEO अक्षय मूंदड़ा ने भी कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा AGR बकाया माफी याचिका को खारिज किए जाने के बाद कंपनी ने सरकार से राहत के लिए संपर्क किया था लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं आया।
कितनी बड़ी है बकाया राशि और क्या था पिछला समाधान?
वोडाफोन-आइडिया ने 2021 में अपने बकाये स्पेक्ट्रम और AGR ब्याज की राशि को इक्विटी में बदलने का विकल्प चुना था। कुल राशि थी 36,950 करोड़ रुपये। इसके तहत सरकार ने कंपनी में हिस्सेदारी ली और अब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वह Vi की सबसे बड़ी शेयरधारक है। सरकार की यह भागीदारी मार्च 2022 में हुई थी और इसे लेकर उम्मीद की गई थी कि कंपनी अगले 3-4 साल में पुनः आर्थिक रूप से स्थिर हो जाएगी। लेकिन 2026 से जो भुगतान शुरू होना है, उसका पहला हिस्सा ही 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है, जिसे चुकाना कंपनी के लिए आसान नहीं होगा।
क्या हो सकता है अगला कदम?
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो पहले चर्चा थी कि सरकार 6 साल की वर्तमान भुगतान अवधि को बढ़ाकर 20 साल कर सकती है या आंशिक भुगतान की व्यवस्था पर विचार कर सकती है, जब तक कोई अंतिम नीति तय न हो जाए। लेकिन फिलहाल सरकार इस दिशा में कोई मूड नहीं दिखा रही है। दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में एक इंटरव्यू में यह स्पष्ट कर दिया था कि सरकार की योजना Vi में और इक्विटी बढ़ाने की नहीं है। हालांकि, उन्होंने अन्य राहतों पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं दी थी, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार अब “wait and watch” की स्थिति में है।
बाजार और निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
वोडाफोन-आइडिया की यह स्थिति न केवल टेलीकॉम सेक्टर, बल्कि स्टॉक मार्केट और निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है। निवेशकों को यह समझना होगा कि कंपनी की बुनियादी वित्तीय स्थिति अभी भी कमजोर है और सरकार से उम्मीद की जा रही राहत अब शायद न आए। यदि Vi समय पर अपनी भुगतान शर्तें नहीं पूरी कर पाती तो यह न केवल कंपनी की साख को प्रभावित करेगा बल्कि पूरे सेक्टर की स्थिरता पर भी असर डाल सकता है। खासकर जब 5G और डिजिटल इंडिया जैसे बड़े इनिशिएटिव पर देश काम कर रहा है।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण
वोडाफोन-आइडिया के लिए आगे की राह अब पहले से कहीं अधिक कठिन हो गई है। सरकार का रुख स्पष्ट है अब और राहत नहीं दी जाएगी जब तक कंपनी खुद से कोई ठोस परिणाम न दिखाए। ऐसे में कंपनी को चाहिए कि वह अपने ऑपरेशनल प्रदर्शन को सुधारे, फंडिंग के वैकल्पिक रास्ते खोजे और निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल करे। AGR विवाद की ये नई तस्वीर बताती है कि भारत में व्यापारिक सहूलियतों की सीमाएं हैं और सरकारी सहयोग सिर्फ एक हद तक ही संभव है। अगली चाल अब Vi के हाथ में है।