quick commerce यानी ऑनलाइन ऑर्डर के बाद कुछ ही मिनटों में डिलीवरी देने वाला मॉडल अब भारत में तेज़ी से अपना आकार बढ़ा रहा है। स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक क्विक कॉमर्स बाजार का अनुमानित 198.06 अरब डॉलर राजस्व में भारत की हिस्सेदारी 2.71 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह हिस्सेदारी भले ही छोटी लगे, लेकिन तेज़ी से बढ़ते उपभोक्ता आधार के कारण भारत आने वाले वर्षों में इस सेक्टर की दिशा बदलने वाला देश साबित हो सकता है।
चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार
राजस्व के आधार पर भारत अब चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा quick commerce बाजार बन चुका है। चीन और अमेरिका इस क्षेत्र में बड़े उपभोक्ता बाजार होने के कारण आगे हैं, लेकिन भारत जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे विकसित बाजारों से आगे निकल चुका है। यह बात इस सेक्टर में भारत की संभावनाओं को और मजबूत करती है क्योंकि यहां इंटरनेट, डिजिटल भुगतान, स्मार्टफोन और युवा उपभोक्ताओं का बड़ा आधार इसे तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है।
भारत सबसे तेज़ बढ़ने वाला बाजार
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2025 से 2030 के बीच भारत क्विक कॉमर्स में सालाना 15.5 फीसदी CAGR की दर से बढ़ेगा, जो दुनिया के शीर्ष तीनों में सबसे तेज़ वृद्धि है। तुलना करें तो आने वाले वर्षों में अमेरिका में क्विक कॉमर्स बाजार की वृद्धि लगभग 6.72 फीसदी रहने की उम्मीद है, जबकि चीन में यह दर करीब 7.9 फीसदी रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले भारत इस अवधि में 15.5 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर के साथ सबसे तेज़ विस्तार वाला बाजार बन सकता है। यह आंकड़े बताते हैं कि तेजी से बढ़ते उपभोक्ताओं, बढ़ते निवेश और बड़े डिजिटल बाजार के कारण quick commerce सेक्टर में भारत आने वाले समय में दुनिया से तेज़ रफ्तार पकड़ने जा रहा है।
2030 तक राजस्व दोगुना होने की उम्मीद
साल 2025 में भारत का क्विक कॉमर्स राजस्व लगभग 5.38 अरब डॉलर रहने की संभावना है, जो अगले पाँच साल में बढ़कर 2030 तक 11.08 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस तरह वैश्विक हिस्सेदारी भी 2025 के 2.71 फीसदी से बढ़कर 2030 में 4 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। तेज़ी से बढ़ते उपयोगकर्ताओं, छोटे शहरों में बढ़ते विस्तार और तेज़ डिलीवरी के नए मॉडलों ने इस विकास को मजबूत किया है।
6.5 करोड़ भारतीय बन सकते हैं quick commerce उपभोक्ता
स्टेटिस्टा का अनुमान है कि साल 2030 तक भारत में quick commerce उपयोगकर्ताओं की संख्या 6.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जिससे वैश्विक उपभोक्ता आधार में भारत की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत हो जाएगी। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन खरीददारी अब केवल बड़ी मेट्रो सिटीज़ तक सीमित नहीं रही, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है।
निवेश जुटाने में भारत आगे
quick commerce में निवेश के मोर्चे पर भी भारत ने पिछला दशक बेहद मजबूत रखा है। एमएमए – पब्लिसिस कॉमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस सालों में इस सेक्टर में भारत को लगभग 6.8 अरब डॉलर का निवेश मिला है। यह आंकड़ा अमेरिका के 7.9 अरब डॉलर के निवेश से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन जर्मनी (4.6 अरब डॉलर), ब्रिटेन (2.4 अरब डॉलर) और तुर्किये (2.5 अरब डॉलर) जैसे देशों से काफी अधिक है। इससे साफ दिखता है कि निवेशकों को भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार की क्षमता पर बड़ा भरोसा है और आने वाले वर्षों में वे यहां और अधिक निवेश देखने की उम्मीद कर रहे हैं।
हजारों डार्क स्टोर्स, लाखों मासिक उपभोक्ता
आज भारत में ब्लिंकइट, जेप्टो, इंस्टामार्ट, फ्लिपकार्ट मिनट्स और बिगबास्केट जैसी quick commerce कंपनियां 70 से 100 से अधिक शहरों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। तेज़ डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ये कंपनियां 4,600 से ज्यादा डार्क स्टोर्स का संचालन कर रही हैं, जिन पर ऑर्डर प्रोसेसिंग और शिपमेंट होता है। फिलहाल इन प्लेटफॉर्मों पर लगभग 2 करोड़ सक्रिय खरीदार मौजूद हैं, जिनमें से 40 से 50 लाख उपभोक्ता हर महीने लेनदेन करते हैं। यह संख्या बताती है कि क्विक कॉमर्स अब शहरी इलाकों से आगे बढ़कर भारतीय उपभोक्ताओं की रोज़मर्रा की खरीदारी का मजबूत हिस्सा बन चुका है।
दुनिया के कई विकसित बाजारों में धीमी रफ्तार
दिलचस्प बात यह है कि जहां भारत, चीन और कुछ एशियाई देशों में इस सेक्टर की तेजी बरकरार है, वहीं पश्चिमी देशों में इसका विस्तार सीमित दिख रहा है। जापान चौथा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है, उसके बाद दक्षिण कोरिया, ताइवान और इंडोनेशिया का नंबर आता है। यूरोप में केवल ब्रिटेन ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है, जबकि फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में बाजार अभी परिपक्व नहीं हो पाया है।
क्या होगा quick commerce का भविष्य
तेज़ डिलीवरी, ऑनलाइन भुगतान और उपभोक्ता आदतों में तेज़ बदलाव ने भारत में quick commerce को अगले स्तर पर पहुंचा दिया है। 2025 से 2030 के बीच यदि अनुमानित वृद्धि जारी रही, तो यह सेक्टर भारत के रिटेल और ई-कॉमर्स की तस्वीर ही बदल सकता है। एक बड़े डिजिटल उपभोक्ता समूह और आक्रामक विस्तार करने वाली कंपनियों के साथ भारत quick commerce के भविष्य का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है।