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2032 तक 3-nanometer chip बनाएगा भारत, बनेगा सेमीकंडक्टर महाशक्ति: अश्विनी वैष्णव

Last updated: 12/01/2026 11:19 AM
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Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और नैनोमीटर चिप निर्माण का विकास
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव | फाइल फोटो
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Nanometer chip: भारत अब सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक बड़े वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्र सरकार की नई रणनीतियों, इंडियाएआई मिशन और बड़े पैमाने पर निवेश के चलते आने वाले वर्षों में देश की तकनीकी तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक इंटरव्यू में बताया कि सेमीकंडक्टर उद्योग में बढ़ती वैश्विक मांग – चाहे वह एआई हो, इलेक्ट्रिक वाहन हों, मोबाइल फोन या कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, भारत के लिए एक बड़ा अवसर बनकर सामने आई है। इसी को देखते हुए देश में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर ठोस शुरुआत की जा चुकी है। फिलहाल 10 यूनिट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से चार प्रमुख संयंत्र—सीजी सेमी, केयन्स टेक्नॉलजी, माइक्रोन टेक्नॉलजी और असम में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स 2026 से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार हैं। यह भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

सरकार का फोकस फैब्रिकेशन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर है। चिप डिजाइन के क्षेत्र में 23 स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो स्वदेशी तकनीक को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही देश के 313 विश्वविद्यालयों में प्रतिभा विकास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, ताकि भविष्य के लिए कुशल इंजीनियर और विशेषज्ञ तैयार किए जा सकें। कई वैश्विक उपकरण निर्माता भी भारत में अपने प्लांट स्थापित कर रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन और मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा, इन सभी प्रयासों का असर आने वाले वर्षों में साफ दिखाई देगा। अनुमान है कि 2028 तक भारत सेमीकंडक्टर के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में पहचान बना लेगा। इसके बाद का दौर तेज़ विकास का होगा, जहां भारत 2032 तक दुनिया के बड़े सेमीकंडक्टर दिग्गजों में शामिल हो सकता है। इस लक्ष्य के तहत अत्याधुनिक 3-नैनोमीटर चिप के निर्माण की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग यानी ओएसएटी सेक्टर में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई कंपनियां वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर भारत में तैयार हो रही क्षमता का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं। सरकार का स्पष्ट मानना है कि किसी भी नए उद्योग की सफलता बाजार में उसकी गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमत पर निर्भर करती है। इसलिए कंपनियों को लगातार इस दिशा में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मोर्चे पर भी भारत ने सॉवरिन एआई को राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में तय किया है। देश में इंजीनियर एआई मॉडल, चिपसेट और एप्लिकेशन पर एक साथ काम कर रहे हैं। सरकार की रणनीति एआई स्टैक की सभी पांच लेयर एप्लिकेशन, मॉडल, चिपसेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा में प्रतिस्पर्धी बनने की है। इंडियाएआई मिशन के तहत 12 टीमें आधारभूत एआई मॉडल विकसित कर रही हैं, जबकि कई डिजाइन टीमें स्वदेशी चिपसेट पर काम कर रही हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर करीब 70 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है, ताकि भारत एक मजबूत डेटा सेंटर और एआई हब बन सके। स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नए कानून भी बनाए गए हैं, जिससे एआई और डेटा सेंटर की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के निर्माण को लेकर पीएलआई योजना भी तेजी से रफ्तार पकड़ रही है। इस योजना से भारत की सप्लाई चेन को बड़ा बल मिलेगा और स्थानीयकरण को बढ़ावा मिलेगा। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में घरेलू मांग पूरी होगी साथ ही भारत कई इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों का बड़ा निर्यातक भी बनेगा।

सेमीकंडक्टर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। यदि यह योजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाला दशक भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में स्थापित कर सकता है।

TAGGED:3nm TechnologyChip ManufacturingDigital IndiaFeaturedIndustrial EmpireMake in IndiaNanometer ChipSemiconductor Industry India
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