भारत के भरोसेमंद माने जाने वाले पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) मिशन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने भी इसकी पुष्टि की और बताया कि सोमवार को लॉन्च के बाद PSLV-C62 मिशन में तकनीकी गड़बड़ी देखने को मिली, जिसके कारण अंतरिक्ष में भेजे गए 16 सैटेलाइट अपने तय लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए। इस घटनाक्रम ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम और उससे जुड़े स्टार्टअप्स की चिंता बढ़ा दी है।
लॉन्चिंग सफल, लेकिन मिशन में आई रुकावट
PSLV का 64वां मिशन, PSLV-C62, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:18 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। शुरुआती चरणों में रॉकेट की उड़ान सामान्य रही और सब कुछ योजना के अनुसार चलता दिखा। लेकिन जैसे ही रॉकेट तीसरे चरण में पहुंचा, उसमें एक तकनीकी डिस्टर्बेंस दर्ज की गई। इसके बाद रॉकेट की दिशा में गड़बड़ी आने लगी और मिशन अपेक्षित पथ से भटक गया।
ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस गड़बड़ी की पुष्टि करते हुए कहा कि तीसरे चरण के दौरान असामान्य व्यवहार देखा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल पूरे डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही मिशन को सफल या असफल घोषित किया जाएगा।
थर्ड स्टेज की खराबी बनी सबसे बड़ी वजह
अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मुताबिक, PSLV के तीसरे चरण में किसी भी तरह की तकनीकी समस्या मिशन के लिए बेहद गंभीर होती है। यही वह चरण होता है, जो सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा की ओर अंतिम गति देता है। अगर इस स्टेज में गड़बड़ी आ जाए, तो सैटेलाइट का अपने सही ऑर्बिट तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। इस मिशन में भी यही स्थिति बनती नजर आ रही है।
कमबैक मिशन पर फिर सवाल
PSLV-C62 को ISRO ने बेहद अहम “कमबैक मिशन” के रूप में देखा था। वर्ष 2025 में PSLV की एकमात्र लॉन्चिंग असफल रही थी और उस मिशन में भी तीसरे चरण में ही तकनीकी खराबी सामने आई थी। उस असफलता के बाद ISRO ने एक विशेष जांच समिति बनाई थी, लेकिन उस समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। इसके बावजूद 2026 की पहली लॉन्चिंग के लिए PSLV-C62 को चुना गया, जिससे उम्मीद थी कि PSLV अपनी विश्वसनीयता फिर से साबित करेगा।
16 सैटेलाइट दांव पर लगे
इस मिशन के जरिए कुल 16 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे गए थे। इनमें पृथ्वी अवलोकन से जुड़ा EOS-N1 और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सर्विलांस सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ भी शामिल था। इसके अलावा, कई छोटे और कमर्शियल सैटेलाइट भी इस रॉकेट के जरिए लॉन्च किए गए थे, जिनका इस्तेमाल संचार, रिसर्च और निगरानी जैसे कार्यों के लिए किया जाना था।
स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों पर असर
अगर PSLV-C62 को अंततः असफल घोषित किया जाता है, तो यह PSLV के 64 मिशनों में पांचवीं विफलता होगी। आंकड़ों के लिहाज से यह बहुत बड़ा झटका नहीं माना जाता, लेकिन भरोसे और छवि के लिहाज से इसका असर जरूर पड़ेगा। इस मिशन में ब्राजील, नेपाल और ब्रिटेन के सैटेलाइट भी शामिल थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स के लिए भी यह खबर निराशाजनक है। हैदराबाद की ध्रुवा स्पेस के सात सैटेलाइट इसी मिशन का हिस्सा थे। यह कंपनी इस मिशन की बड़ी कमर्शियल साझेदार थी, ऐसे में संभावित विफलता का सीधा असर उसके बिजनेस और भविष्य की योजनाओं पर पड़ सकता है।
PSLV की साख महत्वपूर्ण
PSLV को अब तक ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता रहा है और यह भारत के कमर्शियल स्पेस मिशनों की रीढ़ है। आने वाले समय में ISRO, HAL और L&T के कंसोर्टियम के जरिए पहला इंडस्ट्री-मेड PSLV लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में इस मिशन का परिणाम बेहद अहम माना जा रहा है।
हालांकि ISRO ने अभी तक आधिकारिक रूप से PSLV-C62 को असफल घोषित नहीं किया है, लेकिन चेयरमैन का यह कहना कि मिशन अपेक्षित रास्ते पर नहीं चला, चिंता को और गहरा करता है। जैसे ही जांच पूरी होगी, उसके नतीजे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।