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आईटी

अमेरिका का नया 25% टैक्स प्रस्ताव: भारतीय IT और GCC इंडस्ट्री के लिए बड़ा खतरा

Shashank Pathak
Last updated: 10/09/2025 11:37 AM
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Shashank Pathak
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अमेरिका का 25% आउटसोर्सिंग टैक्स प्रस्ताव, भारतीय आईटी कंपनियों और GCC इंडस्ट्री पर खतरा
अमेरिका के प्रस्तावित 25% आउटसोर्सिंग टैक्स से भारतीय आईटी कंपनियों पर खतरा (प्रतीकात्मक इमेज)
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अमेरिका में पेश किए गए एक नए प्रस्तावित कानून ने भारतीय आईटी कंपनियों और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए चिंता बढ़ा दी है। इस कानून के तहत, विदेशी श्रमिकों और सेवाओं पर निर्भर अमेरिकी कंपनियों पर 25 फीसदी टैक्स लगाने की तैयारी की जा रही है। अगर यह कानून लागू होता है, तो भारत की आईटी इंडस्ट्री, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) कंपनियों और GCC सेक्टर पर बड़ा असर पड़ सकता है।

25% टैक्स का असर: आउटसोर्सिंग महंगी होगी
अगर यह नया नियम 1 जनवरी, 2026 से लागू होता है, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी सेवाओं का उपयोग करना बेहद महंगा हो जाएगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य, संघीय और स्थानीय करों को जोड़ने के बाद अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स का कुल बोझ 60 फीसदी तक पहुंच सकता है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिकी कंपनियों को अपनी ग्लोबल सोर्सिंग रणनीतियों पर फिर से विचार करना पड़ेगा। भारत, फिलीपींस, पोलैंड जैसे देशों से आईटी, कस्टमर सपोर्ट और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग की मौजूदा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

“हायर” एक्ट: अमेरिकी सीनेटर का प्रस्ताव
यह प्रस्ताव ओहियो के रिपब्लिकन सीनेटर बर्नी मोरेनो द्वारा पेश किया गया है। इस कानून का नाम है – Halting International Relocation of Employment Act (HIRE Act).

अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी श्रमिकों या सेवाओं के लिए किए जाने वाले किसी भी भुगतान पर 25 प्रतिशत का टैक्स देना होगा। इससे जुटाए गए राजस्व का उपयोग अमेरिकी मध्यम वर्ग के लिए कर्मचारी विकास कार्यक्रमों और रोजगार सृजन पर किया जाएगा।

आउटसोर्सिंग की परिभाषा भी बदली जाएगी
“HIRE” एक्ट में आउटसोर्सिंग को इस तरह परिभाषित किया गया है – “किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा किसी विदेशी व्यक्ति को श्रम या सेवाओं के बदले दिए गए किसी भी शुल्क, रॉयल्टी, सेवा चार्ज या भुगतान को आउटसोर्सिंग माना जाएगा, अगर उसका फायदा अमेरिका में मौजूद उपभोक्ताओं को मिलता है।” यानी अगर अमेरिकी ग्राहक को भारत या किसी अन्य देश की आईटी कंपनी सेवा देती है, तो उस पर सीधा 25 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा।

टैक्स का वित्तीय असर कितना होगा?
ईवाई इंडिया के ग्लोबल कंप्लायंस सॉल्यूशंस हेड जिग्नेश ठक्कर का कहना है कि यह टैक्स अमेरिकी कंपनियों के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है। मान लीजिए, एक अमेरिकी कंपनी भारत की किसी आईटी कंपनी को 100 डॉलर का भुगतान करती है। इस पर 25 प्रतिशत टैक्स यानी 25 डॉलर और कंपनी को देना होगा। इतना ही नहीं, यह भुगतान और टैक्स, दोनों ही कॉरपोरेट टैक्स डिडक्शन में नहीं आएंगे। इससे अमेरिकी कंपनियों पर अतिरिक्त 31 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। अर्थात, 100 डॉलर की सेवा के लिए कंपनी को लगभग 156 डॉलर तक की लागत चुकानी पड़ सकती है।

अमेरिकी कंपनियों के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैक्स वास्तव में प्रोडक्ट ड्यूटी की तरह काम करेगा, न कि केवल कॉरपोरेट इनकम टैक्स की तरह। इससे सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो अपने आईटी, कस्टमर सपोर्ट और बिजनेस प्रोसेस भारत जैसी जगहों से आउटसोर्स करती हैं।बिग 4 ऑडिटर के एक वरिष्ठ टैक्स पार्टनर का कहना है कि “पिछले कुछ वर्षों में आउटसोर्सिंग का दायरा बहुत बढ़ चुका है, खासकर भारत में GCCs के तेजी से बढ़ने के बाद। ऐसे में इस तरह का टैक्स अमेरिकी कंपनियों के लिए बहुत मुश्किलें खड़ी कर सकता है।”

भारत के GCC सेक्टर के लिए बड़ा झटका
भारत में मौजूद ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) यानी वे केंद्र जहां अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां अपना तकनीकी और ऑपरेशनल काम करवाती हैं, इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। भारत में लगभग 1,600 से अधिक GCCs हैं, जिनमें लाखों लोग काम करते हैं। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेज़न, गोल्डमैन सैक्स जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। अगर अमेरिकी कंपनियों पर टैक्स का बोझ बढ़ता है, तो इन केंद्रों में निवेश की रफ्तार धीमी हो सकती है।

आगे क्या हो सकता है?
अभी यह केवल प्रस्तावित कानून है, लेकिन इसे लेकर अमेरिकी कंपनियों की लॉबीइंग शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की कई कंपनियां इस बिल के खिलाफ सख्त पैरवी करेंगी क्योंकि आउटसोर्सिंग रोकना आसान नहीं है। भारतीय आईटी कंपनियों की उच्च गुणवत्ता और कम लागत अमेरिकी व्यवसायों के लिए अहम है। अगर कंपनियों को आउटसोर्सिंग कम करनी पड़ी, तो अमेरिकी ऑपरेशन्स की लागत तीव्र गति से बढ़ेगी।

अमेरिका के प्रस्तावित 25 प्रतिशत आउटसोर्सिंग टैक्स से भारतीय आईटी कंपनियों और GCC इंडस्ट्री के सामने बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है। हालांकि, अमेरिकी कंपनियों की कड़ी विरोधी लॉबी को देखते हुए इस कानून के पास होने की संभावना 50-50 है। अगर यह लागू होता है, तो भारतीय आईटी सेक्टर को नए बाजारों की तलाश करनी होगी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में अधिक निवेश बढ़ाना होगा। आने वाले महीनों में इस बिल पर अमेरिकी संसद की बहस भारतीय उद्योग जगत के लिए बेहद अहम होगी।

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