पटना। बिहार में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ने और इसके लाभों की जानकारी पहुंचाने के लिए सहकारिता विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर किसान गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को फसल बीमा की प्रक्रिया, प्रीमियम और फसल को नुकसान होने की स्थिति में मिलने वाली आर्थिक सहायता के बारे में बताया जाएगा।
राज्य के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने सभी जिलों और प्रखंडों के संबंधित अधिकारियों को योजना के प्रचार-प्रसार और बेहतर क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रशिक्षित अधिकारियों की टीमें प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) में जाकर जागरूकता अभियान में हिस्सा लेंगी। विभाग का उद्देश्य है कि किसानों तक योजना की जानकारी समय पर पहुंचे और वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसका लाभ उठा सकें।
अधिकारियों को दी गई योजना की जानकारी
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सहकारिता विभाग की ओर से हाल ही में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें योजना के नियमों, तकनीकी पहलुओं और क्रियान्वयन से जुड़े जरूरी बिंदुओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों से भी अवगत कराया गया है, ताकि किसानों को सही जानकारी मिल सके और निर्धारित समय-सीमा में जरूरी कार्य पूरे किए जा सकें।
विभाग ने रबी 2026-27 के मौसम को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार काम करने के निर्देश दिए हैं। पंचायत स्तर पर होने वाली किसान गोष्ठियों के माध्यम से योजना के बारे में किसानों की शंकाओं को दूर करने और उन्हें बीमा के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।
फसल खराब होने पर आर्थिक सुरक्षा का उद्देश्य
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रमुख उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या अन्य अधिसूचित जोखिमों के कारण फसल को नुकसान पहुंचने पर पात्र किसानों को आर्थिक राहत उपलब्ध कराना है। इससे खेती में होने वाले नुकसान का बोझ कम करने, किसानों की आय को स्थिर रखने और उन्हें अगली फसल की तैयारी जारी रखने में मदद मिल सकती है।
मंत्री राम कृपाल यादव के अनुसार, योजना किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करती है। फसल बीमा से किसानों को जोखिम के बीच खेती जारी रखने के लिए वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जाता है।
किसानों को कितना देना होगा प्रीमियम?
योजना के तहत किसानों के लिए प्रीमियम की दरें फसल की श्रेणी के अनुसार निर्धारित हैं। खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसान को देना होता है। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें बराबर-बराबर वहन करती हैं।
बिहार में वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी मौसम से योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत फसल को हुए नुकसान के आकलन और पात्रता के आधार पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। किसानों को ध्यान रखना होगा कि बीमा की उपलब्धता, अधिसूचित फसलों और आवेदन की समय-सीमा से जुड़े नियमों की पुष्टि संबंधित विभाग या अधिकृत माध्यम से करें।
तकनीक से नुकसान का आकलन होगा आसान
फसल क्षति के आकलन और दावों के निपटारे को अधिक सटीक तथा पारदर्शी बनाने के लिए ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। इन तकनीकों से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने और प्रक्रिया में तेजी लाने में सहायता मिल सकती है।
पंचायत स्तर पर प्रस्तावित जागरूकता अभियान से किसानों को योजना की शर्तों और लाभों को समझने का अवसर मिलेगा। अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे और किसान समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकें।