अगर आप इस उम्मीद में बैठे हैं कि इस बार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों में कटौती करेगा और आपके होम लोन या कार लोन की EMI कम हो जाएगी, तो फिलहाल आपको इंतजार करना पड़ सकता है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 फरवरी से चल रही है और 6 फरवरी को RBI अपना फैसला सुनाने वाला है। इसी बीच SBI की रिसर्च रिपोर्ट से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार रेपो रेट में कटौती की संभावना बेहद कम है। यानी आम लोगों को EMI में राहत फिलहाल नहीं मिल सकती।
80% एक्सपर्ट्स को कटौती की उम्मीद नहीं
मौद्रिक नीति से पहले एक्सपर्ट्स के बीच एक पोल कराया, जिसमें साफ रुझान सामने आया। पोल के मुताबिक, 80 फीसदी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, 20 फीसदी को सिर्फ 0.25 प्रतिशत की मामूली कटौती की उम्मीद है। खास बात यह है कि 0.50 प्रतिशत कटौती के पक्ष में किसी भी एक्सपर्ट ने राय नहीं दी। इस पोल से संकेत मिलता है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है और आम लोगों को लोन सस्ते होने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
SBI की रिपोर्ट: अभी ‘वेट एंड वॉच’ के मूड में RBI
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट भी यही इशारा करती है कि RBI इस बार रेपो रेट में बदलाव से बच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही घरेलू अर्थव्यवस्था में स्थिरता नजर आ रही हो, लेकिन वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव RBI के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर दबाव है और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी RBI की चिंता बढ़ा रही है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक किसी भी जल्दबाजी के फैसले से बचते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाना चाहता है।
ट्रेड डील से राहत, लेकिन RBI क्यों नहीं घटा रहा दरें?
पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद एक बड़ा बदलाव जरूर देखने को मिला है। भारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील फाइनल हो गई है। इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर करीब 18 प्रतिशत रह गया है। इससे भारत एशिया के उन देशों में शामिल हो गया है, जहां टैरिफ सबसे कम है।
इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यात को मिलेगा और लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। इसके बावजूद RBI ब्याज दरों में कटौती से क्यों बच रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ट्रेड डील से लंबी अवधि में फायदा होगा, लेकिन मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड पर दबाव को देखते हुए RBI फिलहाल सतर्क रुख अपनाना चाहता है।
GDP ग्रोथ और महंगाई: RBI के फैसले की बड़ी वजह
RBI के फैसले में महंगाई और आर्थिक विकास दर (GDP Growth) अहम भूमिका निभाते हैं। फिलहाल भारत की GDP ग्रोथ करीब 7.3 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है, जो वैश्विक स्तर पर मजबूत मानी जाती है। वहीं, महंगाई भी हालिया आंकड़ों में काफी हद तक नियंत्रण में नजर आ रही है। जब अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ती है या ग्रोथ को सपोर्ट करने की जरूरत होती है, तब RBI रेपो रेट घटाकर बाजार में सस्ता पैसा डालता है। लेकिन मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था की रफ्तार ठीक-ठाक बनी हुई है, इसलिए RBI पर दरें घटाने का ज्यादा दबाव नहीं है।
रेपो रेट क्या है? आपकी EMI पर कैसे असर पड़ता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को सस्ते ब्याज पर लोन देने लगते हैं। इसका सीधा फायदा होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कमी के रूप में मिलता है। लेकिन अगर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता, तो बैंकों के ब्याज दरों में भी बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलता। इसका मतलब है कि आपकी EMI फिलहाल उसी स्तर पर बनी रह सकती है।
निवेशकों और आम लोगों के लिए क्या संकेत?
अगर RBI इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करता है, तो शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। ब्याज दरें स्थिर रहने से बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में बड़ी हलचल की उम्मीद कम है। वहीं, आम लोगों के लिए इसका मतलब साफ है – EMI में राहत के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।
अब सबकी नजरें 6 फरवरी को होने वाली RBI की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। निवेशक और आम लोग यह समझने की कोशिश करेंगे कि RBI आने वाले महीनों के लिए क्या संकेत देता है। क्या अगली बैठकों में कटौती की गुंजाइश बन सकती है या फिर केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ‘वेट एंड वॉच’ की नीति पर ही टिका रहेगा – इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।