देशभर में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने लोगों की जेब पर असर डाला, और अब CNG (Compressed Natural Gas) की कीमतों में भी बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गैस वितरण कंपनियों ने CNG के दाम में 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना यात्रा के लिए ऑटो, टैक्सी, बस या CNG से चलने वाले निजी वाहनों पर निर्भर हैं।
वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान से जुड़ी परिस्थितियों के बीच ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी का असर अब भारत के घरेलू गैस बाजार में भी दिखाई देने लगा है।
क्यों बढ़े CNG के दाम?
CNG की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। खासतौर पर ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
ईरान दुनिया के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों में शामिल है। वहां किसी भी प्रकार का भू-राजनीतिक संकट तेल और गैस सप्लाई चेन को प्रभावित करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ता है, तो कीमतें स्वतः ऊपर चली जाती हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ना स्वाभाविक है। गैस वितरण कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत और सप्लाई प्रेशर के कारण कीमतें संशोधित करना जरूरी हो गया था।

मुंबई में नई दरें लागू
Mahanagar Gas Limited ने मुंबई और आसपास के इलाकों में नई CNG दरें लागू कर दी हैं। कंपनी द्वारा कीमतों में की गई बढ़ोतरी के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र में CNG उपभोक्ताओं को अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा।
मुंबई जैसे महानगर में बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा, टैक्सी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट CNG पर निर्भर हैं। इसलिए यहां कीमत बढ़ने का असर केवल वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव यात्रियों और स्थानीय बाजार पर भी दिखाई देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां सामान्य नहीं हुईं, तो आने वाले समय में अन्य शहरों में भी इसी तरह की कीमत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
ऑटो और टैक्सी किराया बढ़ने की संभावना
CNG महंगी होने का सबसे त्वरित असर सार्वजनिक परिवहन पर दिखाई देता है। देश के कई शहरों में ऑटो रिक्शा और टैक्सी सेवाएं CNG आधारित हैं। जब ईंधन महंगा होता है, तो वाहन चालकों की परिचालन लागत बढ़ जाती है।
ऐसे में ऑटो यूनियन और टैक्सी ऑपरेटर किराया बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। यदि किराया बढ़ता है, तो रोजाना ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या बाजार जाने वाले लोगों का मासिक ट्रांसपोर्ट बजट प्रभावित होगा।
मध्यम वर्ग और दैनिक यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकता है। पहले से ही बढ़ती महंगाई, किराया, बिजली बिल और खाद्य पदार्थों की कीमतों के बीच यह नया झटका लोगों के घरेलू बजट को और असंतुलित कर सकता है।
बस सेवाओं और माल ढुलाई पर असर
CNG की कीमतों में बढ़ोतरी केवल निजी या छोटे परिवहन तक सीमित नहीं है। कई शहरों में लोकल बस सेवाएं भी CNG पर संचालित होती हैं। ऐसे में बस ऑपरेटरों की लागत भी बढ़ेगी।
अगर राज्य परिवहन या निजी बस ऑपरेटर इस अतिरिक्त लागत को वहन नहीं कर पाते, तो टिकट दरों में बदलाव संभव है। इससे आम यात्रियों की जेब पर और असर पड़ेगा।
दूसरी ओर, माल ढुलाई क्षेत्र भी प्रभावित होगा। कई छोटे वाणिज्यिक वाहन और डिलीवरी वैन CNG का उपयोग करते हैं। ईंधन महंगा होने पर लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी, जिसका असर धीरे-धीरे वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
रोजमर्रा की चीजें हो सकती हैं महंगी
जब परिवहन लागत बढ़ती है, तो उसका प्रभाव केवल यात्रा खर्च तक सीमित नहीं रहता। फल, सब्जियां, किराना, डेयरी उत्पाद, ई-कॉमर्स डिलीवरी और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की सप्लाई लागत भी बढ़ जाती है। माल ढुलाई महंगी होने पर व्यापारी अतिरिक्त खर्च उपभोक्ताओं पर डालते हैं। परिणामस्वरूप बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि CNG की कीमतों में वृद्धि लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में बाजार में इसका असर स्पष्ट दिखाई देने लगेगा। इससे खुदरा महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आम आदमी पर दोहरी मार
भारत में पहले ही खाद्य महंगाई, शिक्षा खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास लागत में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में CNG की कीमतों में बढ़ोतरी आम आदमी पर दोहरी मार के रूप में सामने आ रही है। जो लोग CNG वाहन चलाते हैं, उनके लिए मासिक ईंधन खर्च बढ़ेगा। वहीं जो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं, उन्हें किराए में संभावित वृद्धि झेलनी पड़ सकती है। छोटे व्यवसाय, डिलीवरी एजेंट, कैब ड्राइवर और ऑटो चालक भी प्रभावित होंगे, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा परिचालन लागत में चला जाएगा।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक हालात फिलहाल स्थिर नहीं हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो तेल और गैस की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
भारत सरकार और ऊर्जा कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत मिलने के संकेत कम नजर आ रहे हैं।
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें नियंत्रित नहीं हुईं, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल, डीजल और गैस सभी ईंधनों पर दबाव बना रह सकता है।CNG की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट का असर सीधे आम लोगों तक पहुंचता है। पेट्रोल और डीजल के बाद अब CNG महंगी होने से परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा की जरूरतों की लागत बढ़ने की आशंका है। Mahanagar Gas Limited द्वारा नई दरें लागू होने के बाद मुंबई और आसपास के इलाकों में इसका असर जल्द दिखना शुरू हो जाएगा। आने वाले समय में यह प्रभाव अन्य शहरों तक भी फैल सकता है। फिलहाल आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई के बीच अपने मासिक बजट को संतुलित रखना है। ऊर्जा कीमतों में यह उछाल बाजार और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।