मध्य प्रदेश में खेती-किसानी की तस्वीर तेजी से बदल रही है। किसान अब पारंपरिक खेती के साथ प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक, उद्यानिकी और पशुपालन जैसे विकल्पों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। खेती में नए प्रयोगों का असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई देने लगा है। इसका उदाहरण पांढुर्णा जिले के उन प्रगतिशील किसानों की सफलता की कहानियों में देखने को मिला, जिन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने अपनी उपलब्धियां साझा कीं।
पांढुर्णा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान जिले के उन्नतशील किसानों ने उनसे संवाद किया और बताया कि किस तरह खेती में नवाचार, प्राकृतिक उत्पादन और कृषि आधारित गतिविधियों को अपनाकर वे बेहतर कमाई कर रहे हैं।
16 एकड़ में संतरे की खेती से लाखों की कमाई
तिगांव गांव के किसान नरेंद्र ठाकरे ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि वह 16 एकड़ जमीन पर संतरे की खेती कर रहे हैं। इससे उन्हें हर साल करीब 15 से 20 लाख रुपये की आमदनी हो रही है। संतरे की खेती के साथ वह सब्जियों का उत्पादन भी करते हैं। इसके अलावा पशुपालन को भी अपनी कृषि गतिविधियों का हिस्सा बनाया है।
नरेंद्र ठाकरे का यह उदाहरण बताता है कि किसान यदि खेती के साथ दूसरी आय के विकल्प भी अपनाएं तो उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है। उद्यानिकी, सब्जी उत्पादन और पशुपालन को एक साथ जोड़कर खेती को अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।
प्राकृतिक खेती से जापान और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच रहे उत्पाद
विकासखंड सौंसर के भुम्मा गांव के किसान मटरूलाल डोंगरे ने बताया कि वह प्राकृतिक खेती के जरिए हल्दी, अरहर और गेहूं का उत्पादन कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अपनी उपज का वैल्यू एडिशन भी करते हैं। इससे उन्हें हर साल करीब दो से ढाई लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिल रहा है।
उनकी खेती की खास उपलब्धि यह है कि उनके प्राकृतिक कृषि उत्पाद जापान और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच रहे हैं। वैल्यू एडिशन के जरिए किसान अपनी सामान्य उपज को अधिक उपयोगी उत्पादों में बदलकर बेहतर बाजार मूल्य हासिल कर सकते हैं। इससे खेती में मुनाफे की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
जैविक खेती और पशुपालन से बढ़ रही आय
ग्राम पिपलानी के किसान विजेश भादे ने बताया कि वह आत्मा योजना के तहत बीआरसी सेंटर स्थापित कर ढाई एकड़ में जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होंने पशुपालन और उद्यानिकी को भी अपनी खेती से जोड़ा है। समन्वित खेती के इस मॉडल से वह हर साल करीब तीन से चार लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
यह मॉडल छोटे और मध्यम किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सीमित जमीन पर अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाकर आय के कई स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के दौरान बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती और किसान हितैषी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय और समृद्धि बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने पांढुर्णा जिले को गेहूं, मक्का, चना, तुअर और संतरा उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में खेती के साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है।
कार्यक्रम में किसानों की सफलता की कहानियों ने यह दिखाया कि खेती में नवाचार, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक उत्पादन और वैल्यू एडिशन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है।