विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त 2026 के पहले पखवाड़े में भारतीय शेयर बाजार में निवेश की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। विदेशी निवेशकों ने जहां खपत आधारित क्षेत्रों, ऑटोमोबाइल, हेल्थकेयर और आईटी में खरीदारी बढ़ाई, वहीं टेलीकॉम, रियल एस्टेट और अन्य कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टरों से पैसा निकाला। यह रुझान संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों का भारत की कंजम्पशन स्टोरी पर भरोसा अब भी मजबूत है।
सैमको सिक्योरिटीज के एक नोट के मुताबिक, 1 से 15 अगस्त के बीच FPIs ने भारतीय इक्विटी में कुल 16,621 करोड़ रुपये का निवेश किया। सेक्टर के आधार पर सबसे ज्यादा निवेश फाइनेंशियल सर्विसेज में हुआ, जहां विदेशी निवेशकों ने 6,535 करोड़ रुपये लगाए। इसके बाद ऑटोमोबाइल में 4,405 करोड़ रुपये, हेल्थकेयर में 2,910 करोड़ रुपये और आईटी सेक्टर में 2,530 करोड़ रुपये का निवेश आया।
कंजम्पशन सेक्टर बना FPI निवेश का प्रमुख केंद्र
विदेशी निवेशकों की रणनीति में कंज्यूमर-ओरिएंटेड सेक्टर सबसे अहम रहे। कंज्यूमर सर्विसेज में पिछली एसेट्स अंडर कस्टडी (AUC) के मुकाबले 1.23 फीसदी का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो इस अवधि में सभी सेक्टरों में सबसे ज्यादा रहा। खास बात यह है कि यह लगातार तीसरा पखवाड़ा है जब कंज्यूमर-ओरिएंटेड सेक्टर AUC-लिंक्ड इनफ्लो के मामले में सबसे आगे रहे।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी 0.82 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। बेहतर मांग और कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीदों ने इस सेक्टर को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया। वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.74 फीसदी, आईटी में 0.64 फीसदी और हेल्थकेयर में 0.55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
टेलीकॉम और रियल्टी में बिकवाली
दूसरी ओर, टेलीकॉम सेक्टर में FPIs ने सबसे ज्यादा बिकवाली की। 1 से 15 अगस्त के बीच इस सेक्टर से 3,322 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जो पिछले AUC के मुकाबले 0.89 फीसदी की गिरावट है।
रियल एस्टेट सेक्टर से भी 1,014 करोड़ रुपये निकाले गए। इसके अलावा पावर सेक्टर से 1,164 करोड़ रुपये, कैपिटल गुड्स से 1,556 करोड़ रुपये और कंस्ट्रक्शन सेक्टर से 404 करोड़ रुपये की निकासी हुई।
निवेशकों की रणनीति में बदलाव
सैमको सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट राज गाइकर के अनुसार, FPI रुझान सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन सेक्टरवार निवेश से स्पष्ट है कि विदेशी निवेशक टेलीकॉम और ज्यादा पूंजी की जरूरत वाले क्षेत्रों से हटकर कंजम्पशन, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, FPIs का यह पैटर्न बताता है कि विदेशी निवेशक बदलते आर्थिक और बाजार माहौल में ऐसे सेक्टरों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां मांग मजबूत रहने की उम्मीद है और कारोबार अपेक्षाकृत स्थिर है। भारत में बढ़ती घरेलू खपत, आय में संभावित सुधार और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि की उम्मीद के बीच कंजम्पशन आधारित कंपनियां विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।