आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, म्यूचुअल फंड कंपनियों के प्रमुख फंड मैनेजरों ने इन शेयरों के महंगे वैल्यूएशन पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि AI तकनीक में बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन निवेशकों को केवल भविष्य की उम्मीदों के आधार पर महंगे शेयर खरीदने से बचना चाहिए।
मुंबई में बुधवार को आयोजित बिजनेस स्टैंडर्ड BFSI इनसाइट समिट 2026 में विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना चाहिए। साथ ही, कंपनियों की वास्तविक कमाई, कारोबार की मजबूती और लंबी अवधि में विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए।
AI निवेश से कमाई पर नजर
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के इक्विटी सीआईओ हरीश कृष्णन ने कहा कि AI तकनीक कामकाज को आसान बनाने और बेहतर फैसले लेने में मदद कर रही है। हालांकि, अगले 12 से 18 महीनों में कंपनियों को AI पर किए जा रहे भारी निवेश से वास्तविक आर्थिक फायदा दिखाना होगा। ऐसा नहीं होने पर निवेशकों की उम्मीदों को झटका लग सकता है।
एक्सिस एएमसी के सीआईओ आर शिवकुमार ने भी AI क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा निवेश की आशंका जताई। उनके मुताबिक, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बड़े पैमाने पर तैयार हो रहे AI इंफ्रास्ट्रक्चर से कंपनियों को कितना लाभ मिलेगा।
महंगे वैल्यूएशन से बढ़ सकता है जोखिम
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के कार्यकारी निदेशक और सीआईओ शंकरन नरेन ने कहा कि AI से जुड़ी कंपनियों के शेयर महंगे नजर आ रहे हैं। उनके मुताबिक, निवेशकों को एक ही क्षेत्र में पूरा पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग परिसंपत्तियों में निवेश बांटना चाहिए।
वहीं, इनवेस्को म्यूचुअल फंड के प्रेसिडेंट और सीआईओ ताहेर बादशाह ने कहा कि AI में लंबी अवधि की विकास संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन बीच-बीच में गिरावट और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। AI के विस्तार से बिजली, पानी और दुर्लभ खनिजों की मांग भी बढ़ सकती है।
AI से फायदा उठाने वाली कंपनियों पर नजर
बजाज एसेट मैनेजमेंट के सीआईओ निमेश चंदन के अनुसार, निवेशकों को केवल AI तकनीक बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन कंपनियों में भी अवसर हो सकते हैं, जो AI के इस्तेमाल से बिक्री बढ़ाने, लागत घटाने और मुनाफा सुधारने में सफल होंगी।
विशेषज्ञों ने मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सावधानी बरतने तथा केवल पिछले रिटर्न देखकर निवेश नहीं करने की सलाह दी। उनका कहना है कि निवेशकों को कंपनियों के वैल्यूएशन और कमाई की संभावनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विदेशी बाजारों में निवेश पर भी सलाह
फंड मैनेजरों ने विदेशी बाजारों में हालिया तेजी देखकर भारतीय शेयरों से पैसा निकालने के प्रति भी आगाह किया। हरीश कृष्णन ने कहा कि विदेशी बाजारों में निवेश करते समय उन क्षेत्रों पर विचार किया जा सकता है, जहां भारत की कंपनियों की मौजूदगी सीमित है। हालांकि, निवेशकों को वैश्विक अवसरों के साथ जोखिम और अपने पोर्टफोलियो का संतुलन भी समझना चाहिए।
विशेषज्ञों का कुल संदेश यही रहा कि AI में भविष्य की संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन निवेश का फैसला केवल चर्चा और तेजी के आधार पर नहीं होना चाहिए। कंपनियों की वास्तविक कमाई, उचित वैल्यूएशन और लंबी अवधि की कारोबारी मजबूती को ध्यान में रखना जरूरी है।