भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो कारोबारी सत्र की तेजी के बाद बुधवार को बिकवाली हावी रही। घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट बढ़ाए जाने का असर भी बाजार के रुख पर देखने को मिला।
कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,603.05 अंक पर पहुंच गया।
30 में सिर्फ चार शेयर चढ़े
सेंसेक्स की तस्वीर देखें तो बाजार में बिकवाली का दबाव काफी व्यापक रहा। 30 कंपनियों वाले सूचकांक में केवल चार शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि बाकी 26 में गिरावट दर्ज की गई।
कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस बढ़त वाले प्रमुख शेयर रहे। दूसरी ओर टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एशियन पेंट्स और इन्फोसिस पर दबाव देखने को मिला।
इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने बुधवार के कारोबार में चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के बजाय मुनाफावसूली और सतर्कता को प्राथमिकता दी।
एक दिन पहले बाजार में थी तेजी
इससे पहले मंगलवार को बाजार ने मजबूत प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 685.34 अंक चढ़कर 73,067.81 अंक पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 220.35 अंक की तेजी दर्ज की गई थी और यह 22,776.10 अंक पर बंद हुआ।
मंगलवार को सेंसेक्स के 30 शेयरों में 21 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए थे। वहीं, बुधवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई और ज्यादातर शेयर लाल निशान में चले गए।
आरबीआई के फैसले पर बाजार की नजर
बाजार में बुधवार की गिरावट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति भी चर्चा के केंद्र में रही। आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया।
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्प अवधि के लिए धन उपलब्ध कराता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों के लिए फंडिंग महंगी हो सकती है, जिसका असर आगे चलकर कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
महंगे कर्ज का असर बाजार पर
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर सिर्फ बैंकिंग और लोन लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों की उधारी लागत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं के खर्च पर भी असर पड़ सकता है। इससे कुछ क्षेत्रों में मांग और निवेश की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका रहती है।
इसके अलावा बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों, ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमत और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर रहेगी। इन्हीं कारकों से तय होगा कि हालिया गिरावट के बाद बाजार में फिर खरीदारी लौटती है या दबाव आगे भी जारी रहता है।