भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ₹10,000 करोड़ के “फंड ऑफ फंड्स” (FoF) के दूसरे चरण को मंजूरी देते हुए नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह योजना भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा देने का काम करेगी। इस पहल को Department for Promotion of Industry and Internal Trade के तहत लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश में इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और उद्यमिता को मजबूत बनाना है। सरकार का फोकस साफ है—स्टार्टअप्स को सिर्फ शुरुआत में नहीं, बल्कि हर चरण में पूंजी उपलब्ध कराना ताकि वे तेजी से आगे बढ़ सकें और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
क्या है फंड ऑफ फंड्स (FoF) योजना?
फंड ऑफ फंड्स एक ऐसा मॉडल है जिसमें सरकार सीधे स्टार्टअप्स में पैसा निवेश नहीं करती, बल्कि यह पैसा अलग-अलग निवेश फंड्स के जरिए स्टार्टअप्स तक पहुंचता है। यह योजना Small Industries Development Bank of India के माध्यम से संचालित की जाती है। SIDBI इन फंड्स का चयन करता है और उनकी निगरानी भी करता है। इन निवेश फंड्स को Securities and Exchange Board of India के साथ रजिस्टर होना जरूरी है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि प्रोफेशनल निवेशक और वेंचर कैपिटल फर्म्स स्टार्टअप्स का चयन करती हैं, जिससे बेहतर और मजबूत कंपनियों को फंडिंग मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
Phase-2 में क्या है खास?
इस नए चरण में सरकार ने कुछ बड़े बदलाव किए हैं, जो इसे और प्रभावी बनाते हैं। सबसे पहले, इस बार फंड को अलग-अलग सेक्टर्स में बांटा गया है ताकि हर तरह के स्टार्टअप्स को मौका मिल सके। इसमें डीप-टेक, माइक्रो वेंचर कैपिटल, टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग और सेक्टर-एग्नोस्टिक फंड शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि अब सिर्फ बड़े शहरों या IT स्टार्टअप्स तक ही फंडिंग सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन आधारित स्टार्टअप्स को भी बराबर मौका मिलेगा।
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किन स्टार्टअप्स को मिलेगा फायदा?
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं स्टार्टअप्स को मिलेगा जो DPIIT से मान्यता प्राप्त हैं। ऐसे स्टार्टअप्स जो टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और स्केलेबिलिटी पर काम कर रहे हैं, उन्हें इस योजना के तहत प्राथमिकता मिलेगी। खासकर डीप-टेक स्टार्टअप्स—जैसे AI, रोबोटिक्स, क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर—को इस बार ज्यादा फोकस दिया गया है, क्योंकि ये सेक्टर भविष्य की अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले हैं।
कैसे मिलेगा फंड? पूरी प्रक्रिया समझिए
फंडिंग पाने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है, ताकि सही स्टार्टअप्स तक पैसा पहुंचे। सबसे पहले, कार्यान्वयन एजेंसी स्टार्टअप्स और फंड्स की प्रारंभिक जांच (screening) करती है। इसके बाद ड्यू डिलिजेंस यानी विस्तृत जांच होती है, जिसमें कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति, टीम और बिजनेस मॉडल को परखा जाता है। इसके बाद एक विशेषज्ञ समिति अंतिम फैसला लेती है। इस समिति में उद्योग जगत के अनुभवी लोग शामिल होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि निवेश सही जगह पर हो। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद है—जो स्टार्टअप्स सच में मजबूत और संभावनाओं से भरे हैं, उन्हें ही फंडिंग मिले।
पारदर्शिता और निगरानी पर खास जोर
सरकार ने इस बार पारदर्शिता और निगरानी को लेकर भी कड़े नियम बनाए हैं SIDBI न सिर्फ फंड्स का चयन करेगा, बल्कि उनकी लगातार निगरानी भी करेगा। इसके अलावा, एक अतिरिक्त एजेंसी को भी शामिल किया जाएगा, जिससे योजना की पहुंच और प्रभाव बढ़ सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पैसा सही दिशा में इस्तेमाल हो और स्टार्टअप्स को वास्तविक फायदा मिले।
स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
यह योजना सिर्फ स्टार्टअप्स के लिए ही नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। जब सरकार इस तरह की योजनाओं के जरिए फंडिंग को सपोर्ट करती है, तो निजी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है। इससे वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी फंड्स भी ज्यादा निवेश करने के लिए प्रेरित होते हैं। इसका सीधा असर यह होता है कि स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना आसान हो जाता है और वे तेजी से ग्रोथ कर पाते हैं।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर प्रभाव
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप हब्स में से एक बन चुका है। ऐसे में इस तरह की योजनाएं देश के इनोवेशन इकोसिस्टम को और मजबूत बनाती हैं। फंड ऑफ फंड्स Phase-2 से न सिर्फ नए स्टार्टअप्स को मौका मिलेगा, बल्कि मौजूदा स्टार्टअप्स को भी अपने बिजनेस को विस्तार देने में मदद मिलेगी। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष: एक मजबूत भविष्य की ओर कदम
₹10,000 करोड़ की यह योजना भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकती है। सरकार का यह कदम दिखाता है कि वह सिर्फ नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप्स को वास्तविक समर्थन देने के लिए ठोस कदम उठा रही है। अगर इस योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। कुल मिलाकर, यह पहल न केवल स्टार्टअप्स के लिए, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव डालने वाली साबित हो सकती है।
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