शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। बाजार में गिरावट के दौरान केवल शेयरों पर निर्भर रहने से निवेश की कुल वैल्यू पर ज्यादा असर पड़ सकता है। ऐसे में निवेश विशेषज्ञ अलग-अलग एसेट क्लास में पैसा बांटने यानी डायवर्सिफिकेशन पर जोर देते हैं। शेयर, डेट और सोने का संतुलित मिश्रण लंबी अवधि में रिटर्न की संभावना बढ़ाने और जोखिम को संभालने में मदद कर सकता है।
व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड के ‘केमिस्ट्री ऑफ इन्वेस्टिंग’ अध्ययन में अलग-अलग निवेश संयोजनों के ऐतिहासिक प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया है। इसके नतीजों के मुताबिक, कुछ पोर्टफोलियो में शेयरों और सोने को शामिल करने से रिटर्न बढ़ा, जबकि उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत सीमित रहा। हालांकि, ऐतिहासिक प्रदर्शन भविष्य में मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं है।
डेट के साथ शेयरों का मिश्रण कितना फायदेमंद?
डेट निवेश को आम तौर पर पोर्टफोलियो में अपेक्षाकृत स्थिरता लाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि इक्विटी में लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने की संभावना रहती है। अध्ययन में 100 फीसदी डेट वाले पोर्टफोलियो का औसत सालाना रिटर्न 6.74 फीसदी और उतार-चढ़ाव 6.36 फीसदी दर्ज किया गया।
जब पोर्टफोलियो में 10 फीसदी इक्विटी शामिल की गई, तो औसत सालाना रिटर्न बढ़कर 7.93 फीसदी हो गया। वहीं, उतार-चढ़ाव घटकर 5.77 फीसदी रहा। इसी तरह, 80 फीसदी डेट और 20 फीसदी इक्विटी वाले संयोजन ने औसतन 9.11 फीसदी सालाना रिटर्न दिया, जबकि उतार-चढ़ाव 6.40 फीसदी था।
दूसरी ओर, 50 फीसदी डेट और 50 फीसदी इक्विटी वाले पोर्टफोलियो का औसत सालाना रिटर्न 12.66 फीसदी रहा। लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव बढ़कर 12.41 फीसदी हो गया। पूरी तरह इक्विटी वाले पोर्टफोलियो ने 18.58 फीसदी औसत सालाना रिटर्न दिया, जबकि इसका उतार-चढ़ाव 25.34 फीसदी था। इससे पता चलता है कि अधिक रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी बढ़ सकता है।
पोर्टफोलियो में सोना जोड़ने से क्या होगा?
सोने को निवेश में शामिल करने का एक उद्देश्य पोर्टफोलियो में विविधता लाना है। इसकी कीमतों में होने वाले बदलाव हमेशा शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के समान नहीं होते। अध्ययन में 20 फीसदी सोने के साथ डेट और इक्विटी के विभिन्न संयोजनों का विश्लेषण किया गया।
55 फीसदी डेट, 25 फीसदी इक्विटी और 20 फीसदी सोने वाले पोर्टफोलियो ने औसतन 11.58 फीसदी सालाना रिटर्न दिया। इसमें उतार-चढ़ाव 6.81 फीसदी रहा। वहीं, 70 फीसदी डेट, 10 फीसदी इक्विटी और 20 फीसदी सोने वाले पोर्टफोलियो का औसत रिटर्न 9.80 फीसदी रहा और उतार-चढ़ाव 5.50 फीसदी दर्ज किया गया।
60 फीसदी डेट, 20 फीसदी इक्विटी और 20 फीसदी सोने वाले संयोजन ने औसतन 10.98 फीसदी सालाना रिटर्न दिया, जबकि उतार-चढ़ाव 6.10 फीसदी रहा।
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
निवेश का सही अनुपात हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। यह उसके वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि, नियमित आय और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है। कम अवधि में पैसे की जरूरत वाले निवेशकों और लंबी अवधि के लक्ष्य रखने वालों की रणनीति एक जैसी नहीं होनी चाहिए।
निवेशकों को बाजार में गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। इक्विटी, डेट और सोने में निवेश का संतुलन बनाए रखना जोखिम प्रबंधन में मदद कर सकता है, लेकिन किसी भी संयोजन से नुकसान की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती।