India-Israel relationalship: भारत और इजरायल के संबंधों ने एक बार फिर नई रफ्तार पकड़ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, खनिज, कृषि, साइबर सुरक्षा और गतिशीलता जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में 16 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। साथ ही 10 नई पहलों की भी घोषणा की गई, जिनमें संयुक्त रक्षा विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और अगले पांच वर्षों में 50,000 अतिरिक्त भारतीय कामगारों को इजरायल भेजने की योजना शामिल है।
यह समझौते केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें “शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत-इजरायल संबंधों को पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़ाकर हाई-टेक और भविष्य की तकनीकों की साझेदारी में बदलने की दिशा में बड़ा कदम है।
मोदी-नेतन्याहू वार्ता: व्यापार और तकनीक पर फोकस
येरुशलम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की विस्तृत वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार टीमों को परस्पर लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत तेज करने का निर्देश दिया। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते पर अगला दौर मई में प्रस्तावित है।
संयुक्त संबोधन में मोदी ने कहा कि दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं इजरायल नवाचार और तकनीक में अग्रणी है, जबकि भारत प्रतिभा, विनिर्माण क्षमता और बड़े बाजार के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि दोनों देश AI, क्वांटम तकनीक और दुर्लभ खनिज जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं।
AI और उभरती तकनीकों में संयुक्त पहल
दोनों देशों ने महत्त्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी के लिए कई समझौते किए हैं। इसमें AI, साइबर सुरक्षा, क्वांटम तकनीक और डिजिटल नवाचार शामिल हैं। संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारत-इजरायल रिसर्च फंड में दोनों पक्षों का योगदान 10 लाख डॉलर से बढ़ाकर 15 लाख डॉलर प्रत्येक किया जाएगा। इसके अलावा “होराइजन स्कैनिंग और स्ट्रेटेजिक फोरसाइट” तंत्र स्थापित करने पर भी सहमति बनी है, जिसका उद्देश्य वैश्विक तकनीकी और आर्थिक रुझानों की पहचान करना है। यह तंत्र भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर संयुक्त रणनीति बनाने में मदद करेगा।
रक्षा और साइबर सुरक्षा सहयोग में मजबूती
भारत और इजरायल पहले से ही रक्षा सहयोग के मजबूत साझेदार रहे हैं, लेकिन इस दौरे में इसे नए स्तर पर ले जाया गया। संयुक्त रक्षा विकास, तकनीक हस्तांतरण और उन्नत रक्षा प्रणालियों पर सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही भारत-इजरायल साइबर सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा हुई है। दोनों देशों के राष्ट्रीय साइबर प्राधिकरणों के बीच संवाद बढ़ाया जाएगा, जिससे साइबर खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत होगी।
कृषि और नवाचार: गांव तक पहुंचेगी साझेदारी
इजरायल कृषि तकनीक में विश्व स्तर पर अग्रणी माना जाता है। इसी अनुभव का लाभ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। भारत में इजरायल के सहयोग से स्थापित उत्कृष्टता केंद्रों की संख्या 43 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। इसके अलावा “विलेजेज ऑफ एक्सीलेंस” कार्यक्रम के तहत आधुनिक कृषि तकनीक और जल प्रबंधन मॉडल गांव स्तर पर लागू किए जाएंगे। दोनों देशों ने भारत-इजरायल कृषि नवाचार केंद्र स्थापित करने पर भी सहमति जताई है। इससे किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
50,000 भारतीय कामगारों को अवसर
गतिशीलता और रोजगार सहयोग के तहत इजरायल ने अगले पांच वर्षों में अपने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में 50,000 अतिरिक्त भारतीय कामगारों को अनुमति देने की घोषणा की है। इनमें विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण और सेवा क्षेत्र शामिल हैं। यह कदम भारतीय श्रमिकों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय अवसर खोलेगा और दोनों देशों के बीच श्रम सहयोग को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत के कौशल निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
व्यापार और बुनियादी ढांचा सहयोग
इजरायल ने अपने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं – मेट्रो, रेल, सड़क, हवाई अड्डों, जल विलवणीकरण और अपशिष्ट जल प्रबंधन में भारतीय कंपनियों की अधिक भागीदारी का आग्रह किया है। इससे भारतीय निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण भारत-इजरायल व्यापार प्रभावित हुआ है। 2024-25 में भारत का इजरायल को निर्यात 4.52 अरब डॉलर से घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद दोनों देशों ने व्यापार को नई दिशा देने का संकल्प जताया है।
सांस्कृतिक जुड़ाव: ‘फौदा’ टीम से मुलाकात
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की लोकप्रिय जासूसी वेब सीरीज “फौदा” के कलाकारों और टीम से मुलाकात की। उन्होंने टीम के साथ ली गई सेल्फी सोशल मीडिया पर साझा की, जो काफी चर्चा में रही। यह मुलाकात केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक नहीं थी, बल्कि भारत-इजरायल लोगों के बीच बढ़ते संपर्क का संकेत भी मानी जा रही है। मोदी ने इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग से भी मुलाकात कर शिक्षा, स्टार्टअप और नवाचार सहयोग पर चर्चा की।
रणनीतिक साझेदारी का नया चरण
2017 में मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा और 2018 में नेतन्याहू की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में तेजी आई थी। मौजूदा दौरा उस साझेदारी को “विशेष रणनीतिक” स्तर पर ले जाने का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल की तकनीकी क्षमता और भारत का विशाल बाजार व प्रतिभा मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत नवाचार साझेदारी बना सकते हैं। AI, रक्षा, कृषि और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगा।
हाई-टेक भविष्य की ओर भारत-इजरायल
16 समझौतों और नई पहलों के साथ भारत-इजरायल संबंध पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर तकनीकी और आर्थिक साझेदारी के नए युग में प्रवेश कर चुके हैं। यह सहयोग न केवल दोनों देशों की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक तकनीकी और सुरक्षा परिदृश्य में भी नई भूमिका तय करेगा। भारत के लिए यह साझेदारी उन्नत तकनीक और रक्षा नवाचार तक पहुंच का माध्यम है, जबकि इजरायल के लिए भारत एक विशाल बाजार और विश्वसनीय भागीदार है। यही कारण है कि दोनों देशों के रिश्ते अब “सुरक्षा सहयोग” से आगे बढ़कर “भविष्य की तकनीकी साझेदारी” के रूप में विकसित हो रहे हैं।