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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > फार्मा > भारत का healthcare sector बना निवेशकों का पसंदीदा, मेडटेक और हॉस्पिटल कंपनियों की रिकॉर्ड ग्रोथ
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भारत का healthcare sector बना निवेशकों का पसंदीदा, मेडटेक और हॉस्पिटल कंपनियों की रिकॉर्ड ग्रोथ

Last updated: 27/11/2025 4:57 PM
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Industrial Empire
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भारत के शेयर बाजार में पिछले कुछ सालों से healthcare sector लगातार चमक रहा है। इक्विरस कैपिटल की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि एनएसई हेल्थकेयर इंडेक्स ने पिछले 1 साल, 3 साल और 5 साल हर अवधि में निफ्टी 50 को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, हेल्थकेयर के तीन बड़े क्षेत्र मेडटेक, हॉस्पिटल और फार्मा लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इन सेक्टरों में तेजी से बढ़ा है।

healthcare इंडेक्स की मजबूत छलांग
रिपोर्ट के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि हेल्थकेयर सेक्टर ने पूरे मार्केट की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। पिछले तीन साल में जहां निफ्टी 50 ने 48 फीसदी फीसदी का रिटर्न दिया, वहीं फार्मा सेक्टर 73% तक पहुंच गया। इससे भी तेजी हॉस्पिटल कंपनियों में देखने को मिली, जिन्होंने 183% का प्रभावशाली रिटर्न दिया। लेकिन सबसे आगे रहा मेडटेक सेक्टर, जिसने 221% की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की—जो किसी भी अन्य सेक्टर की तुलना में कई गुना अधिक है। पिछले एक साल के रुझान पर नजर डालें तो भी मेडटेक और हॉस्पिटल दोनों ही सेक्टरों ने निफ्टी 50 को पीछे छोड़ते हुए बेहद मजबूत रिटर्न दिए हैं। ये आंकड़े यह साबित करते हैं कि हेल्थकेयर अब केवल एक पारंपरिक सेक्टर नहीं रहा, बल्कि आने वाले समय का सबसे स्थिर, सुरक्षित और लाभदायक निवेश केंद्र बन चुका है।

फंडरेजिंग में टूटा कोविड काल का रिकॉर्ड
रिपोर्ट के अनुसार लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर कंपनियां अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा पूंजी जुटा रही हैं। कोविड के समय FY22 में जहां 62,432 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, वहीं FY26 में यह आंकड़ा बढ़कर 72,440 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी साफ बताती है कि हेल्थकेयर सेक्टर में निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। इक्विरस कैपिटल के डायरेक्टर सिद्धार्थ अय्यर ने भी बताया कि इस साल फार्मा, हॉस्पिटल और मेडटेक – तीनों ही सेगमेंट में व्यवसाय तेजी से बढ़ा है, जिसका सीधा असर डील के आकार पर दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर, फार्मा सेक्टर में औसत डील साइज 700 करोड़ से बढ़कर 2,100 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि हॉस्पिटल सेक्टर में यह 300 करोड़ से बढ़कर 850 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि कंपनियां न सिर्फ बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं बल्कि बड़े स्तर पर विस्तार की रणनीति भी अपना रही हैं।

M&A ट्रांजैक्शन 4 गुना बढ़े
हेल्थकेयर सेक्टर में कंपनियों के बीच होने वाले मर्जर और एक्विज़िशन का आकार तेजी से बढ़ रहा है। पहले जहां एक ट्रांजैक्शन लगभग 700–800 करोड़ का होता था, वहीं अब यह औसत बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। FY26 में शेयर बाजार से जुटाए गए 51,000 करोड़ रुपये में से 63% (32,000 करोड़) सिर्फ फार्मा सेक्टर से आए। यह दर्शाता है कि फार्मा कंपनियों का मार्केट पर दबदबा और निवेशकों का भरोसा दोनों ही मज़बूत हो चुके हैं।

2026 में हेल्थकेयर सेक्टर को बदलने वाले 5 बड़े ट्रेंड
इक्विरस की रिपोर्ट 2026 के लिए पांच मुख्य बदलावों की ओर इशारा करती है –

हेल्थकेयर सेवाओं में समेकन (Consolidation) की रफ्तार बढ़ेगी – प्राइवेट इक्विटी फंड देशभर की हेल्थकेयर सेवाओं को एक नेटवर्क में जोड़ने की दिशा में तेजी से काम करेंगे।

छोटे शहरों में डायग्नोस्टिक चेन का विस्तार – बड़ी लैब कंपनियां कस्बों और टियर-3 शहरों की छोटी लैब्स को खरीदकर अपना नेटवर्क बढ़ाएंगी।

सिंगल-स्पेशियलिटी अस्पतालों में निवेश बढ़ेगा – ऑर्थो, कार्डियक, फर्टिलिटी जैसे एक ही विशेषज्ञता वाले अस्पतालों की लोकप्रियता बढ़ेगी।

मेडटेक कंपनियों का उच्च वैल्यूएशन – उत्पाद कम और मांग अधिक होने के चलते मेडटेक कंपनियों की वैल्यू तेजी से बढ़ती रहेगी।

अस्पतालों का कम-खर्च वाला बिजनेस मॉडल – हॉस्पिटल चेन अब बिना भारी निवेश के नए सेंटर खोलने की रणनीति अपनाएँगी।

IPO बाजार में हेल्थकेयर का दबदबा
फार्मा, CDMO, हॉस्पिटल और डायग्नोस्टिक कंपनियों को मार्केट में उनकी कमाई के मुकाबले उच्च प्रीमियम मिल रहा है। इसी वजह से कई कंपनियां IPO, QIP और अन्य साधनों से पूंजी जुटाने के लिए उत्साहित हैं। पब्लिक और प्राइवेट वैल्यूएशन के बीच का बड़ा अंतर भी कंपनियों को शेयर बाजार में आने की बड़ी वजह बन रहा है।

आने वाले समय में निवेश का बड़ा मौका
इक्विरस का अनुमान है कि आने वाले तीन साल भारत के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए और भी तेज़ उछाल लेकर आएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक प्राइवेट इक्विटी (PE) और M&A सौदों के जरिए करीब 5.3 अरब डॉलर का निवेश होने की संभावना है। वहीं इक्विटी कैपिटल मार्केट्स—जैसे IPO और QIP—में लगभग 8 अरब डॉलर की बड़ी गतिविधि देखने को मिल सकती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ हेल्थकेयर और मेडटेक सेक्टर में ही 4.5 अरब डॉलर तक का प्राइवेट इक्विटी निवेश आने का अनुमान है।

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